श्री कृष्ण जन्माष्टमी एक भक्तिमय उत्सव

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जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है। जन्माष्टमी को श्री कृष्ण जन्म के फलस्वरुप मनाया जाता है। जन्माष्टमी अपने साथ ढेर सारी मुस्कुराहटों को लाती है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ना सिर्फ हिंदुस्तान में नहीं अपितु पूरे विश्व के कुछ हिस्सों में भी जन्माष्टमी के इस उत्सव को बड़े ही आत्मीय रुप से मनाया जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है जन्माष्टमी दो शब्दों के मेल से बना है इसलिए इसे भादो मास की अष्टमी पर मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार ऐसा बताया गया है कि कृष्ण जी का जन्म कंस के वध के लिए हुआ था। ईश्वर के सभी अवतार हमें सदा सत्य की जीत का ही पाठ पढ़ाते हैं। तो इस सत्य की जीत को और भी विशाल बनाते हुए आज मैं आपको बताना चाहूँगी ऐसी खास जगह जहाँ पर कृष्ण जनमाष्टमी (Krishna Janmashtami) को बेहद बड़े स्तर पर आयोजित किया जाता है।



Krishna-Janmashtami-Ka-Utsav-Mathura-Janmashtami-Vrindavan श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव

Mathura Janmashtami मथुरा का जन्माष्टमी उत्सव:

मथुरा श्री कृष्ण की जन्मभूमि है तो यह ज़ाहिर सी बात है कि मथुरा में श्री कृष्ण के जन्म के मौके को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता होगा। यही कारण है कि मथुरा का जन्माष्टमी उत्सव सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे जगत में विख्यात है। जन्माष्टमी के अवसर पर दूर-दूर से लोग इस उत्सव का साक्षी बनने आते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा नगरी किसी दुल्हन की तरह लगती है।




Vrindavan Janmashtami वृंदावन का जन्माष्टमी उत्सव:

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि वृंदावन वह स्थान है जहाँ पर श्री कृष्ण का बचपन व्यतीत हुआ है इसलिए वृंदावन में श्री कृष्ण महोत्सव का आलम देखते ही बनता है यहाँ जब श्रीकृष्ण का जन्म होता है तो अनेक भक्तजन इस खूबसूरत पल को अपनी आंखों में सजा कर अपने घर ले जाते हैं। यहाँ लोग नाचते-गाते हुए, हँंसते-हँसाते हुए, भजन करते हुए श्री कृष्ण के आगमन पर अत्यंत उल्लास से उनका स्वागत करते हैं।

Dwarka Janmashtami द्वारका का जन्माष्टमी उत्सव:

द्वारका नगरी को श्री कृष्ण के द्वारा बसाया गया था। यह एक महत्वपूर्ण कारण है जिसके कारण श्री कृष्ण को द्वारकाधीश के नाम से भी जाना जाता है। जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर द्वारका अतुलनीय स्तर से आकर्षित लगती है। ऐसा लगता है कि ईश्वर स्वयं भक्तों के गुणगान से प्रसन्न होकर उनको अपना असीम प्रेम देने आए है। जन्माष्टमी के महोत्सव के दौरान द्वारका नगरी इतनी भक्ति में होती है कि वह आपको भक्ति के सागर में डूबा देती है।

यदि आप भी जन्माष्टमी के इस अमूल्य उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं तो आपको इन जगहों पर जीवन में एक बार तो अवश्य जाना चाहिए।

अपने लेख की समाप्ति करने से पहले मैं आपको श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई कुछ रोचक बातें बताना चाहूँगी:

1 – श्री कृष्ण को विष्णु का अवतार माना जाता है

2 – श्री कृष्ण का युग, द्वापर-युग के नाम से जाना जाता है

3 – श्री कृष्ण ने अपने गुरु महर्षि संदीपनी के पुत्र को मृत्यु के बाद जीवित किया था

4 – श्री कृष्ण को कौरवों की माता गांधारी ने मृत्यु का श्राप दिया था। गांधारी द्वारा श्राप दिए जाने के बाद श्री कृष्ण ने उन्हें हँसते हुए तथास्तु कहा था

श्री कृष्ण की महिमा सभी के समझ के तारों से ऊपर है उनकी भक्ति का एक अलग ही रंग है यदि कोई श्री कृष्ण के प्रेम में डूब जाए तो उनका इस सृष्टि के प्रेम से कोई संबंध नहीं होता वह पुण्य तहसील श्री कृष्ण के हो जाते हैं, श्री कृष्ण ने सृष्टि के पालन हार हैं।




नंद के आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की !

लेखिका:
वैदेही शर्मा


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