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सच्ची कहानी – परिणाम

इस कहानी के पात्र वास्तविक नहीं है, लेकिन कहानी सच्च और जूठ का परदाफास करती है। जो हठ साधना है साधु संतो की, बहुत कठिन होती है, उन्हें कई दिन भूखे-प्यासे रहकर सत्य को सामने लाना पड़ता हैं। वो ऐसे काम कर जाते है जो उनकी दुनियाँ के ही बस की बात होती है,

हिंदी कविता – ख़्वाहिश

कविता शीर्षक – ख़्वाहिश मित्र है तू भी मेरा, तुझे मिलने आऊँगा,वादा सा कर बैठा, क्या वह होगा, उस तरह का,जो ख्याबों में तराशा है, या फिर इस के उल्ट। क्या वह मुझे पहचान लेगा, या फिर मैं उसको, भोलपन, बेख़बर, कही सहपाठियों की बातें।उसको मेरी बचपन की, मिलने की बेताबी,क्या उसे पता होगा,

हिंदी कविता – पार

कविता शीर्षक – पार जाऊंगा मैं मल्लाह बनकर, सात समुद्रों को पार कर कर। महकते सुबह की झलक बनकर, खड़ जाऊंगा मैं, पैरों पर, छाती तनकर। जाऊंगा मै, उसको मिलने की, आस कर कर, हुआ है मेरा, यारो ‘चाँद’ विदेशी। जाऊंगा मैं मल्लाह बनकर, सात समुद्रों को पार कर कर। रुलती ज़िंदगी के पन्ने

हिंदी कविता – ताकत

हिंदी कविता – ताकत समुन्दर का नापना , सच्चे संतों की परीक्षा ।आसमानों को जानना , आग , पानी के भेद का ।रोहानी तकतों के आगे ,खुद को ऊँचा देखना । इस धरती पर , ईश्वर के घरों को उल्लेखना ।फिर भी तूने किसी रूप में , उस ईश्वर को ही माथा टेकना ।बेबसी

हिंदी कविता – पिंजरा

हिंदी कविता – पिंजरा हालत मेरी, ऐसी बन गई,जैसे ग़ुलाम परिंदे को, कोई दे पिंजरे में से छुड़ा,उड़ नहीं होता, अब मेरे से, रब्बा कोई तो रास्ता बना । गुज़रा मेरा बचपन, बहानों में, कैसे किया उन्होंने गुमराह,ऊँचे ख्वाबों के सपने दिखा कर, लूट लिया मेरे घर का आँगन । चढ़ी जवानी आँख लड़

हिंदी कविता – राहत

राहत – कविता हाँ, मैं सारी ज़िंदगी,भटकता रहूँगा,लेकर ज़िंदगी के अरमानों को,लटकता रहूँगा । तुझे पाने की इच्छा नहीं बुझेगी कभी,कमलीए हर समय पर तुम्हारा भ्रम खाता रहूँगा । लोग कहते पड़ गई जुदाई नार की,यही दिया ताना, भोगना पड़ता है प्यार का । कोई कहता यह तो छल्ला हो गया,सच्च है ‘सन्दीप’ अभी

हिंदी कहानी – ईमान

सर्दी का मौसम शुरू होते ही राम ने सोचा क्यों न मैं माता-पिता को बताकर शहर की ओर काम के लिए निकल लू, महंगाई के मारे तो घर का खर्च अच्छे से नहीं चल पाता। पिता जी भी बूढ़े हो चुके हैं, मोची के काम से तो घर का राशन बड़ी मुशकिल से चलता

हिंदी कविता – नीयत

नीयत – कविता तू देखे मैं देखूं ,प्रत्येक को एकसा देखूं ,तू सोचें मैं सोचूँ ।सबके साथ प्यार चाहूँ । सोच करूँ, विचार करूँ ,क्या लेना मैंनें किसी की ज़िंदगी से ,अगर तू बताना चहता है ,अपनी ज़िंदगी के बारे में ,फिर मैं ज़रूर तुम्हारे मसले का ,सलाहकार बनूँ । हर घर की कहानी

हिंदी कविता – अतीत

हिंदी कविता शीर्षक – ‘अतीत‘ छोड़ गई ‘मुझे’ अभी मरा न था,वेताब थी ‘शायद’ किसी और के इंतजार में,शिकवा उस पर नही, शिकवा खुद पर नही,ऐसा ही बनाया, शायद परवर्दिगार ने उसे । ख्याल उठते है, बादलों की तरह,साथ देता है दोस्त, सहारे की तरह,उस का आना, बहारों की तरह,कोई है, शिखर ले जाता

हिंदी कविता – उम्मीद

ये नकली दुनिया के, फसादों – विवादों को,छोड़, नदियाँ से पार, अंबरों के साथ,मैं खुशी-खुशी सी हँसता हँसता,चला जाऊँगा,आऐगा मेरा वक्त,एक दिन ! जब हड्डियाँ मेरे में से, सतलुज, जेहलम, रावी, ब्यास, जा गंगा के पानियों में से, गुज़र कर शिव की, पहाड़ियों में से, सावन के शराट्यों में से, कुदरत के अपनों में