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नन्हीं बच्ची – हिंदी कविता

भारत जैसे देश में जहाँ नारी को पवित्र स्थान प्राप्त है वहां नन्हीं सुकुमारियों के प्रति बढ़ते जघन्य अपराध न सिर्फ देश की संस्कृति को धूमिल कर रहे हैं बल्कि यह भी दर्शा रहे हैं कि आज का आधुनिक मानव वैचारिक रूप से कितना घृणित हो चुका है। न्यायालयों में बैठे, काले कोट धारण

विजयादशमी जो कि सत्य के विजयी भाव का प्रतीक है

हर साल हम विजयदशमी मनाते हैं रावण को जलाते हैं। उस रावण को जिसका वध बहुत पहले भगवान राम जी ने कर दिया था। मगर उसका या उसके पुतले का दहन हम आज तक कर रहे हैं। उस रावण का दहन देखने को न जाने कितनी भीड़ लगती है। बच्चे , बूढ़े , जवान

व्यथा- एक हिंदी कविता

यह कविता महज एक कविता नहीं बल्कि एक ऐसी महिला का दर्द है जो अभी भी मेरे आस पास के इलाके में रह रही है। कविताएं व कहानियां हमारे समाज का ही हिस्सा होती हैं जहाँ दर्द है, ख़ुशी है, ईर्ष्या है, नफरत है तो प्रेम भी है…! मेरी कविता का शीर्षक है –