दीपावली से जुड़ी हुई रोचक परम्पराएँ

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सर्वप्रथम आप सभी को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएँ। मैं कामना करती हूँ कि आप का यह त्यौहार शुभ हो।
दीपावली रोशनी का उत्सव है। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि कैसे हर अंधकारमय कोने को हम सकारात्मक रोशनी से रौशन कर सकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी जानना चाहा है कि Deepawali को अलग-अलग क्षेत्रों में किस तरीके से मनाया जाता है ? कौन सी परंपराएँ या कहानियाँ और हो सकती हैं जो कि दीपावली से प्रत्यक्ष रूप से रिश्ता रखती हैं।



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तो चलिए आज बात करते हैं कि दीपावली को अलग-अलग क्षेत्रों में किस तरीके से स्वागत किया जाता है। मुझे उम्मीद है कि मेरे इस लेख को पढ़ने के बाद आपको यह ताज्जुब ज़रूर होगा कि इस दुनिया में विविधताओं की कोई कमी नहीं फिर वह दीपावली ही क्यों ना हो।

बंगाल

पश्चिम बंगाल में दीपावली को बिल्कुल ही अलग अंदाज़ में मनाया जाता है बंगाल में ऐसी मान्यता है कि दीपावली के दिन माँ काली स्वयं पृथ्वी पर पधारती हैं। इसलिए दीपावली के 2 दिन पहले से इस उत्सव को बेहद भव्य रूप में मनाया जाता है। सब लोग एक दूसरे से मिलते हैं सब को बधाइयाँ देते हैं वहाँ के पारंपरिक संगीत पर नाचते हैं और माँ काली का स्वागत करते हैं।

उड़ीसा

उड़ीसा में दीपावली का एक अलग स्वरूप देखने को मिलता है। इस क्षेत्र में लोग जूट की लकड़ियों को जलाकर अपने पूर्वजों को याद करते हैं। दीपावली की रात माना जाता है कि कोरिया काठी की रस्म के दौरान उनके पूर्वज उनसे मिलने आते हैं। इस क्षेत्र में हर साल इस परंपरा को दोहराया जाता है और इस रस्म के पूरे हो जाने के बाद सभी एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं देते हैं।




मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में ऐसा माना जाता है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी और विष्णु जी का विवाह संपन्न हुआ था। यही वजह है कि मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में दीपावली को लक्ष्मी और विष्णु के विवाह उत्सव के तौर पर भी मनाया जाता है। यहाँ पर लक्ष्मी जी और विष्णु जी के विवाह कि रस्में संपन्न हो जाने के बाद लोग आपस में मिलते हैं मिठाइयाँ खाते हैं और शुभ दीपावली कहते हुए सभी को ख़ुशियाँ बाँटते हैं।

पंजाब

पंजाब में दीपावली से जुड़ी हुई कहानी एकदम जुदा है। यहाँ पर दीपावली को गुरु हर गोबिंद सिंह जी की विजय का प्रतीक माना जाता है बताया जाता है कि प्राचीन समय में इस दिन गुरु हर गोबिंद सिंह जी ने इस्लामी शत्रुओं को हराकर सभी की रक्षा की थी। यही कारण है कि दीपावली पंजाबियों के ह्रदय में एक अलग स्थान रखती है।

तो यह थी Diwali से जुड़ी कुछ ऐसी परंपराएँ जिनके बारे में शायद आप ना जानते हो, लेकिन मेरे इस लेख को समाप्त करने से पहले मैं आपसे आग्रह करना चाहूँगी कि दीपावली भव्य और उजागर बनाने के साथ-साथ स्वच्छ और स्वस्थ भी बनाए रखें। हमारे पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारी ही ज़िम्मेदारी है। तो प्रयास करें कि इस बार पर्यावरण की सुरक्षा का ज़िम्मा आप अपने कंधों पर ले आप पटाखों से थोड़ी दूरी बनायें ताकि हमारी पृथ्वी को वायु प्रदूषण से बचाया जा सके।

शुभ दीपावली !

लेखिका:
वैदेही शर्मा

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