भ्रूण गतिविधि गणना – गर्भ में पल रहे बच्चे कि हलचल की गणना कैसे करें

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माँ बनना हर स्त्री के लिए आनंद का विषय होता है। कहा भी यही जाता है कि स्त्री तब तक पूर्ण नहीं होती जब तक की वो मातृत्व सुख की प्राप्ति न कर ले। यही कुदरत का नियम भी है जो सिर्फ मनुष्य पर ही नहीं वरन पृथ्वी के हर प्राणियों पर लागू होता है। गर्भधारण नारी जीवन का सुखद पहलू तो है ही किन्तु मातृत्व की यह शुरुआती अवस्था बेहद ध्यान देने योग्य होती है। जच्चा और बच्चा के बीच का यह मधुर संबंध कई चरणों में विभाजित होता है। भ्रूण बनने से लेकर उसके विकसित होने तक की अवधि में अनगिनत पड़ाव आते हैं जिसमें एक माँ अपने बच्चे के बेहद करीब जा पहुँचती है।

गर्भधारण के पड़ावों में एक ऐसा पड़ाव भी आता है जिसे “भ्रूण गतिविधि” के नाम से जाना जाता है। यूँ तो शुरूआती हफ़्तों में माँ को भ्रूण की गतिविधि का अहसास नहीं होता, किन्तु जैसे जैसे दिन और हफ्ते गुजरते हैं पेट में पल रहा भ्रूण विकसित होने लगता है। भ्रूण विकास का चक्र उसकी स्थिति में निरंतर बदलाव करता रहता है जिसमें स्पाइनल का बनना, ह्रदय का बनना, सिर का बनना फिर धीरे धीरे शरीर के अन्य हिस्सों का सृजन होना। यह कितना रोचक है कि, ये सारी क्रियायें एक स्त्री के अंदर ही होती हैं जिसका अहसास केवल वही जानती है।

भ्रूण विकसित होने के साथ साथ नाना प्रकार की हरकतें अर्थात गतिविधियां करता है जिसे अंग्रेजी और डॉक्टरी भाषा में Fetal Movement का नाम दिया जाता है। माँ के पेट में होने वाला फीटल मूवमेंट (Fetal Movement) का होना जरूरी भी है। फीटल मूवमेंट यह सन्देश देता है की बच्चा कितना स्वस्थ है। डॉक्टर पेट में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य की जाँच उसके द्वारा की जा रही गतिविधि के आंकलन पर भी करते हैं जिसे “भ्रूण गतिविधि गणना” अर्थात Fetal Movement Count कहा जाता है।

भ्रूण गतिविधि गणना Fetal Movement Count in Hindi:

बच्चा प्रत्येक दिन किसी निश्चित अवधि में कितनी बार हिलता-डुलता है, इसकी संख्या अर्थात गिनती को ही भ्रूण गतिविधि गणना कहते हैं। Pregnancy के कुछ हफ़्तों बाद जब Fetal Develop होता है तो माँ अपने पेट में हलचल महसूस करती है जिसकी वजह है भ्रूण में होने वाली गतिविधि जिसे साधारण भाषा में बच्चे का हिलना-डुलना कहते हैं। बच्चे का हिलना माँ प्रतिदिन आभास करती है किन्तु माँ यह भी ध्यान दे की बच्चा किसी निश्चित अवधि में कुल कितनी बार हिलता डुलता है, बेहतर ये है कि वो प्रतिदिन कहीं इसे लिख कर रख ले ताकि डॉक्टर के पूछने पर उसे सही जानकारी दे पाये।

गर्भ में बच्चे का हिलना कैसे जाने और गिनती करें Garbh-Me-Bachche-Ka-Hilna

भ्रूण का हिलना अर्थात पेट में उसके द्वारा होने वाली हलचल को कैसे रिकॉर्ड करें:

  • सबसे पहले यह ध्यान दें की बच्चा प्रतिदिन किस समय सबसे ज्यादा हलचल करता है
  • जिस निश्चित अवधि में वह ज्यादा हलचल करता है उस अवधि को अगले दिन के लिए चुन लें
  • भ्रूण गतिविधि की गणना पूर्व माँ कुछ खा ले या कुछ जूस इत्यादि पी ले, इससे बच्चा अधिक सक्रीय हो जाता है
  • अच्छा होगा आप गणना पूर्व थोड़ी देर टहल भी लें
  • भ्रूण की गतिविधि, हिलना डुलना, हलचल करना इत्यादि को कॉपी में नोट करें, लिखने से अगले दिन का अंतर समझ में आयेगा
  • गणना पूर्व पूर्व आप स्वयं को बायीं या दायीं ओर करके आरामदेह स्थिति में लायें
  • घडी देख लें और समय नोट करके, बच्चे द्वारा कुल की गयी हलचल को नोट कर लें
  • बच्चे की हलचल की प्रकार की है यह ध्यान दें जैसे – पैर मारना, शरीर को हिलाना, घूमना, धकेलना या फिर लुढ़कना
  • हर छोटी बड़ी गतिविधि पर ध्यान देते हुए उसे लिखें
  • अगर आप पेट में बच्चे की हलचल महसूस नहीं कर पाती तो परेशान न हों और अपने हाथ को पेट पर रखकर अनुभव करने का प्रयास करें
  • यह हो सकता है कि बच्चा किसी दिन ज्यादा हलचल करेगा तो किसी दिन कम हलचल करेगा, इसे सामान्य समझें
  • आपने किस प्रकार की हलचल को ज्यादा महसूस किया और वह हलचल कुल कितनी हुई (जैसे 1,2,3) ये लिखें
  • बच्चे द्वारा की गयी हलचल की अधिकतम गिनती 10 तक कर लें (बच्चा किसी दिन कम हलचल करे तो परेशान न हों)
  • कुछ विशेष तरह का खाद्य या पेय पदार्थ खाने पर बच्चा ज्यादा हलचल कर सकता है जैसे – ऑरेंज जूस, ऑरेंज आइसक्रीम, चॉक्लेट, कॉफी इत्यादि
  • अगर बच्चा कुछ विशेष खाने पीने से ज्यादा हलचल करता है तो आप भ्रूण गतिविधि गणना पूर्व उसे ग्रहण कर सकती हैं
  • ध्यान रहे दिन में बार बार गणना करने का प्रयास ना करें गर्भ में शिशु के भी आराम करने का वक़्त होता है

किस अवस्था में चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य है ?

  • गर्भ में पल रहा बच्चा कुछ दिन हलचल करना बिलकुल बंद कर दे
  • उसके द्वारा हलचल करने की कुल गिनती में लगातार गिरावट आती जाय
  • दिन के निश्चित अवधि जिसमें वह जरूर हलचल करता था उस दौरान भी कोई हलचल महसूस न हो
  • वो विशेष खाद्य पदार्थ जिसे खाने पीने से वह जरूर हिलता डुलता था, उसके खाने पर भी बच्चे का न हिलना
  • या फिर कोई अन्य सवाल जो आपके मन में हो
  • या आपकी तबियत में अचानक कोई बदलाव आया हो

दी गयी जानकारियां आपके लिए उपयोगी हैं, खासकर वे महिलाएं जो पहली बार माँ का अनुभव प्राप्त कर रही हैं उनको ऊपर लिखी बातों का जानना आवश्यक है। यह लेख केवल आपको जागरूक करने एवं ज्ञान देने के आशय से लिखा गया है। लेखिका डॉक्टर नहीं है, अतः गर्भधारण एवं भ्रूण के विकास संबंधित हर प्रकार की जानकारी हेतु अपनी डॉक्टर से जरूर मिलें। किसी भी प्रकार का खाद्य सेवन अथवा दवाओं का सेवन बिना डॉक्टरी परामर्श के ना लें।

लेखिका:
रचना शर्मा

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