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बेरोजगारी का सफर – हिंदी कविता

बेरोजगारी ने इतना समय लिया लंबा अब तो डिग्री लगे बस कागज का पन्ना कितने दिए इंटरव्यू कितने एग्जाम मिला ना अब तक कोई अच्छा काम अब तो प्राइवेट नौकरी भी मांगे एक्सपीरियंस देगा भला कौन पहला एक्सपीरियंस घिस गया चप्पल टूट गया जूता मिला नहीं फिर भी कोई काम ढंग का समझ नहीं

गांव का मेला – हास्य व्यंग

प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के बाद, भारत देश के कई राज्यों में मेले का आयोजन होता आया है। अधिकांशतः ये मेले दूर दराज गांव में लगते देखे जाते हैं। चूँकि मेलों का आयोजन ग्रामीण व छोटे शहरी इलाकों में ही होता है अतः उसमें विचरण करने वाले लोगों की संख्या ज्यादातर ग्रामीणों की

करुण कविता – नेक मुर्गा

करुण कविता – ‘नेक मुर्गा’ अपने मालिक की भूख से बेहाली देख मुर्गे की आंखों में आया पानी सोचा इसी घर में खाया चुग-चुग कर दाना आज मालिक के काम है आना भूख से दिन बीते हैं चार मालिक मेरा हुआ बीमार मालिक को मुझे बचाना है नमक का कर्ज चुकाना है सोच गया

उम्मीद की किरण – हिंदी कविता

हिंदी कविता शीर्षक – “उम्मीद की किरण” निराशा के घोर अंधेरे के बीच उम्मीद की एक किरण झिलमिलाती है वहीं किरण लौ फिर मसाल बन जीवन को जगमगाती है हे मानव हिम्मत ना हार समस्या करे प्रहार पर प्रहार खुशियां कदम चूमेगी तेरी लक्ष्य पर नजर तू डाल हर समस्या का समाधान उसके आसपास

बेमतलब समाचार – हास्य व्यंग!

मनोज रसिया Studio में News पढ़ने को तैयार हैं। मनोज रसिया (समाचार पढ़ते हुए) – नमस्कार आज के बेमतलब समाचार इस प्रकार हैं ! 1) कपड़ा मंत्री पर विपक्षी पार्टियों ने कपड़ा चोरी करने का संगीन आरोप लगाया है। विपक्ष के मंत्रियों का कहना है की, मंत्री जी ने ग़रीबों में बाँटने को आये

हे भारत मातृभूमि हमारी

हे भारत मातृभूमि हमारी हे भारत मातृभूमि हमारी जन्म दिया तुमने यहां पर तुमने ही चलना सिखलाया गोद में तेरी खेले हैं हम कभी न तुमने हमें रुलाया हमें है तू प्राणों से प्यारी हे भारत मातृभूमि हमारी ! तू उपवन हम फूल हैं तेरे तुमने ही हमको सींचा है नस नस बहती रक्त

कविता शीर्षक – “माता पिता की खुशी”

कविता शीर्षक – “माता पिता की खुशी” बड़े नाजों नखरे उठा माता पिता अपने बच्चों को पढ़ाते हैं वही बच्चे बड़े होकर के ऊंचे-ऊंचे ओहदे पाते हैं शादी विवाह के बाद वो अपने परिवार में खो जाते हैं ढूंढती होगी माता-पिता की नजर यह भी भूल जाते हैं जिन बच्चों की खुशियों के खातिर

YouTube के अनाड़ी

भारत समेत विश्व के अन्य देशों में विगत 28 वर्षों में कई व्यापक बदलाव आये हैं जैस सूचना प्रसार के क्षेत्र , विज्ञान के क्षेत्र , शिक्षा रोजगार के क्षेत्र और यहाँ तक की लोगों का रहन सहन भी अब 90 के दशक या उसके पहले जैसा नहीं रह गया। खैर बदलाव ही इस

आँसू – हिंदी कविता

कविता शीर्षक – “आँसू” आँसू के कई हैं रूप जैसे छाँव और है धूप कुछ खुशी के, कुछ गम के आंँसू होते हैं कुछ छलकते हैं, कुछ आँखों को नम करते हैं अत्यधिक खुशी पाकर भी आँखों से आँसू ढलक जाते हैं दर्द का फफोला फूट कर आँसू बनकर बह जाते हैं कुछ आँसू

पंछी की चाह – हिंदी कविता

भला कैद रहकर जीना कौन चाहता है , फिर वो चाहे इंसान हो या एक परिंदा। पिंजरे में कैद एक पंछी आखिर क्या सोचता होगा ? कुदरत ने उसे अनंत आकाश में उड़ने का वरदान दिया मगर इंसानी ताकतों नें उसे कैद कर अपना ग़ुलाम बना लिया। एक कैद पंछी की चाहत को बयां