बीजेपी का चुनावी खेल

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बीजेपी की राजनीति क्रिकेट खेल की तरह हो गयी है। जिस सपने या वादे के साथ ये आये थे, पहले इन्होंने विपक्ष को ऐसे कोसा जैसे हम मैच देखते हुए कहते हैं क्या घटिया खेल रहे है ये; हम होते तो छक्के मारते। सामने वाली टीम को बुरी तरह हराते, इनको बल्लेबाजी नहीं आती, बोलिंग नहीं आती। फील्डिंग नहीं करते और इनके वादों में आग में घी का काम किया UPA सरकार के भरष्टाचारो नें।

कुल मिला कर बीजेपी 50 ओवर में 500 रन का संकल्प ले कर 2014 में आयी। परंतु 35 ओवर बीत जाने के बाद स्कोर बोर्ड 150-160 ही हुआ है और पिछले दो महीने से तो इनको कई खतरनाक यॉर्कर और बाउंसर मिली है। जैसे गोरखपुर में असमय बच्चों का दुनियां छोड़ जाना। एक के बाद एक रेलवे हादसे, बाबा राम रहीम का बीजेपी राज में पकडे जाना। और उसके बाद हुए उपद्रव को रोकने में सरकार की नाकामयाबी, बवाना उपचुनाव में मिली हार, उसके बाद डूसू चुनाव में ABVP की हार, और मोदी जी के सामने नौसिखिया माने जाने वाले राहुल गांधी का अमेरिका में सफल दौरा ।

फ़िलहाल चारों तरफ से बीजेपी को नकारात्मक खबरें ही आ रही हैं और ये कोई बड़ी बात भी नहीं है। ये अक्सर होता है, परंतु समस्या यहाँ है कि जिस वोटर नें 2014 में उम्मीद के साथ आपको देश का राजा बनाया था वो वर्ग निराश है। और उनकी निराशा आगे चलकर कर घातक सिद्ध हो सकती है। फ़िलहाल आप अपनी स्वर्णिम काल का आंनद लें या फिर कुछ बड़ा कर के देश को लौटाएं । दिशा आपको तय करनी है और आपके वादे बातो से ज्यादा ज़मीन पर दिखें।

 

 


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