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विजयादशमी जो कि सत्य के विजयी भाव का प्रतीक है

हर साल हम विजयदशमी मनाते हैं रावण को जलाते हैं। उस रावण को जिसका वध बहुत पहले भगवान राम जी ने कर दिया था। मगर उसका या उसके पुतले का दहन हम आज तक कर रहे हैं। उस रावण का दहन देखने को न जाने कितनी भीड़ लगती है। बच्चे , बूढ़े , जवान

इन लेखकों ने बदला वर्तमान भारतीय साहित्य का परिदृश्य

कहा जाता है कि पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं और मुझे नहीं लगता कि आज तक कही जाने वाली सारी बातों में से कोई भी बात ऐसी होगी जो इस बात से ज्यादा खूबसूरत होगी। पुस्तकें समाज का प्रतिबिंब हैं और इन पुस्तकों से ही साहित्य की नींव निर्धारित होती है। भारतीय