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हिंदी कहानी – ईमान

सर्दी का मौसम शुरू होते ही राम ने सोचा क्यों न मैं माता-पिता को बताकर शहर की ओर काम के लिए निकल लू, महंगाई के मारे तो घर का खर्च अच्छे से नहीं चल पाता। पिता जी भी बूढ़े हो चुके हैं, मोची के काम से तो घर का राशन बड़ी मुशकिल से चलता

हिंदी कविता – नीयत

नीयत – कविता तू देखे मैं देखूं ,प्रत्येक को एकसा देखूं ,तू सोचें मैं सोचूँ ।सबके साथ प्यार चाहूँ । सोच करूँ, विचार करूँ ,क्या लेना मैंनें किसी की ज़िंदगी से ,अगर तू बताना चहता है ,अपनी ज़िंदगी के बारे में ,फिर मैं ज़रूर तुम्हारे मसले का ,सलाहकार बनूँ । हर घर की कहानी

हिंदी कविता – अतीत

हिंदी कविता शीर्षक – ‘अतीत‘ छोड़ गई ‘मुझे’ अभी मरा न था,वेताब थी ‘शायद’ किसी और के इंतजार में,शिकवा उस पर नही, शिकवा खुद पर नही,ऐसा ही बनाया, शायद परवर्दिगार ने उसे । ख्याल उठते है, बादलों की तरह,साथ देता है दोस्त, सहारे की तरह,उस का आना, बहारों की तरह,कोई है, शिखर ले जाता

हिंदी कविता – उम्मीद

ये नकली दुनिया के, फसादों – विवादों को,छोड़, नदियाँ से पार, अंबरों के साथ,मैं खुशी-खुशी सी हँसता हँसता,चला जाऊँगा,आऐगा मेरा वक्त,एक दिन ! जब हड्डियाँ मेरे में से, सतलुज, जेहलम, रावी, ब्यास, जा गंगा के पानियों में से, गुज़र कर शिव की, पहाड़ियों में से, सावन के शराट्यों में से, कुदरत के अपनों में

हिंदी कहानी – समाज

एक तरफ़ पहाड़ झाड़ियां तीन तरफ़ मैदानी इलाका, उस गाँव में गेहूँ मक्का से ज़्यादा बाग़-बागीचे तो कहीं अमरूदों के पेड़। खुशहाल गाँव के लोग एक दूसरे की अधिक से अधिक इज्जत करते जो गाँव का सरपंच कह दे, सारा गाँव उसे खिले माथे मान लेते। गाँव में लोग पशु-पालना बैलगाड़ीयाँ रखने में बड़ा

हिंदी कविता – समझ

कविता शीर्षक – ‘समझ’ छोड़ यार मुझे समझाता, ख़ुद सोचो में डूब जाऐगा।तू सारा कुछ छोड़ कर, मेरी दुनिया में चला जाऐगा। मैं हूँ एक पहेली सी,तू मुझे सुलझता आप उलझ जाऐगा।दुशमनी करके क्या फ़ायदा मेरे साथ, तू,हमारा दोस्त सदा के लिए बन जाऐगा। देखता देखते इस जग को, हमेशा के लिए हमारे राह

तड़फ – हिंदी कविता

ऐसी जन्नत की भरी, उसनेउड़ान वह , आस-पास सुन्न-मुसाना डाल गई,विचारी वह, सहक गई वक्त की,मारी वह। डाल गई माथे पर तिऊड़ी,कुँआरी वह, गुलाब की कली की अपेक्षा से अधिक,थी जो प्यारी वह।‘याद’ रंग रूप जैसे सुंदर, सुनाअरीं वह, लाजवंती के साथ तुलना करूँ, मैं उसकी,दिखाती थी ऐसी, उसकी समझदारी वह,साथ छोड़ गई मेरा,

चिता – एक हिंदी कविता

कविता शीर्षक – चिता क्यों अपने तड़फ़ते हैं , बातें दिल पर मेरे लगाते हैं। वक्त क्यों, मेरा जटिल बनाते हैं , घूम कर देखी न अभी दुनिया मैंनें , घर में ही मेरी कब्र सजाते हैं। रिश्तेदार पूछते हैं जब मुझे, तू काम क्या करेगा , तो मैं कह देता ‘मेरी उदासी में

ऐकल्लता भाग – 2, अनजानी भूल

छोटे-छोटे पर्वत एक तरफ जंगल इलाका एक तरफ मैदानी इलाका दूर से देखने में ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी देवता ने इस गांव को बनाया हो। 25 से 30 मुसलमानों और सिक्ख रहते थे एक स्कूल जहां सिर्फ उर्दू की भी पढ़ाया जाता था। दो दोस्त निहाल सिंह और शौकत अली दोनों ने

हिंदी कविता – “आँखें”

हिंदी कविता “आँखें” सिर से पाँव तक की गहराई, जान लेती उनकी आँखें दुनिया में बेमिसाल सी हैं, उनकी आँखें ! क्यों मिलापाता नहीं, ‘मैं’ उनसे अपनी आँखें खूबसूरती को भी और खूबसूरत बना देती हैं, उनकी आँखें कैसे मेरे हर विचार को भांप लेती हैं, उनकी आँखें शायद रातों को जागकर,बनाई होगी, उन्होनें