प्रसव पीड़ा संकेत – गर्भवती महिला प्रसव संकेत व लक्षण

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पखेरू पर आज का विषय महिलाओं से जुड़ा है। हर स्त्री के लिए माँ बनना एक प्राकृतिक उपहार है जो की नारी के अस्तित्व को पूर्ण करता है। आज हम प्रसव के संकेतों के बारे में जानेंगे, स्वयं एक नारी और माँ होने के नाते मुझे लगता है की हर गर्भवती महिला को प्रसव संकेतों के बारे में पूर्ण ज्ञान होना चाहिए।

Prasav-Sanket गर्भवती महिला प्रसव संकेत व लक्षण

चलिए जानते हैं Signs of Labor in Hindi में, मेरा यह लेख प्रसव पीड़ा और उससे जुड़े संकेतों पर है जिसकी मदद से आप समय रहते यह जान सकेंगी की कब आपको चिकित्सक से संपर्क करना है तथा कब प्रसव हेतु अस्पताल जाना है। वैसे तो आप गर्भधारण की शुरुआत से ही अपनी डॉक्टर के संपर्क में रहें तो उचित होगा।

ध्यान दें, यदि आपको 36 सप्ताह अथवा 9 माह की गर्भावस्था (pregnancy) के पहले प्रसव के संकेत मिलते हैं तो आप तुरंत अपनी Lady Doctor से संपर्क करें। प्रसव के संकेत झिल्लियों के फटने या फिर उनके सिकुड़ने के कारण उत्पन्न होते हैं। जिनके बारे में हम आज अच्छे से जानेंगे।

सिकुड़न (कॉन्ट्रैक्शन्स):

जब गर्भाशय की मांसपेशियां प्रसव हेतु तैयार होती हैं तब ही उनमें सिकुड़न उत्पन्न होती है। प्रसव की अवस्था में गर्भाशय की मांपेशी संकुचित होती हैं तथा फिर सामान्य अवस्था में आती हैं।



भ्रामक प्रसव सिकुड़न (संकुचन):

  • – यह भ्रामक प्रसव प्रायः प्रसव के अंतिम माह में ही होते हैं।
  • – ये अनियमित रूप से होते हैं
  • – यह जल्दी जल्दी नहीं होते, करीब 1 घंटे की अवधि के आस-पास आकर ख़तम हो जाते हैं
  • – ये अक्सर पीठ के भाग में महसूस नहीं किये जाते
  • – ये चलने फिरने पर बंद हो जाते हैं
  • – ये अधिक पीड़ा दायक भी नहीं होते
  • – इससे गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में परिवर्तन नहीं होता

वास्तविक प्रसव संकुचन:

  • – ये नियमित अंतराल से होते हैं तथा 30 से 60 सेकंड तक बने रहते हैं
  • – समय व्यतीत होने के साथ ये जल्दी-जल्दी होते हैं और अधिक पीड़ादायी भी होते हैं
  • – इसे पेट तथा पीठ के नीचले भाग में महसूस किया जा सकता है
  • – ये चलने फिरने पर भी जारी रहते हैं और कभी-कभी ये अधिक बढ़ भी जाते हैं
  • – इससे गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) के मुलायम तथा पतले होने और प्रसव होने हेतु खुलने में मदद मिलती है

अगर आपका प्रसव काल शुरू हो गया है तो क्या करें ?

  • – ऐसी स्थिति में बायीं ओर करवट लेकर आराम करें
  • – भोजन गरिष्ट न करें, हल्का खाएं और पानी व अन्य सेहत युक्त पेय पदार्थ का सेवन करें
  • – गर्भाशय के सिकुड़न अथवा संकुचन पर ध्यान रखें और घड़ी को देखते हुए उनके समय अंतराल को जाने।

अपनी महिला डॉक्टर, नजदीकी क्लिनिक या फिर अस्पताल से संपर्क करें जब संकुचन स्थिति –

  • – पहले प्रसव में 2 घंटे तक क्रमशः 5 – 5 मिनट के अंतराल से हो
  • – दूसरे या अन्य प्रसव में 1 घंटे तक क्रमशः 5 – 5 मिनट के अंतराल से हो
  • – या फिर अपनी महिला डॉक्टर या अन्य चिकित्सक द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें





झिल्ली का फटना:

बच्चा जिस झिल्ली (गर्भाशय) में रहता है वह पूर्णतः तरल पदार्थ से भरा होता है। जब यह झिल्ली फटती है तो इस क्रिया को ‘वाटर ब्रेक’ कहा जाता है। प्रसव का समय बेहद नजदीक आने और संकुचन तेज़ होने पर झिल्ली में व्याप्त पानी धीरे-धीरे बाहर आने लगता है। ऐसी भी स्थिति उत्पन्न हो सकती है की पानी तेज़ी से बाहर आने लगे। गर्भाशय में उपस्थित पानी पारदर्शी होता है पर यह सफ़ेद अथवा हलके हरे रंग का भी हो सकता है।

जब आपको ज्ञात हो जाय की गर्भाशय की झिल्ली फट गयी है और पानी का रिसाव हल्का या तेज़ हो रहा है तो –

  • – इस अवस्था में घबराएं नहीं, खुद को सामान्य बनाये रखें
  • – तुरंत अपनी डॉक्टर से संपर्क करें व उनके दिए निर्देशों का पालन करें
  • – इस अवस्था में तत्काल नजदीकी क्लिनिक या अस्पताल जाएं, जहां आपकी डॉक्टर उपस्थित हो
  • – इस अवस्था में स्नान ना करें

ध्यान दें,

यह लेख केवल आपकी जानकारी हेतु लिखा गया है। लेखिका चिकित्सक नहीं हैं और ना ही वे किसी चिकित्सा पद्धति से आती हैं। इस लेख का मकसद केवल आपको सजग करना है। गर्भधारण की स्थिति में महिला को हमेशा अपनी चिकित्सक से सलाह लेते रहना चाहिए और उनके दिए निर्देशों का अनुसरण करना चाहिए। लेख में दिए गए सभी बिंदुओं को आप अपनी लेडी डॉक्टर से जरूर समझ लें।

लेखिका:
रचना शर्मा

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