बरगद का पेड़ एक – फायदे अनेक

बरगद का पेड़

प्रकृति का प्रत्येक घटक मानव जीवन के लिए वरदान है। मनुष्य अपने जीवन यापन के लिए संपूर्ण रूप से प्रकृति पर निर्भर है। प्रकृति में व्याप्त हरित सम्पदा हरे पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। हम सभी जानते हैं कि यह वातावरण को शुद्ध करने का कार्य करते हैं तथापि पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया जीवित रहने के लिए हमारी प्राणवायु ऑक्सीजेन गैस प्रदान करते है।

हम सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ अनाज, सब्जी, फल इत्यादि के लिए पूरी तरह से पेड़ पौधों पर ही निर्भर हैं। प्रकृति जनित हरित सम्पदा हमारे लिए हमारे भरण पोषण का मुख्य स्रोत है। अनेकों प्रकार के वृक्ष एवं पौधे पाए जाते हैं सभी के अपने-अपने गुण होते हैं, अधिकांशतः पेड़ पौधे औषधीय गुणों से भरपुर हैं जो की अनेक प्रकार के रोगों में लाभदायक होते हैं। पेड़ पौधे हमारे सच्चे मित्र होते हैं जो सदैव हमारे लिए हितकारी ही होते हैं आइये आज हम ऐसे ही अपने एक मित्र के बारे में जानते हैं।

बरगद का पेड़:

बरगद भारत का राष्ट्रिय वृक्ष है। इसका वैज्ञानिक नाम फाइकस बेंगालिलिस है अंग्रेजी में इसे banyan tree कहते हैं। हिंदी भाषा में इसे बरगद या वट वृक्ष भी कहते हैं। भारत में बरगद के पेड़ को कौन नहीं जानता, हिन्दू धर्म में यह पूजनीय है; वट वृक्ष को आशीर्वाद दायक वृक्ष माना जाता है। अपनी विशालकाय छायादार आकार इसकी विशेषता है यह अनेक वर्षों तक किसी भी प्रकार के मौसम व जलवायु में स्वयं को जीवित रख सकता है। इसकी पत्तियां गोल व अंडाकार होती हैं इसके फल छोटे-छोटे गोल आकार वाले लाल रंग के होते हैं। इसके तने से दूधिया स्राव स्रावित होता है जिसे लैटेक्स कहा जाता है। बरगद की शाखाओं से जटायें निकलती हैं जो बढ़कर जमीन में स्तम्भ रूप में स्थापित हो जाती हैं। बरगद की जड़ें व जता मिट्टी में काफी गहराई तक जाती हैं वह मिट्टी को बांधकर मृदा का संरक्षण करती हैं। बरगद का पेड़ एक छोटा जंगल माना जाता है क्योंकि इस पर अनेक प्रकार के छोटे जीव व पक्षी निवास करते हैं, उन्हें रहने के लिए माकूल स्थान मिल पाता है। बरगद के पेड़ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है उसके औषधीय गुण जो कि अनेक प्रकार रोग व समस्याओं में बहुत लाभकारी होते हैं।

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  1. बरगद के वृक्ष के पत्तों की 20 से 25 ग्राम भस्म को अलसी के तेल में मिलाकर बालों में लगाने से या इसके कोमल पत्तों को सरसों के तेल में पकाकर कर तेल को लगाने से बालों की समस्या दूर होती है।
  2. बरगद के 10 मिली लीटर दूध या लैटेक्स में 125ml कपूर और एक चम्मच शहद मिलाएं, इसे आंखों में अंजन (काजल) के रूप में प्रयोग करने से आंखे स्वस्थ रहती हैं।
  3. 3 ग्राम बरगद की जड़ की छाल का चूर्ण लस्सी के साथ लेने से नकसीर में लाभ मिलता है।
  4. कान में यदि फुंसी हो जाये तो वट वृक्ष के दूध की कुछ बूंदों को सरसों तेल में मिलाकर लगाने से फुंसी नष्ट हो जाती है।
  5. 5.10 ग्राम वट की छाल, 5 ग्राम कत्था, 2 ग्राम कालीमिर्च पीसकर, महीन चूर्ण बनाकर मंजन के रूप में उपयोग करने से दांतों का हिलना, दुर्गन्ध, व दांतो की गंदगी दूर हो जाती है। दांत स्वच्छ व सफेद हो जाते हैं, दांत के दर्द में बरगद के दूध की कुछ बूंदे लगाने से लाभ मिलता है। वट की जड़ों का उपयोग दातुन के रूप में किया जाता है जिससे दांत मजबूत व साफ रहते हैं।
  6. बरगद के कोमल लाल रंग के पत्तों को छाया में सुखाकर कूट कर 1 या 1.5 चम्मच चूर्ण को आधा लीटर पानी में पकाने पर जब यह एक चौथाई बचे तब उसमें शहद या चीनी मिलाकर काढ़े के रूप में सुबह-शाम ग्रहण करने से खाँसी जुकाम में राहत मिलती है; साथ ही मष्तिष्क की कमजोरी भी दूर होती है।
  7. खूनी दस्त या पेचिश की समस्या में 20 ग्राम कोंपलों को पीसकर रात भर पानी में भिगोकर सुबह छान लें। छने हुए पानी में 100 ग्राम घी मिलाकर पकायें जब केवल घी रह जाये तब उतार लें। 5 से 10 ग्राम घी में 2 चम्मच चीनी या शहद मिलाकर ग्रहण करें, इससे पेचिश में तुरन्त लाभ मिलता है। सामान्य दस्त में बरगद के दूध को नाभि में भरने से व आस-पास लगाने से दस्त रुक जाता है एवं छाया में सुखाये वृक्ष की छाल के 3 ग्राम चूर्ण को पानी के साथ लेने से दस्त में तुरन्त लाभ मिलता है।
  8. बरगद की 25 ग्राम कोमल पत्तों को 200ml पानी में घोलकर पिलाने से 2 से 3 दिन में खून आना बंद हो जाता है। वट के पीले पत्तों की भस्म को सरसों तेल में मिलाकर लेप बनायें, बवासीर में मस्सों पर लेप लगाते रहने से लाभ मिलता है। बरगद की सूखी शाखा को जलाकर कोयला बना कर उसका चूर्ण तैयार कर सुबह शाम ताजे पानी के साथ लेने से बहुत लाभ मिलता है।
  9. मधुमेह में 20 ग्राम बरगद के फल का चूर्ण आधा लीटर पानी मे पकायें। जब इसका आठवां भाग बचे, ठंडा करके सेवन करें। लगातार सेवन से मधुमेह नियंत्रित हो जाता है। बरगद के कोपलों का काढ़ा बनाकर सेवन करने से भी मधुमेह में लाभ मिलता है।
  10. बरगद के फलों को बारीक पीसकर 1 से 2 ग्राम चूर्ण को गाय के घी के साथ सुबह के समय लगातार सेवन करने से बार-बार मूत्र आने की समस्या दूर हो जाती है।
  11. अधिकांश महिलाओं में मासिक धर्म विकार पायें जाते हैं, वे असामान्य होते तथा दर्द व ऐठन की समस्या का सामना करना पड़ता है। 10 ग्राम बरगद की जटा के अंकुर को 100ml गाय के दूध में पीसकर छानकर लेने से मासिक धर्म विकार या रक्त प्रदर में लाभ मिलता है।
  12. छाया में सुखाये गए वट वृक्ष की छाल के महीन चूर्ण में दोगुनी मात्रा में मिश्री मिलाकर गाय के दूध के साथ लेने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
  13. घाव के इलाज में वट वृक्ष फायदेमन्द होता है, बरगद का दूध लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है। ऐसा घाव जिसमे टांको की आवश्यकता ना हो घाव के मुँह को थोड़ा दबाकर बरगद के बड़े आकार के पत्ते को गर्म कर लगभग 3 दिनों तक पट्टी बाँधने से धाव भर जाता है। फोड़े फुंसी भी पत्ते को गर्म कर पट्टी बाँधने से पककर फूट जाते हैं और हमेशा के लिए ठीक हो जाते हैं। बरसात के दिनों में अधिक समय तक पानी मे रहने से पैरों की उंगलियों के बीच घाव बन जाते हैं। बरगद के दूध की कुछ बूंदे लगाने से शीघ्र आराम मिलता है।
  14. कुष्ठ रोग में रात के समय बरगद के दूध का लेप व वृक्ष की छाल का पेस्ट बनाकर लगाने से रोग व घाव धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं।
  15. शरीर मे सूजन दूर करने के लिए बरगद के पत्तों पर घी चुपड़ कर बांधने से सूजन में आराम मिलता है।

ध्यान दें:
प्रत्येक समस्या के कारक अलग हो सकते हैं। समस्या गम्भीर व सामान्य भी हो सकती है। व्यक्तिगत स्थिति को ध्यान में रखते हुए चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

बरगद का वृक्ष जो कि सदियों तक अतएव ऊनी छत्रछाया बनाये रखता है, हमारे लिए बहुत लाभदायक होता है। ऐसे बहुतायत वृक्ष व पेड़ पौधे हैं जिनमे औषधीय गुण पाए जाते हैं। हमें अपने इन हितकारी मित्रों की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए, ताकि हम अधिक से अधिक इनका उपयोग कर सकें।

पर्यावरण का संरक्षण करें और सदैव वृक्षारोपण करते रहें।

धन्यवाद

लेखिका:
रचना शर्मा