Author Archive

हिंदी कविता – “नशीली आँखें”

हिंदी कविता – नशीली आँखें दिल रूक जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही जमीन पाँव से निकल जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही ! मेरे होश उड़ जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही निगाहें घूम जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही ! आगे दिखाई कुछ न दे, उनकी नशीली आँखें देखते ही क्यों शरमा

हिंदी कविता “सफर” – जिन्दगी की कश्ती में सफर करता मैं न थका

हिंदी कविता “सफर” जिन्दगी की कश्ती में सफर करता मैं न थका मगरमच्छ ने नोचना तो चहा, मैं न रूका !! समुद्र की गहराई नाप ली दूर से खड़कर, किनारा मैं ना पा सका, भंवर आते जाते गए, मैं न फंसा ! जाल हमने भी डाला मछलीयों को, एक न एक दिन फंस जाएंगी,

पता – हिंदी कविता

बस थोड़ा ‘स, मोड़ आगे, उसकी गली, मेरी जिन्दगी में अहम, क्यों उसकी गली। मेरी सोच का हिस्सा बड़ा, उसकी गली, जुड़ी जिन्दगी की कहानी, उसकी गली। मेरे दुःखों में सकूँन लाए, उसकी गली, क्यों मन चाहे, रोज जाऊ, उसकी गली। बस थोड़ा ‘स, मोड़ आगे, उसकी गली, मेरी जिन्दगी में अहम, क्यों उसकी

चले जाएंगे – हिंदी कविता

अखिर वादे करके चले जाएंगे अब नहीं लौट के आएँगे। चले जाएंगे… छोटी सी तकरार कर चले जाएंगे मेरे ऊपर ‘बईमान’ का दाग लगा। चले जाएंगे… सांस के साथ सांस लेने वाले चले जाएंगे ‘संदीप’ रोग हिज्र का लगा। चले जाएंगे… छोड़ सात समुद्र से पार चले जाएंगे मेरे ‘पर’ काट, जख्मी कर। चले

हिंदी कविता – दुनियां

कभी कभी लेखक अपने मन की बात भी कविता के माध्यम से बयां करते हैं। इसी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए पखेरू के लेखक संदीप कुमार नर नें अपने मन व विचारों में आने वाली बातों को एक छोटी से कविता में पिरोया है “वह गाता और लिखता है” पढ़िए पखेरू पर। वह गाता

मैं खुशनसीब – हिंदी कविता

कोई मुझे यहाँ आने को कहता है , वो मुझे वहाँ ले जाने को कहता है , अगर कोई उनके पास ले जाएँ तो , मैं खुशनसीब ।। कभी मुझे से ये बात करना चाहता है , कभी मुझे से वो बात करना चाहता है , अगर मेरी उनसे बात हो जाएँ तो ,

हम वो भवँरे नहीं – हिंदी कविता

हम वो भवँरे नहीं, जो हर फूल पर बैठते हैं।। हम वो आदमी नहीं, जो हर बात बदलते हैं ।। हम वो हमराज नहीं, जो हर राज खोलते है।। हम वो आम नहीं, जो हर बात पर बोलते हैं ।। हम वो दीप नहीं, जो हर राह पर जलते हैं ।। हम वो दीवाने

एक मुलाकात की तो बात है – ग़ज़ल

“वक्त आएगा ऐसा, आमना सामना होगा तेरा-मेरा, तू उत्तर देगा, मैं सवाल करूँगा, मैं उत्तर दूंगा, तू सवाल करेंगा, क्या खबर इस जंग में, शायद दोनों जीत जाएँ “ एक मुलाकात की तो बात है, चाँद चढ़कर भी दिखाई न देगा !! बिखरे हूए सितारों का हार बन जाऊँगा, खामोश ये विया-बान किसी के

हिंदी कहानी – ऐकल्लता 1947 का जख्म

सुबह हुई आसपास के लोग अपने घरों का सामान बाँधने लगे। जितना उठा सकते थे उतना बांध लिया। करमा, अपनी घरवाली को यह कह रहा था की जब तक सभी चलने के लिए तैयार होगे मैं खेत के कोनें से जाकर दबाए चांदी के सिक्के निकालकर ले आता हूं। दो-सौ के सिक्के होंगे हमारे

हिंदी कविता – ‘दास्तान’

  मेरे दिल से मेरा हाथ मत उठाना नीचे जख्म है, मेरे दिल की दास्तान न सुनना मेरे दिल में दर्द है !! हंसती हैं दुनिया मुझे चिड़चिड़ने के लिए, पास बुलाते हैं मुझे उसे भूलने के लिए, बिठाते है मुझे उसे भूल जाने के लिए, समझाते है मुझे मेरा दिल लगाने के लिए,