हाय ये महंगाई – हिंदी कविता

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जहां एक ओर इंसान शारीरिक रूप से कमजोर होता जा रहा है तो उसके उलट महंगाई और अधिक मजबूत होती जा रही है। इंसान की उम्र भले लंबी हो न होने परंतु महंगाई विगत कई वर्षों से लंबी होती जा रही है। पखेरू पर आज की कविता का शीर्षक “हाय ये महंगाई” इसी दशा को दर्शाती है जिसे बेहद सुन्दर तरीके से रचा है रीना कुमारी जी ने जो रांची झारखंड से हैं।



Haye Ye Mehangai हाय ये महंगाई - Hindi Kavita

बोल बड़ा जो महंगाई का
रुपए का मोल बताऊं क्या
सौ का नोट लगे दस के बराबर
दस का मोल बताएं क्या

आटा दाल के संग में चावल
आलू प्याज बोले शलगम
तुझको लेने जो आना भैया
कर लेना पहले जेब गर्म

जेब भर के गए बाजार पर
झोला भर सामान मिला नहीं
बीस तारीख को राशन घट गया
पूरा महीना भी चला नहीं

इंधन का भी दाम बढ़ा है
सिलेंडर की है लंबी कतार
स्कूल कॉलेज का फीस बढ़ा है
कैसे चलेगा घर संसार

बढ़ रहा गाय के दूध का दाम
बच्चों को भला पिलाएं क्या
बोल बड़ा जो महंगाई का
मोल रुपए का बताऊं क्या

लेखिका:
रीना कुमारी
तुपुदाना. रांची झारखंड

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