नक़ल का व्यवसाय और धूमिल होता शिक्षा का महत्त्व

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शिक्षा का महत्त्व और उद्देश्य छात्र, अभिभावक और अध्यापक के लिए जो होना चाहिए वह है एक शिक्षित समाज व सभ्य समाज का निर्माण। परंतु शिक्षा अपने मूल उद्देश्य से दूर जाती नजर आ रही है; आज की शिक्षा का एक मात्र उदेश्य सिर्फ एक अच्छी सी नौकरी पाना रह गया है जिसके लिए छात्र और उनके अभिभावक तथा कुछ अघ्यापक भी मेहनत करते हैं मैं यहाँ उनके शिक्षा प्राप्त करने के मेहनत की चर्चा नहीं कर रही उनकी अच्छे Marks से परीक्षा में पास होने की मेहनत की चर्चा कर रही हूँ। ये कुछ उन छात्रों का प्रकार है जो अपनी परीक्षा में पढ़ के पास होने से ज्यादा नक़ल से पास होने के लिए जीतोड़ मेहनत करते है और इनके इस काम में तो कुछ एक अभिभावक भी उनका साथ देते है और कुछ तो अघ्यापक इसे एक त्यौहार के जैसा मानते हैं जिसमे उनकी अच्छी खासी कमाई हो जाती है।

हाल ही में UP बोर्ड एग्जाम में नक़ल करते हुए कई छात्रों और उनके साथ उनको नक़ल पहुँचानें वाले उनके अभिभाव को पाया गया है। क्या है ऐसे छात्रों और अभिभावकों के लिए शिक्षा का उद्देश्य ? यह सच में एक प्रशन है , क्या अभिभावक भी अपनें पुत्र व पुत्रियों को नक़ल करने की सलाह देना चाहते हैं।

Business-of-copying-and-significance-of-education

जॉली LLB 2 मूवी में एक्टर एग्जाम सेंटर पे नक़ल करके उनको परीक्षा में पास होने का दावा करते हुए अपनी एक्स्ट्रा इनकम को दिखाया है। जो की नई बात नहीं है, वास्तव में कुछ ऐसे भी प्रोफेशनल है जो की इससे अपनी आमदनी का स्त्रोत मानते है और ऐसे लोगों की advance booking रहती है परीक्षा के समय में और आपको यह भी बतादू की इनकी बुकिंग करने वाले कोई और नहीं बल्कि छात्र और इनके अभिभाव होते हैं , कहीं कहीं तो अध्यापक भी इस कू-कृत्य में लिप्त पाया जाता है। इन अभिभावकों का डिमांड है कि उनके बच्चो का नंबर अच्छा आये जिससे उनकी मेरिट अच्छी हो और आगे उनको नौकरी प्राप्त करने में सहायता मिले। ऐसे बहुत से छात्र अच्छे नंबर से पास हो जाते हैं और उनकी मेरिट इतनी अच्छी आती है कि उनको नौकरी भी आसानी से मिल जाती है और फिर वो आगे ऐसे ही समाज का निर्माण करते हैं जैसे वो खुद आये हैं । अर्थार्थ वो अपनी परंपरा को कायम रखते है, कुछ अध्यापक भी इस नक़ल करने के काम में शामिल रहते हैं जिसके लिए उनको पैसे भी छात्रों और उनके अभिभावकों द्वारा प्राप्त होते हैं।

सर्व शिक्षा अभियान में जुटी भारत सरकार और राज्यो में शिक्षा का रूप अलग-अलग है। अध्यापकों की नियुक्ति से लेकर शिक्षा प्रदान करने तक हर राज्यों का अपना अलग-अलग तरीका है। बहुत से अध्यापकों कि नियुक्ति तो उनके मेरिट के आधार पर है और राज्य में बनी सरकार के जाती समीकरण के आधार पर हुआ है, अब जब ये अध्यापक इतनी अच्छी मेरिट से आये हैं तो भी ये इतने काबिल क्यों नहीं कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ा सकें । इतने अच्छे मेरिट वाले अध्यापक के होने के बाद भी सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में आती लगातार कमी और प्राइवेट स्कूलों में हो रही भीड़ का क्या अर्थ लगाया जाये।

क्या हम सब मिल कर शिक्षा का जो मूल उद्देश्य है “सभ्य समाज और शिक्षित समाज का निर्माण” उसको कायम नहीं रख सकते? क्या हम ऐसी कोशिश नहीं कर सकते कि छात्रों को अच्छे नंबर लानें और मेरिट बनाने के लिए ज्यादा जोर देने के बजाय उनको अच्छी और सच्ची शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करें। अभिभावक और अध्यापक से भी यही अनुरोध है कि वो भी अच्छी और सच्ची शिक्षा को ही प्रोत्साहित करे। एक शिक्षक का यही कर्त्तव्य होना चाहिए कि वो अपनें कार्य के प्रति ईमानदार हो और अच्छी शिक्षा ही छात्रों को दे न की पैसे को महत्व दे।


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