शिक्षा क्षेत्र Education – भारत में शिक्षा व्यवस्था Archive

डिजाइनिंग के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं ? करियर के बेहतर विकल्प के लिए

आजकल हर एक शख्स Creativity के रास्ते पर आगे बढ़ता जा रहा है। सभी को नई चीजों को सीखने का शौक है और सबसे बेहतर बात तो यह है कि अब यह छोटे शौक Career में तब्दील होते जा रहे हैं। जी हाँ, आज मैं आपको बताना चाहूँगी Designing के क्षेत्र से जुड़े कुछ

प्रोफेशनल कोर्सेस का करें चुनाव

हम सभी जानते हैं कि दुनिया में प्रतिस्पर्धा हर नए दिन बढ़ती चली जा रही है। आज के वक्त में खुद को सिद्ध करना सबसे ज्यादा जरूरी होता जा रहा है, यही कारण है कि करियर को इतना महत्वपूर्ण माना जाने लगा हैं। यदि एक तरीके से देखा जाए तो यह सही ही है

सफलता के अचूक नुस्खे

सफलता कोई रहस्य नहीं जीवन यात्रा का एक पड़ाव मात्र है, सफलता अत्यधिक परिश्रम मंगली है। आप सफल नहीं हुए अर्थात पर्याप्त मात्रा में परिश्रम नहीं किया गया। सफलता का एक रहस्य और है वह यह है कि जीवन के कुछ पहलुओं का सही और सुनिश्चित उपाय। आपका ‘आज’, ईश्वर की ओर से आपको

विद्यार्थी और परीक्षा – कैसे करें परीक्षा की तयारी, किन बातों का ध्यान रखें विद्यार्थी

मेरे प्यारे विद्यार्थियों, शिक्षा सत्र 2017- 18 अपने समापन की ओर है और अगले सप्ताह से बोर्ड की परीक्षायें शुरू होने वाली हैं, परीक्षा को लेकर अक्सर विद्यार्थियों और अभिभावक परेशान नज़र आते हैं। इस स्थिति में अभिभावकों का चिंतित होने और उनका बच्चों के प्रति कर्तव्य निर्वाहन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उनका

स्कूलों में बढ़ता अपराध और समाज की भागीदारी

हालिया कुछ दिनों में ऐसी घटनायें घटीं हैं जो समाज में हो रहे वैचारिक पतन को दर्शाता है। मेरा इशारा गुरुरगाम व् दिल्ली के स्कूल में हुयी ताज़ा घटना जिसमें एक 7 साल के बच्चे की निर्मम हत्या और एक 5 साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार की तरफ है। यह घटना कोई

गुरु शिष्य संबंध बनाम शिक्षक छात्र संबंध

किसी भी व्यक्ति के जीवन में शिक्षक का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ व्यवहारिक जीवन में भी व्यक्ति को कहीं न कहीं सीखने की आवश्यकता होती है। विद्यालय में हम जो शिक्षा प्राप्त करते हैं, वो हमारी औपचारिक शिक्षा होती है। परंतु, व्यक्तिगत जीवन में भी अनेक अवसरों पर अपने

5 सितम्बर – शिक्षक दिवस या शिक्षा बाजार दिवस ?

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय। गुरु को समर्पित इस दोहे से पूर्णरूप यह स्पष्ट होता है कि गुरु का स्थान ही सर्वोपरि होता है। भारत में आदिकाल से ही ‘गुरु शिष्य’ परम्परा चली आ रही है और निसंदेह गुरु का स्थान पूजनीय होता है। प्रत्येक वर्ष

नक़ल का व्यवसाय और धूमिल होता शिक्षा का महत्त्व

शिक्षा का महत्त्व और उद्देश्य छात्र, अभिभावक और अध्यापक के लिए जो होना चाहिए वह है एक शिक्षित समाज व सभ्य समाज का निर्माण। परंतु शिक्षा अपने मूल उद्देश्य से दूर जाती नजर आ रही है; आज की शिक्षा का एक मात्र उदेश्य सिर्फ एक अच्छी सी नौकरी पाना रह गया है जिसके लिए

Rising Educational Fee in India – Worry Moment for Middle Class Families

शिक्षा का अधिकार , शिक्षा मानव का अधिकार और शिक्षा का मौलिक अधिकार ये तीनों ही बातें हमारे शिक्षा अधिकार कि ओर इशारा करतीं हैं जो की अब कानूनी तरीके से भी लागू हो चुका है। खैर यह लेख शिक्षा अधिकार के ऊपर नहीं है बल्कि शिक्षा के बाज़ारीकरण की ओर इशारा करता है।