डेंगु रोकथाम – Dengue Prevention in Hindi, अपना बचाव कैसे करें व क्या है तरीका

डेंगू रोकथाम के उपाय - कैसे रोके डेंगू लार्वा का पनपना

पिछले कुछ वर्षो में भारत में डेंगू जैसी खतरनाक बिमारी का प्रभाव व्यापक रूप से देखा गया है। सबसे ज्यादा मामले देश की राजधानी दिल्ली में ही देखे गए हैं ; जैसा कि हम सभी जानते हैं डेंगू “एडिस मच्छरों” के काटने से होता है जो की डेंगू वायरस को हमारे शरीर में पंहुचा देते हैं और 4 से 5 दिनों के अंदर हमें डेंगू होने के लक्षण जैसे की तेज बुखार , सर दर्द , जोड़ो में दर्द आदि दिखाई देने लगते हैं। डेंगू कभी – कभी जानलेवा रूप भी ले लेती है, डेंगू जैसी खतनाक बिमारी से बचने का एक मात्र उपाय है की हम सभी को डेंगू के बारे में सही और सम्पूर्ण जानकारी हो।

इसीलिए आज हम डेंगू के उपचार तथा रोकथाम के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। डेंगू की कोई विशेष दवा व् वैक्सीन नहीं है क्योंकि यह वायरस जनित रोग है अतः इसकी दवा बनाना अत्यंत कठिन कार्य है परन्तु डेंगू का सही समय पर treatment किया जाए तो रोगी पूरी तरह से ठीक हो सकता है। डेंगू के लक्षणों को दिखाई देते ही हमें मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए ताकि डॉक्टर जरुरी जांचो व् लक्ष्णों के आधार पर यह जान सकें की रोगी किस प्रकार के डेंगू से प्रकार ग्रसित है और रोगी का सही उपचार कर सके।



क्या है Dengue का उपचार?

यदि रोगी को साधारण (क्लासिकल) डेंगू बुखार है तो उसका उपचार व देखभाल घर पर ही की जा सकता है। यह आमतौर पर स्वयं ही ठीक हो जाता है इसमें रोगी को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं होती; इसीलिए केवल लक्षणों के अनुसार और डॉक्टर की सलाह पर लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए ही इलाज किया जाता है।

तेज भुखार आने पर डॉक्टर कि सलाह से पेरासिटामोल की गोली या syrup लेकर बुखार को कम करना चाहिए।

डेंगू में रोगी को सर दर्द आदि के लिए डिस्प्रिन और एस्प्रिन कभी भी देना नहीं चाहिए।

यदि डेंगू के रोगी को बुखार 102 ℉ से अधिक हो तो बुखार को कम करने के लिए हयड्रोथेरेपी का इस्तेमाल करना चाहिए।

डेंगू रोगी के खान – पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए । रोगी पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए क्योंकि बुखार की स्थिति में अधिक भोजन की आवश्यकता होती हैं।

रोगी के शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए इसीलिए रोगी को तरल पदार्थो को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए तथा उसे पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।

रोगी को पर्याप्त आराम करना चाहिए और उन फलों को ग्रहण करना चाहिए जिसमें पानी की मात्रा अधिकतम हो।

यदि रोगी में साधारण डेंगू के साथ-साथ डेंगू हम्रेजिक बुखार (DHF) व् डेंगू शॉक बुखार (DSS) के एक भी लक्षण दिखाई दें तो रोगी को तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर जाना चाहिए ताकि डेंगू के प्रकार की पुष्टि के लिए जरुरी जांच हो सके तथा डॉक्टर रोगी की स्थिति जानकर सही इलाज शुरू कर सके जैसे कि रोगी में टलेट्स की कमी होने पर पलेट्लेट कोशिकाओं को रोगी को चढ़ाया जाना आदि । DHF और DSS होने पर रोगी के रक्त में उपस्थित प्लेटलेट्स की संख्या में अत्यंत कमी आ जाती है । ध्यान देने योग्य बात हैं की प्रत्येक डेंगू के रोगी को प्लेटलेट कोशिकाओं को चढाने की आवश्यकता नहीं होती। उचित खान-पान से प्लेटलेट्स कोशिकाएं स्वयं ही बन जाती हैं । DHF व् DSS डेंगू के बहुत खतरनाक रूप हैं पर ध्यान देने योग्य बात यह है की अगर रोगी को सही समय पर उचित उपचार मिले तो DHF तथा DSS दोनों ही पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं।




डेंगू के रोकथाम:

डेंगू बुखार हो जाने पर डेंगू का उपचार तो डॉक्टर करेंगे ही पर हम सभी के लिए यह अति आवश्यक होगा की हम सभी डेंगू रोग को पहचानें अथवा उसके लक्षणों व् बचाव के तरीकों से अवगत रहें। सबसे पहला कदम हमारा होना चाहिए कि डेंगू को कैसे रोका जाए।

डेंगू बुखार की रोकथाम बेहद सरल है सिर्फ आवश्यकता है ढृढ़ता से उपायों को बरतने की । डेंगू बुखार “एडिस मच्छरों” के काटने से होता है तो सभी के लिए जरुरी है घर में एडिस मच्छरों का प्रजनन रोकना।

डेंगू रोकथाम के उपाय:

मचछर केवल पानी के स्त्रोतों में ही पैदा होते हैं जैसे की नालियों , गड्ढो , रूम कूलर्स ,टूटी बोतलों , पुराने टायर्स व् डिब्बों तथा ऐसी वस्तुएं जिसमें पानी ठहर सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है की डेंगू मच्छर लार्वा सिर्फ रुके हुए साफ़ पानी में ही पैदा होते हैं।

1. घर तथा घर के आस – पास पूरी तरह से साफ़ सफाई रखें । अपने घर में व् के आस पास कहीं पर भी पानी एकत्रित ना होने दें । रुकी हुई नालियों की सफाई करवाएं और गड्ढों को मिटटी से भर दें । रूम कूलर का सारा पानी सप्ताह में एक बार पूरी तरह से खाली कर दे फिर उसे पूरी तरह सूख जाने के उपरांत ही उसमें पानी भरें । घर में रखे फूलदानो में भरा पानी भी निरंतर रूप से बदलते रहें । खाली, टूटी-फूटी बोतलों को ऐसी जगह फेंके ताकि उसमें पानी इकट्ठा न हो सके।

2. यदि रूम कूलर को पूरी तरह साफ़ करना संभव नहीं है तो सप्ताह में एक बार उसमें पेट्रोल या मिटटी का तेल डाल दें । प्रति 100 लीटर पानी में 30 मिलीलीटर पेट्रोल या मिटटी का तेल डालें । ऐसा करने से पानी में डेंगू मच्छर का लार्वा नहीं पनप पायेगा।

3. पानी टंकियों और बर्तनों को पूरी तरह से ढक कर रखें ताकि उसमें मच्छर ना प्रवेश कर पाएं और प्रजनन ना कर सकें ।

4. पानी के स्त्रोतों में आप कुछ छोटी किस्म की मछलियां जैसे की गुम्बासियां व् लेबिस्टर आदि भी डाल सकते हैं । यह मछलियां आपको सरकारी बी. डी. ओ. कार्यालय से मिल जाएंगी।

5. घरों की खिड़कियों पर महीन जाली लगवा दें ताकि मच्छर घर के अंदर ना आ सके।

6. रात मे सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें , मच्छर भगाने व् मारने वाले मच्छर नाशक क्रीम, स्प्रे , MOSQUITO KILL MACHINE जैसे की good night , all out आदि का प्रयोग करें ।

7. ऐसे कपडे पहनें जिससे शरीर का अधिक से अधिक भाग ढका रहे , यह सावधानी जुलाई से लेकर अक्टूबर तक के महीनों के बीच बच्चों के लिए बरतना बहुत ही जरुरी है। बच्चों को पूरी बाजू की शर्ट व् टी शर्ट और पैंट व् लोअर पैंट पहनाएं ; शॉर्ट्स व् निक्कर आदि ना पहनाएं ।

8. मच्छर नाशक दवाई छिड़कने वाले कर्मचारी दवा का छिड़काव करने आयें तो उन्हें मना न करें; अपने घरों में चारो ओर दवा डलवा लें।

9. घर के सभी क्षेत्रों जंहा मच्छर छिप सकें जैसे – घर के कोनों , पर्दो के पीछे आदि जगहों पर सप्ताह में एक बार मच्छरनाशक दवाई का छिड़काव अवश्य करें। दवा छिड़कते समय अपने मुँह व् नाक पर कपडा बाँध लें तथा खाने पिने की चीजों को अच्छी तरह ढक कर रखें।

10. फ्रिज के नीचे लगी वॉटर ट्रे जिसमें पानी जमा होता है उसे प्रतिदिन साफ़ करें ।

11. घर के आस-पास लगभग 100 मीटर तक जंगली पेड़ पौधे, झाड़ियां नहीं होनी चाहिए ये मच्छरों के छिपने का स्थान बन सकते हैं।

12. यदि आपको ऐसा लगता है की आपके आस-पास के क्षेत्र में मच्छरों की संख्या में वृद्धि हो रही है या बुखार से अधिकांश ग्रसित हैं तो आपको तुरंत सरकारी स्वास्त्य केंद्र , नगर पालिका में सूचना देनी चाहिए।

13. याद रहे की डेंगू के मच्छर दिन में काटते हैं इसीलिए मच्छरों से बचने के उपाय दिन में भी करें।

14. डेंगू बुखार से ग्रस्त रोगी को बीमारी के दौरान मच्छरदानी में रखें ताकि मच्छर उन्हें ना काटे; जिससे घर में अन्य लोगों को डेंगू होने का खतरा न रहे।

जागरूकता व् सावधानी ही डेंगू का एकमात्र बचाव है अतः जुलाई से अक्टूबर तक के महीनों में डेंगू और चिकनगुनियां जैसी गंभीर बिमारी से सावधान रहना हम सबके लिए बेहद जरूरी है। खुद जागरूक बनिये और समाज को भी जागरूक करिये ताकि हम सबकी सुरक्षा Dengue से हो सके।

 

जरूरी बात : यह दी गयी जानकारी डेंगू से बचाव व् रोकथाम के तरीके मात्र हैं जो लेखिका के अपने विचारों पर आधारित हैं। अत्यधिक जानकारी हेतु या फिर डेंगू होने की स्थिति में अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें लेखिका न तो डॉक्टर हैं और न ही वो किसी स्वास्थ्य संस्था से जुड़ीं हैं ; उपयुक्त सारा विवरण उन्होनें अपने जानकारी के हिसाब से लिखा है ।




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