बवाना (दिल्ली) जीत कर भी हार गये केजरीवाल

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जिनको नहीं पता उनके लिए कहानी को थोड़ा सा दोहरा देते हैं फिर ऊपर लिखे मुख्य शीर्षक हां भाइयों बहनों हेडिंग पर बात होगी। देश की सारी पार्टियों में ना जाने क्यों भाजपा में शामिल होने की होड़ लगी है। लगभग हर हफ्ते कोई न कोई अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहा है। इसका असर दिल्ली में भी हुआ और इतना हुआ की पार्टी नहीं विधानसभा की सीट ही छोड़ दी गयी। बवाना विधानसभा से विधायक वेदप्रकाश ने भाजपा को अपना समर्थन दिया और आप पार्टी को छोड़कर शामिल हो गये भाजपा में; उनके भाजपा में शामिल होने के कारण उनको अपनी विधानसभा से हाथ धोना पड़ा। ये एक कानून है कि जिस पार्टी के टिकट पर आप जीते हों और फिर भविष्य में आप वो पार्टी छोड़ रहे हैं तो आपको अपनी जीती हुई सीट भी छोडनी पड़ेगी । वेदप्रकाश नें भी सीट छोड़ी और फिर उप-चुनाव जो 23 अगस्त 2017 को हुआ उसके लिए पर्चा भरा भाजपा के टिकट पर। आम आदमी पार्टी यानी आप ने अपने नयें उम्मीदवार रामचन्द्र को मैदान में उतरा और कांग्रेस की बात अब छोड़ो न यार…! वेद प्रकश को लगा था कि निगम चुनाव भाजपा जीती तो ये सीट आराम से निकल जाएगी और फिर भाजपा बड़ी पार्टी है तो नाम बड़ा होगा। 28 को जब परिणाम आया चुनाव का तो विधानसभा तो वही थी, मतदाता भी वही थे लेकिन विधायक जी बदल गये दोस्तों। परिणाम में जीत फिर से आप पार्टी की हुई, नये विधायक बने रामचन्द्र और हीरो बन गये केजरीवाल सर; सर इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि ये मेरे धर्म से आते हैं .. सोचिए मत !! मेरा अर्थ हिन्दू मुस्लिम सिख का नहीं है। वो क्या है कि केजरीवाल जी इंजीनियर हैं और मैं भी तो उस लिहाज से हम दोनों का कर्म-धर्म इंजीनियरिंग ही हैं। खैर यह तो थोड़ा मजाक हुआ…. ! हां तो जीत के बाद सर बवाना पहुचे धूम-धाम से यात्रा निकली खूब बातें की लेकिन अन्दर की बात नही बताई। EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) जो पुरे भारत में सिर्फ भाजपा की सरकार बनवा रही थी, जिसमे गड़बड़ी के दावे किये जा रहे थे। दिल्ली निगम चुनाव में हुई भाजपा की जीत जिसको लेकर केजरीवाल सर जी ने EVM को दोषी ठहराया और वे उसी कारण नगर-निगम चुनाव हार गये ऐसा उन्होनें कहा था। मायावती और अखिलेश उत्तर प्रदेश हार गये और तो और पंजाब हार का ठीकरा भी EVM में गड़बड़ी है कह कर फोड़ दिया।

केजरीवाल सर, जनता जवाब चाहती है की आपने किससे EVM की गड़बड़ी सही करवाई? अपनी पार्टी के सौरभ से या उत्तर प्रदेश की बहन जी से। अखिलेश यादव को तो नहीं बुलाया था ना ? आप बवाना जीत गये मुबारक हो लेकिन जनाब आप ने एक लोकतांत्रिक देश में अपनी आवाज़ सिर्फ इस खातिर उठाई कि लोकतंत्र में चुनाव जो शक्ति है इस देश की जिसने आपको मुख्यमंत्री और एक चाय वाले को प्रधानमंत्री बनाया; उस चुनाव का परिणाम आपके पक्ष मे नहीं आया तो आप नें ना जाने कितने देश के उदहारण दिये जिसपर चुनाव आयोग कह रहा था की भारत की चुनाव मशीन सुरक्षित है क्योंकि ये इंटरनेट से नहीं जुड़ी है इसलिए इसे हैक करना या इसके साथ छेड़खानी करना मुश्किल है। आवाज उठाना आपका हक है पर देश की एक इज्ज़त है केजरीवाल सर जी कृपया कम से कम देश का तो ख्याल कीजिये। बवाना जीत गये तो सब सही, निगम चुनाव हारे थे तो कलेजा फट गया था और आज जो चुनाव आप जीते वो भी EVM से हुआ लेकिन जीत गये तो सही वरना फिर ई वी एम खराबी का राग अलापते आप। जो चुनाव आप हारे उसमें जीत की तैयारी खूब की होगी, आपने सबके घर जा के कहा होगा वोट देना परिणाम के बाद उस मोहल्ले मे एक आदमी भेजते तो पता चल जाता कि वोट किसको गया। जरुरत क्या है जी, हम हार नहीं सकते कभी भी … जरुरत है क्योंकि उस वक़्त आप चुनाव हारे थे आज विश्वास हारे हो।

 

 


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