Author Archive

तड़फ – हिंदी कविता

ऐसी जन्नत की भरी, उसनेउड़ान वह , आस-पास सुन्न-मुसाना डाल गई,विचारी वह, सहक गई वक्त की,मारी वह। डाल गई माथे पर तिऊड़ी,कुँआरी वह, गुलाब की कली की अपेक्षा से अधिक,थी जो प्यारी वह।‘याद’ रंग रूप जैसे सुंदर, सुनाअरीं वह, लाजवंती के साथ तुलना करूँ, मैं उसकी,दिखाती थी ऐसी, उसकी समझदारी वह,साथ छोड़ गई मेरा,

चिता – एक हिंदी कविता

कविता शीर्षक – चिता क्यों अपने तड़फ़ते हैं , बातें दिल पर मेरे लगाते हैं। वक्त क्यों, मेरा जटिल बनाते हैं , घूम कर देखी न अभी दुनिया मैंनें , घर में ही मेरी कब्र सजाते हैं। रिश्तेदार पूछते हैं जब मुझे, तू काम क्या करेगा , तो मैं कह देता ‘मेरी उदासी में

ऐकल्लता भाग – 2, अनजानी भूल

छोटे-छोटे पर्वत एक तरफ जंगल इलाका एक तरफ मैदानी इलाका दूर से देखने में ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी देवता ने इस गांव को बनाया हो। 25 से 30 मुसलमानों और सिक्ख रहते थे एक स्कूल जहां सिर्फ उर्दू की भी पढ़ाया जाता था। दो दोस्त निहाल सिंह और शौकत अली दोनों ने

हिंदी कविता – “आँखें”

हिंदी कविता “आँखें” सिर से पाँव तक की गहराई, जान लेती उनकी आँखें दुनिया में बेमिसाल सी हैं, उनकी आँखें ! क्यों मिलापाता नहीं, ‘मैं’ उनसे अपनी आँखें खूबसूरती को भी और खूबसूरत बना देती हैं, उनकी आँखें कैसे मेरे हर विचार को भांप लेती हैं, उनकी आँखें शायद रातों को जागकर,बनाई होगी, उन्होनें

हिंदी कविता – “नशीली आँखें”

हिंदी कविता – नशीली आँखें दिल रूक जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही जमीन पाँव से निकल जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही ! मेरे होश उड़ जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही निगाहें घूम जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही ! आगे दिखाई कुछ न दे, उनकी नशीली आँखें देखते ही क्यों शरमा

हिंदी कविता “सफर” – जिन्दगी की कश्ती में सफर करता मैं न थका

हिंदी कविता “सफर” जिन्दगी की कश्ती में सफर करता मैं न थका मगरमच्छ ने नोचना तो चहा, मैं न रूका !! समुद्र की गहराई नाप ली दूर से खड़कर, किनारा मैं ना पा सका, भंवर आते जाते गए, मैं न फंसा ! जाल हमने भी डाला मछलीयों को, एक न एक दिन फंस जाएंगी,

पता – हिंदी कविता

बस थोड़ा ‘स, मोड़ आगे, उसकी गली, मेरी जिन्दगी में अहम, क्यों उसकी गली। मेरी सोच का हिस्सा बड़ा, उसकी गली, जुड़ी जिन्दगी की कहानी, उसकी गली। मेरे दुःखों में सकूँन लाए, उसकी गली, क्यों मन चाहे, रोज जाऊ, उसकी गली। बस थोड़ा ‘स, मोड़ आगे, उसकी गली, मेरी जिन्दगी में अहम, क्यों उसकी

चले जाएंगे – हिंदी कविता

अखिर वादे करके चले जाएंगे अब नहीं लौट के आएँगे। चले जाएंगे… छोटी सी तकरार कर चले जाएंगे मेरे ऊपर ‘बईमान’ का दाग लगा। चले जाएंगे… सांस के साथ सांस लेने वाले चले जाएंगे ‘संदीप’ रोग हिज्र का लगा। चले जाएंगे… छोड़ सात समुद्र से पार चले जाएंगे मेरे ‘पर’ काट, जख्मी कर। चले

हिंदी कविता – दुनियां

कभी कभी लेखक अपने मन की बात भी कविता के माध्यम से बयां करते हैं। इसी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए पखेरू के लेखक संदीप कुमार नर नें अपने मन व विचारों में आने वाली बातों को एक छोटी से कविता में पिरोया है “वह गाता और लिखता है” पढ़िए पखेरू पर। वह गाता

मैं खुशनसीब – हिंदी कविता

कोई मुझे यहाँ आने को कहता है , वो मुझे वहाँ ले जाने को कहता है , अगर कोई उनके पास ले जाएँ तो , मैं खुशनसीब ।। कभी मुझे से ये बात करना चाहता है , कभी मुझे से वो बात करना चाहता है , अगर मेरी उनसे बात हो जाएँ तो ,