प्रदुषण – हिंदी कविता

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मैं धर्मानुयायी, मेरा धर्म और
मैं ही मेरे धर्म का रखवाला
यहाँ पर हज और वहाँपर कुंभ…का मेला,
मज्जिद, मंदिर और गिरीजाघरों…में
अल्हाह, भगवान और ईसा-मसिह…का लाला ।।

हिंदु, मुस्लिम, शिख, और ईसाई..
इन मस्त-मौलाओं की अपनी ही ईद-दिवाली ।।
गणपती-अंबे के नाम टेपरेकार्डर
ईद-मोहरम-क्रिसमस पर लाऊड़स्पिकर और
शिवाजी-बाबा साहब के लिए बासरी वादन की
लम्बी तान सुँनाई ।।

मरिज़ के दिल में दौरा
परीक्षार्थी के गले में फाँसी और
पत्थरतोड मेहनत करने वालों की
नींद हराम हुँई ।।

लेखक:
भास्कर सुरेश खैरनार

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