भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका

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गतिशीलता ही जीवन है। संपूर्ण विश्व एवं भारतीय इतिहास ‘विचरण करते रहो‘ का सूत्रपात करते रहे हैं। ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय‘ अर्थात सबके हित और कल्याण के लिए विचरण करते रहो। गीता में भी श्रेष्ठ व्यक्ति के लिए ‘अनिकेत: स्थिरमत:’ अर्थात स्थिर बुद्धि परंतु विचरणकर्ता कहा गया है।

संपूर्ण संसार में दो प्रकार की अर्थव्यवस्थाएँ विद्यमान है। पूंजीवादी एवं समाजवादी, भारतवर्ष के संदर्भ में मिश्रित अर्थव्यवस्था को अंगीकार किया गया।जिसके 3 क्षेत्र हैं पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर, पब्लिक कम प्राइवेट सेक्टर। देश की सटीक आर्थिक उन्नति के लिए कृषि, उद्योग, यातायात, शिक्षा और पर्यटन की उन्नति होना अनिवार्य है।

विश्व पर्यटन के दृष्टिकोण से भारत एक निरापद सुरक्षित सरल राष्ट्र तो है ही, साथ ही साथ भारतवर्ष की संस्कृति का पिछले 5000 वर्षों का प्रमाणिक इतिहास भी , इसे श्रेष्ठ पर्यटन स्थल की श्रेणी में ला खड़ा करता है। आधुनिक विश्व के तेजी से बदलते परिवेश में ग्लोबलाइजेशन आज के दौर की नियति बन गया है और पर्यटन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका

भारत की सभ्यता एवं संस्कृति का स्थान विश्व के सांस्कृतिक इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण है। पर्यटकों को आकर्षित करने की अनेक संभावनाएं विद्यमान हैं ही; बद्रीनाथ केदारनाथ हरिद्वार वाराणसी काशी इत्यादि ऐतिहासिक नगर भी हैं। क़ुतुब की लाट, आगरा का ताज, दिल्ली का किला, खजुराहो की वास्तुकला, अशोक स्तंभ, फतेहपुर का बुलंद, कश्मीर की घाटी और गंगा तट की माटी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इन समस्त उपलब्धियों की ओर आकर्षित होकर प्रतिवर्ष अगणित पर्यटक भारत आते हैं। इसी परिपेक्ष्य में भारत सरकार ने पर्यटन नामक एक स्वतंत्र मंत्रालय स्थापित कर रखा है। पर्यटन द्वारा प्राप्त होने वाली विदेशी मुद्रा में वृद्धि के लिए सरकार द्वारा हर संभव और बेहतर प्रयास किए जाते हैं। जैसे कि वर्ष 1991 को विजिट इंडिया ईयर के रुप में मनाया गया।

आइए अब हम बात करें कि पर्यटन हमारी अर्थव्यवस्था के संदर्भ में क्या कितनी और कैसी भूमिका निर्वहन करता है। सरल शब्दों में यह तो सर्वविदित है कि अधिकांश देशों की मुद्रा का मूल्य विशेषकर यूरोपीय मुद्रा भारत के रुपए की तुलना में कहीं अधिक है। निश्चित ही पर्यटकों का आगमन हमारी अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी है। यह लाभ विभिन्न माध्यमों से प्राप्त होता है तथा छोटे बड़े होटल एवं आवास गृह, रेस्टोरेंट, भोजनालय, ढाबे इत्यादि का व्यवसाय ,यातायात के अंतर्देशीय अंतर्राष्ट्रीय साधनों का प्रयोग, विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों की बिक्री, ऐतिहासिक स्मारकों में प्रवेश हेतु शुल्क तथा मार्गदर्शकों की आवश्यकता इत्यादि। इन समस्त छोटे-बड़े संसाधनों से भारत सरकार को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। पर्यटन द्वारा प्राप्त विदेशी मुद्रा का आयोजन अनुमानत: प्रतिवर्ष 4000 करोड़ के आसपास ठहरता है।

सबसे बड़ी समस्या हमारा सर्वग्रासी भ्रष्टाचार और नैतिक मूल्यों की कमी। भारतवासी विदेशियों का आर्थिक शोषण करते हैं, महिला पर्यटकों से छेड़छाड़ दुर्व्यवहार आदि हमारे इस महत्वाकांक्षी आर्थिक उद्योग के कुछ निकृष्ट पहलू हैं।

सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है, पर्यटक हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान करने के साथ ही हमारी संस्कृति के संवाहक भी हैं। हम सचेत हों आचार-व्यवहार में उत्तम हों ताकी पर्यटन हमारे देश में फलता-फूलता रहे।

लेखिका:
वैदेही शर्मा

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