जिंदगी खूबसूरत है

थोड़ा है थोड़े की जरुरत है
जिंदगी फिर भी यंहा खूबसूरत है
। “

फिल्म खट्टा मीठा (1978) का यह गीत आपने भी जरूर सुना होगा। जीवन में संतोष व स्थिरता को दर्शाता हुआ यह गीत बहुत खूबसूरत है। जी हाँ, जिंदगी खूबसूरत है सिर्फ जीवन को देखने व समझने का नजरिया बदलने की जरूरत है। अगर हम सभी से यह प्रश्न किया जाए की क्या हम अपने जीवन से खुश हैं ? तो प्रायः सभी का जवाब “ना “में ही होगा। क्योंकि शायद जीवन में हम जिस मुकाम पर पहुंचना चाहते हैं वहां नहीं पहुँचे हैं या नहीं पहुंच पा रहे हैं; या ऐसा बहुत कुछ होता है जो हमारे जीवन में हम प्राप्त करना चाहते थे पर वह हमारे पास नहीं हैं, जो होता तो हम खुश होते। प्राप्य कोई भी हो उसका अंतिम प्राप्ति लक्ष्य ख़ुशी ही होता है हमें लगता है जो नही है। अगर हम वह प्राप्त कर लेंगे तो हम पूर्णतः खुश हो जाएंगे पर क्या ऐसा वास्तव में होगा। नहीं ऐसा नहीं होगा, ख़ुशी की कोई परिभाषा नहीं होती या ख़ुशी किसी वस्तु या किसी मुकाम पर नहीं है खुशी हमारे जीवंत क्षण में है।

Zindagi-Khoobsurat-Hai

हम सभी के पास शिकायतों की बहुत लम्बी सूची होती है खुद से भी और लोगों से भी, मैंने यह नहीं किया या अन्य ने ऐसा नहीं किया। मेरे पास यह नहीं है, अन्य लोगों का जीवन कितना अच्छा है मेरा नहीं है। मनुष्य की प्रवित्ति है कि क्या नहीं हैं, क्या नहीं हुआ, क्या नहीं हो सकता यह सबसे पहले देखता है और निराश हो जाता है।

किसी भी बात के नकारत्मक पहलु पर हमारा ध्यान सबसे पहले केंद्रित होता है” पर हम यह कभी भी नहीं देख पाते की क्या है, क्या हुआ, क्या हो सकता है। प्रश्न यह भी है कि क्या जो हमारे पास है वह खुशी का, मुस्कुराहट का कारण नहीं हो सकता, हम अपने जीवन से शिकायत तो बहुत करते हैं परन्तु कभी भी अपने जीवन को धन्यवाद नहीं करते उसके लिए जो हमारे पास है। “We should feel blessed always what we have” हमें सदैव खुद को सौभाग्यशाली मानना चाहिए, ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए कि ईश्वर ने हमें मनुष्य जीवन प्रदान किया, स्वस्थ शरीर प्रदान किया।

हमें प्रकृति का धन्यवाद देना चाहिए जो हमें सब कुछ देती है भोजन, जल, वायु, स्थान इत्यादि इतना देती है की हम पूर्ण रूप से प्रकृति पर जीवन यापन के लिए निर्भर हैं। हम सौभग्यशाली हैं कि हमारा एक परिवार है, कुछ मित्र, कुछ लोग हैं जो हमारे पास हैं। लिस्ट बहुत लम्बी हो जायेगी अगर हम गिनने लगे की क्या हमारे पास है तो हमारी शिकायतें बहुत कम हो जाएंगी। हमे कृतग्यता (thankfulness) की भावना को सदैव अपने मन में बनाये रखना होगा क्योंकि जैसा भाव अपने मन में हम रखेंगे उसके फलस्वरूप यह पूरा ब्रम्हांड हमारे लिए कार्य करेगा।

विज्ञान भी कहता है प्रत्येक वस्तु, जीव या निर्जीव उसकी मूलभूत इकाई अणु (atom) है और प्रत्येक अणु की अपनी ऊर्जा होती है ऊर्जा क्षेत्र होता है हमारा शरीर और हमारा मष्तिष्क एक अद्भुत ऊर्जा केंद्र है। आपने Universe Law: Law of Attraction तो सुना ही होगा, आपके मष्तिष्क में जो कुछ भी आप सोचते हो जैसा महसूस करते हो आपका ध्यान जिस ओर केंद्रित है जो कुछ भी ब्रम्हाण्ड़ में विस्तारित होता है वैसा ही आपको ब्रम्हांड से वापिस मिलता है। हमारा मन मष्तिष्क जिसपर की ऊर्जा का विस्तार करता है वह पूरे ब्रम्हांड में विस्तृत हो जाती है वैसी ही ऊर्जा कई गुना होकर हम तक पहुँचती है।

“Universe energy works as you think for you “. हमें सिर्फ एक काम करने की जरूरत है कि जब हमारा ध्यान शिकायतों की ओर जाए , कमियों की ओर जाए, नकारत्मकता की ओर जाए तो हम तुरंत अपने ध्यान को हटाकर जीवन की सकारत्मक बातों की ओर लेकर जाएं कमियों से हटाकर पूर्णता की ओर ले जाएं अगर हम यह अभ्यास में लायें कुछ वक़्त तक तो यह धीरे-धीरे हमारे स्वाभाव में शामिल हो जाएगा और हमारा नजरिया पूरी तरह से सकारात्मक हो जाएगा और हम हर स्थिति के सकारत्मक पहलु पर ध्यान देने लगेंगे; हम जीवन सुचारु रूप से जीने लगेंगे।

हमारी जरूरतें तो थोड़ी हैं हमारी इच्छाएं बहुत ज्यादा हैं जरूरतों को पूर्ण कर हमें इच्छाओं पर विजय प्राप्त करना होगा, समझना होगा हम किसी भी उच्च से उच्च स्तर पर पहुँच जाएं हमारी इच्छाएं कभी भी खत्म नही होंगी सदैव नई इच्छाएं जन्म लेती रहेंगी। जीवन जन्म और मृत्यु का एक चक्र है इस चक्र के अंतिम छोर से गुजरने से पहले जीवन को जीना हमारा कर्तव्य है और हमें जीवन को सिर्फ निराशा, चिंता, शिकायतों के ताने बाने में उलझ कर खत्म देना है या जीवन को मुस्कुरा कर, प्रत्येक क्षण को महसूस कर, ज्ञान का विस्तार कर, लोगों को मुस्कुराहट बाँटकर जीना हैं, ये चुनाव हमें ही करना होगा। अगर हम वास्तव में इस ओर ध्यान देने लगें कि हम कितने सौभाग्यशाली हैं तो वाकई में हमारा जीवन बहुत आसान हो जाएगा और हम सभी तब महसूस करेंगे की “जिंदगी खूबसुरत है। “

लेखिका:
रचना शर्मा