हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

तुम महफ़िल में कुछ कहते नहीं – हिंदी कविता

तुम महफ़िल में कुछ कहते नहीं और सुनते भी नहीं पर ऐसा नहीं है कि हमारे इशारों को समझते भी नहीं ये काले-काले मटमैले बादल उमड़ते हैं, बरसते नहीं जरा इनकी बेशर्मी तो देखो, अब तो ये गरजते भी नहीं बच्चों के हाथों में आ गईं जब से बाप की आस्तीन ये बच्चे इज़्ज़त

अनाम भीड़ के खतरे – हिंदी कविता

ये भीड़ कहाँ से आती है ये भीड़ कहाँ को जाती है जिसका कोई नाम नहीं है जिसकी कोई शक्ल नहीं है जिसको छूट मिली हुई है समाज, कानून के नियमों से जिसकी शिराओं में खून की जगह द्वेष की अग्नि बहती है। जिसके मस्तिष्क में भवानों के बजाय क्रोध भड़कती रहती है जिनकी

व्यथा- एक हिंदी कविता

यह कविता महज एक कविता नहीं बल्कि एक ऐसी महिला का दर्द है जो अभी भी मेरे आस पास के इलाके में रह रही है। कविताएं व कहानियां हमारे समाज का ही हिस्सा होती हैं जहाँ दर्द है, ख़ुशी है, ईर्ष्या है, नफरत है तो प्रेम भी है…! मेरी कविता का शीर्षक है –

उमड़ घुमड़ कर आते बादल, छम-छम कर बरसते बादल – हिंदी कविता

मानव जीवन पर प्रकृति का बहुत गहरा प्रभाव रहा है। अलग अलग ऋतुएं हमें आनंदित करने के साथ साथ हमारे जीवन पर अपना सकारात्मक प्रभाव भी छोड़तीं हैं। धरा पर बदलती ऋतुओं की व्याख्या कवियों नें कविताओं के माध्यम की है जो यह दर्शाती है की प्रकृति सच में हमारे जीवन के लिए बहुमूल्य

प्रेरणादायी हिंदी कविता – एक नया आकाश बनाओ

यूँ तो ‘प्रेरणा’ केवल एक शब्द मात्र है, परन्तु जब इसे किस्से कहानियों व कविताओं में पिरोया जाता है तो वह हमारे जीवन ऊर्जान्वित कर देता है अर्थात वह एक प्रेरणादायी प्रसंग बन जाता है। मनुष्य जीवन एक युद्ध और संग्राम की भांति है जहाँ हम किसी भी कीमत पर पराजित होना नहीं चाहते

हिंदी कविता – “आँखें”

हिंदी कविता “आँखें” सिर से पाँव तक की गहराई, जान लेती उनकी आँखें दुनिया में बेमिसाल सी हैं, उनकी आँखें ! क्यों मिलापाता नहीं, ‘मैं’ उनसे अपनी आँखें खूबसूरती को भी और खूबसूरत बना देती हैं, उनकी आँखें कैसे मेरे हर विचार को भांप लेती हैं, उनकी आँखें शायद रातों को जागकर,बनाई होगी, उन्होनें

हिंदी कविता – “नशीली आँखें”

हिंदी कविता – नशीली आँखें दिल रूक जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही जमीन पाँव से निकल जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही ! मेरे होश उड़ जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही निगाहें घूम जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही ! आगे दिखाई कुछ न दे, उनकी नशीली आँखें देखते ही क्यों शरमा

हिंदी कविता “सफर” – जिन्दगी की कश्ती में सफर करता मैं न थका

हिंदी कविता “सफर” जिन्दगी की कश्ती में सफर करता मैं न थका मगरमच्छ ने नोचना तो चहा, मैं न रूका !! समुद्र की गहराई नाप ली दूर से खड़कर, किनारा मैं ना पा सका, भंवर आते जाते गए, मैं न फंसा ! जाल हमने भी डाला मछलीयों को, एक न एक दिन फंस जाएंगी,

पता – हिंदी कविता

बस थोड़ा ‘स, मोड़ आगे, उसकी गली, मेरी जिन्दगी में अहम, क्यों उसकी गली। मेरी सोच का हिस्सा बड़ा, उसकी गली, जुड़ी जिन्दगी की कहानी, उसकी गली। मेरे दुःखों में सकूँन लाए, उसकी गली, क्यों मन चाहे, रोज जाऊ, उसकी गली। बस थोड़ा ‘स, मोड़ आगे, उसकी गली, मेरी जिन्दगी में अहम, क्यों उसकी

चले जाएंगे – हिंदी कविता

अखिर वादे करके चले जाएंगे अब नहीं लौट के आएँगे। चले जाएंगे… छोटी सी तकरार कर चले जाएंगे मेरे ऊपर ‘बईमान’ का दाग लगा। चले जाएंगे… सांस के साथ सांस लेने वाले चले जाएंगे ‘संदीप’ रोग हिज्र का लगा। चले जाएंगे… छोड़ सात समुद्र से पार चले जाएंगे मेरे ‘पर’ काट, जख्मी कर। चले