Hindi हास्य व्यंग – Funny Story मोटापा एक परेशानी, शर्मा जी की मोटी तोंद

हास्य व्यंग : क्या मोटापा सच में एक बड़ी परेशानी है ? आईये मिलते हैं शर्मा जी से 🙂 🙂 🙂 🙂 🙂

खाने का शौक और आलस इन्सान को क्या से क्या बना देता है !
अब हमारे शर्मा जी को ही ले लीजिये कभी बड़ा सुडौल और छहरीला बदन था इनका, मगर आज वो मुहल्ले में दर्शन का केंद्र बन गये।
लम्बा कद मोटापे के नीचे दब गया है , पेट जो कि अब पेट नहीं तोंद बन गया है।

Motapa-Ek-Pareshani

शर्मा जी कहते हैं , क्या करूँ बड़ा लाचार हूं अपनी बड़ी तोंद से बेकार हूं ;
सारा मुहल्ला मुझको ही देखता है , कभी मोटा तो कभी मोटू कहता है ;
बच्चे देख खिल्ली उड़ाते हैं , जवान देख दबे मुह मुस्कुराते हैं।

मैडम कहती है कि क्यूं इतना खाते हो , अपनी तो अपनी मेरी भी बेइज्जती करवाते हो ;
अपना नहीं तो कुछ मेरा ही ख़याल करो , अपने इस तोंद का कुछ इलाज़ करो ;

सुना है डॉक्टर ढोलकिया मोटापा कम करनें की अच्छी दवा बताते हैं ;
जाने कहाँ – कहाँ से लोग उनके पास आते हैं ;
अरे अब तो जागो – इससे पहले कि तुम्हारा ये पेट फट जाये डॉक्टर के पास भागो ।

मैडम बोल – बोल के मेरा सर खा गयी ; ससुराल और माइका सब याद दिला गयी ;
बोली कसम खाओ कि डॉक्टर के पास जाओगे ;
और ये गुब्बारे जैसी बढ़ रही तोंद का पूरा इलाज़ कराओगे।

मैनें भी ठान लिया – फिर से सुन्दर जवान बन कर दिखाऊंगा और मैडम को रिझाऊँगा ;
हाय ! इस मोटापे नें मेरा प्रेम जीवन भी भंग कर दिया ;
अच्छी खासी ज़िन्दगी को बेरंग कर दिया ;
कसम है आज मैं डॉक्टर ढोलकिया के पास जाऊंगा तोंद को पचकाऊंगा।

घर से बाहर निकल मैनें रिक्शे वाले को कहा हेलो !
वो फ़ौरन बोला 10 रुपये प्रति किलो ;
मैनें कहा क्या बकता है ; ये कैसा मोल – भाओ करता है !

वो बोला – मोल – भाओ तो करना पड़ेगा , तुमको तौल के ही चलना पड़ेगा ;
जितने किलो वजन होगा 10 रुपये के हिसाब से लूँगा , एक पैसा भी कम नहीं करूंगा ;
मैनें कहा क्यूँ गजब करता है यार , मैं हूँ पहले से लाचार ;
कुछ तो ईमान रख , ये 50 रुपये ले और जेब में रख।

बेचारा मेरी हालत देख मान गया , पूछा जाना कहां है ?
मैनें कहा डॉक्टर ढोलकिया के पास ;
वो बोला – अच्छा वही जो मोटापे का इलाज़ करते हैं ? मैनें कहा हां वही !

रिक्शा वाला रिक्शा भगा रहा था पर मेरा जी घबरा रहा था ;
कहीं ये डॉक्टर ढोलकिया की जगह यमराज के पास ना पहुँचा दे ;
डरते हुए मैनें कहा भाई इतना मत भगाओ , रिक्शा जरा धीरे – धीरे चलाओ !

वो गुस्से से बोला – क्यूँ घबराते हो ? सिर्फ 50 रुपये में ही गुलाम बनाते हो ;
एक तो तुम्हारा वजन बर्दास्त नहीं होता , और तुमको हुकुम देने की पड़ी है ;
मेरा मूड मत ख़राब करो , मुझे तुम्हे उतार फेकने कि जल्दी है।

लो आ गयी तुम्हारा मोटापा कम करनें कि दुकान अब उतर जाओ ;
50 रुपये तो मैं लूंगा ही पहले मेरे रिक्शे का पंचर बनवाओ।

मैंने बोला क्या कह रहे हो रिक्शा पंचर था तो चला कैसे ?
वो बोला पंचर था नहीं हुआ और तुम्हारे मोटापे से हुआ ;
पता चला मैं क्यूँ रिक्शा भगा रहा था , मोटे तो तुम हो जान मैं लगा रहा था ।

सुनो अब मैं एक रुपया भी कम नहीं करूँगा ;
मैनें जो कहा था 10 रुपये प्रति किलो ही लूंगा ;
जाओ डॉक्टर ढोलकिया से अपना वजन कराओ , मेरा पंचर बनवाओ और किराया चुकाओ ।

मैनें कहा 10 रुपये प्रति किलो का हिसाब थोड़ा ज्यादा है ;
मैं यहीं मर जाऊं क्या ये तेरा इरादा है ?
वो मेरे मरने की बात सुन डर गया और बोला – दो 50 रुपये मैं काम चला लूंगा ;
कान पकड़ता हूं कि अब मोटा इन्सान कभी नहीं बिठाऊँगा ।

मैं सोचा की – क्या मिला मुझे आलस और शौक खाने से ;
झेलने पड़े जानें कितने शब्द जमानें के ;
थक गया हूँ बात सुन – सुन के लुगाई की , उसके सामने ही पतला होने की कसम खायी थी ;
डॉक्टर ढोलकिया मुझे एक बार पिचका दो , मुझे मेरा सुडौल और छहरीला बदन फिर से लौटा दो !! 🙂 🙂