‘नवजात शिशु’ विशेष जानकारियां – पहली बार माता पिता बने दंपतियों के लिए

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पहली बार माता पिता बनना जीवन का एक विशेष अनुभव होता है। इस विषय में माता-पिता के मन में कई विचार जन्म लेते हैं, नाना प्रकार के सवाल जन्म लेते हैं जो कि स्वाभाविक भी है। आज हम आपके शिशु की शारीरिक विशेषतायें और व्यव्हार को बतायेंगे जिसे आप अपने नये जन्म लिए बच्चे में तलाश सकते हैं। का

नवजात शिशु जन्म सुरक्षा - वजन स्वास्थ लक्षण शिशु की शारीरिक विशेषतायें

नवजात शिशु का वजन:

भारत में जन्में नौजात शिशु का वजन 2.5 किलोग्राम से लेकर 2.9 किलोग्राम तक सामान्य माना जाता है। गर्भावस्था की पूर्ण अवधि में जन्मा शिशु फुल टर्म बेबी कहलाता है, इसका औसतन वजन भारत के हिसाब से 2500 ग्राम (2 किलो, 500 ग्राम) से लेकर 2900 ग्राम (2 किलो, 900 ग्राम) के बीच अधिकतर पाया जाता है और ऐसे जन्मे बच्चों को स्वस्थ माना जाता है।

भारत में जन्में नौजात शिशु का वजन (healthy baby weight) = 2.5 Kg से 2.9 Kg है तो यह अच्छा वजन है।
भारत में जन्में नौजात शिशु का वजन (healthy baby weight) = 2.5 Kg से कम है तो बच्चा कम वजनी कहलाता है।

एक आंकड़े के अनुसार भारत में गर्भावस्था की पूर्ण अवधि में जन्में हर 10 बच्चों में से 2 बच्चे कम वजनी होते हैं अर्थात वे 2.5 Kg से कम होते हैं। अगर जन्मे शिशु का वजन 2 किलो से कम है तो स्थिति ठीक नहीं मानी जाती ऐसे बच्चे को जन्म के बाद स्वस्थ जांच के लिए डॉक्टर नर्सरी केयर में रखता है और माता पिता को उसके अतिरिक्त देखभाल व उचित पोषण की सलाह देता है।

बच्चे के सोने और जागने का समय चक्र:

शिशु जन्म के कुछ घंटों तक बेहद सक्रीय और जागे से दिखायी देते हैं। वे ज्यादा हरकत तो नहीं कर पाते मगर बड़े चेतन की मुद्रा में रहते हैं। जन्म के आरंभिक कुछ घंटों की सक्रियता के बाद शिशु 12 से 24 घंटे तक नींद ले सकता है। Newly born baby के सोने की यह लंबी अवधी सामान्य है, माता पिता इसमें घबरायें नहीं। नया जन्मा बच्चा प्रतिदिन करीब 16 से 20 घंटे तक सोयेगा, डॉक्टरों के अनुसार यह सामान्य लक्षण है। इस दौरान शिशु के सोने और जागने का कोई नियत समय नहीं होगा और जन्म लिया बच्चा रात में कई बार दूध पीने के लिए रोयेगा भी।

बच्चे का सिर:

वैसे तो हर नव जन्में बच्चे का सिर सामान्य रूप से सुडौल दिखता है परन्तु ऐसा भी हो सकता है कि नए जन्में बच्चों का सिर कुछ बेडौल सा दिखायी जान पड़े। सिर का बेडौल रूप करीब 1 सप्ताह में धीरे-धीरे अपनी सामान्य स्थिति को प्राप्त कर लेता है। नए जन्में बच्चे के सिर का ऊपरी हिस्सा (माथे के ऊपर) बेहद नरम होता है, जो बच्चे की सांस के साथ ऊपर नीचे हिलता हुआ दिखाई पड़ता है। यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि तुरंत पैदा हुए बच्चे के सिर पर किसी तरह का दबाव या चोट लगने जैसी स्थिति ना उत्पन्न हो। New Born Baby का Head ठोस होने में कुछ महीने ले लेता है।

बच्चे की आंखें:

तुरंत जन्में शिशु की आँख मात्र 8 से 10 इंच की दूरी तक ही देखने में सक्षम होती है। नए जन्में बच्चे की आँखों की Visual Ability धीरे-धीरे ही develop होती है जिसमें शुरूआती कुछ महीनों (5 से 8) का समय लग सकता है। तुरंत जन्म लिया बच्चा हमारी सामान्य आँखों की तरह देखने में सक्षम नहीं होता। नए जन्मे Baby Eyes का रंग भी कुछ भिन्न हो सकता है जो कुछ महीनों के गुजरने के साथ सामान्य अवस्था में आता है। यह भी हो सकता है कि नए जन्मे शिशु की आँखों में लाल धब्बे या हल्के काले धब्बे दिखाई दें, जो समय के साथ खुद ठीक होते चले जाते हैं।

छाती और जननांग का क्षेत्र:

  • नव जन्मे बच्चे की छाती का सूजा हुआ दिखाई पड़ना
  • नव जन्मे बच्चे के निप्पल में सूजन दिखाई देना
  • नव जन्में बच्चे के निप्पल से दूध का स्राव होना
  • नवजात शिशु अगर कन्या है तो उसकी योनि से कुछ द्रव्य स्रावित हो सकता है

ऊपर लिखे सारे लक्षण new born baby में पाए जा सकते हैं जो पूर्णतः सामान्य हैं। ऐसी स्थिति में माता-पिता को बिल्कुल नहीं घबराना चाहिए यह स्थिति स्वतः ही कुछ हफ़्तों में ठीक हो जातीं हैं।

बच्चे की त्वचा:

  • नए जन्में बच्चे के होंठ और मुँह का हिस्सा ग़ुलाबी रंग का होता है
  • नव जन्मे बच्चे के मुँह का क्षेत्र नीला दिखाई दे तो फ़ौरन चाइल्ड डॉक्टर से संपर्क करें
  • यदि बच्चे की त्वचा पर छल्ले, मवाद भरे द्रव्य दिखाई दें तो संक्रमण जांच के लिए डॉक्टर से संपर्क करें
  • नव जन्मा बच्चा बेहद कम दूध पी रहा हो और साथ में खांसी बुखार भी हो तो डॉक्टर को बतायें
  • नव जन्में बच्चे सजग होते हैं, अतः वे बिलकुल कोई क्रिया प्रतिक्रिया न करें ये नहीं हो सकता

New Born Baby की त्वचा सम्बंधित यह निम्न स्थितियां बिना उपचार के भी ठीक हो जातीं हैं –

  • गर्दन, पल्कों और ललाट पर हल्के लाल धब्बे का होना
  • पीठ, माथा, बाँहों अथवा कानों पर रोंये, जो खुद ही गिर जाते हैं
  • जन्म के उपरांत नहलाने पर भी शिशु की त्वचा पर सफ़ेद क्रीम की हल्की परत दिखाई दे सकती है
  • सिर पर सफ़ेद सूखे क्रीम जैसी चित्तियाँ निकलना खुद बंद हो जाता है

पीलिया:

आँखों और त्वचा का रंग पीला पड़ जाना पीलिया की पहचान है। New born child में यह 1 या 2 सप्ताह में स्वतः ठीक हो जाता है। परन्तु doctor फिर भी Jaundice की जाँच सम्बंधित रक्त का छोटा नमूना ले सकता है।

  • यदि बच्चे का पेट और बाहें पीले रंग की दिखे
  • शिशु की आंख में सफ़ेद दिखने वाला हिस्सा भी पीला पड़ गया हो
  • शिशु बहुत चिड़चिड़ा हो और दूध न पीता हो

खांसी , छींक और हिचकी का आना:

दूध पीने के उपरांत नवजात शिशुओं में हिचकी का आना स्वाभिक है। शिशु को कभी-कभी खांसी और छींक आना भी स्वाभिक है, बस आप यह ध्यान दें की छींक के साथ कुछ हरे या पीले रंग का तरल पदार्थ तो नहीं निकल रहा। खाँसी, छींक यह सभी अनैच्छिक क्रियायें हैं जो स्वस्थ शरीर का प्रतीक भी हैं अतः इसे लेकर बहुत असमंजस में नहीं रहना चाहिए।

दूध पिलाते समय अगर शिशु मुँह से दूध उगल दे तो –

  • नवजात शिशु दूध की ज्यादा मात्रा को एकबार में गटक नहीं पाते
  • नवजात शिशु को एकदम सीधा लेटा कर दूध न पिलायें
  • बच्चे का सिर कुछ ऊपर होना चाहिए ताकि पीया गया दूध उसे गटकने में आसानी हो
  • यदि बच्चा बार-बार दूध उगल दे रहा हो तो फ़ौरन दूध पिलाना बंद कर दें
  • बच्चे को उठायें, उसे सीधा करें और पीठ पर हलकी थपकी दें

बच्चे की इन्द्रियों का विकास:

हां यह जरूर है कि नवजात शिशु बेहद कोमल होते हैं मगर फिर भी वे अपने आस-पास होती गतिविधियों को महसूस करते हैं। जब आप बच्चे को अपनी बाँहों में झुलाते हैं, उसे कंधे पर रख घुमाते हैं , उसे अपने हाथ से सहलाते हैं , पुचकारते हैं , प्यार देते हैं तो बच्चे को अपनत्व का आभास होता है। यह प्यार दुलार दिया जाना बच्चे को शांति प्रदान करता है और उसका शरीर ऊर्जावान होने के अलावा स्वस्थ भी होता चला जाता है।

शिशु आपकी बात सुनकर भले न समझे किन्तु उसे ध्वनि को सुन्ना बेहद अच्छा लगता है। माँ की बोली शिशु पहचानने लगता है क्योंकि वह ज्यादा समय अपनी माँ के पास गुजारता है। जब शिशु रोता है और उसे माँ उठाये तो वह चुप हो जाता है, शिशु की इन्द्रियां माँ के स्पर्श और उसकी बोली पहचान जाती हैं। नज़र के मुक़ाबले शिशु के सूंघने की क्षमता ठीक होती है अतः वह नींद में भी माँ के स्तन को सूंघता हुआ दूध पीने की इच्छा जाहिर करता है। शिशुओं की इन्द्रियां उसे वस्तु का बोध कराती हैं जैसे अपने हाथ से उसका झुनझुना बजाना इत्यादि।

शिशु में होने वाली Reversible Action अर्थात प्रतिवर्ती क्रियाएं –

  • जोर से बोलने पर नवजात शिशु का चौंक जाना
  • अचानक जोर से हिला देने पर शिशु का घबरा जाना, हाँथ पैर सीधा हो जाना
  • शिशु को खड़ा करने पर उसका स्वतः आगे की ओर बढ़ने का प्रयत्न करना
  • जब आप अपनी ऊँगली उसे पकड़ाते हैं तो वह उसे जोर से कसकर पकड़ लेता है
  • निप्पल शिशु के मुँह में जाते ही उसे चूसने की कोशिश करता है
  • पुकारने पर शिशु का इधर उधर नज़र घुमाने की क्रिया का होना

यह जरूर ध्यान रखें कि नन्हें बच्चे को कभी डराने व अचानक झकझोरने का कोई प्रयत्न ना करे। नवजात शिशु का ह्रदय बेहद कोमल होता है उसके साथ खिलवाड़ न किया जाय तो अच्छा।

प्रतिवर्ती क्रियाओं को देखकर हमें यह ज्ञात होता है कि ईश्वर किसी बच्चे में जन्म से ही समझ प्रदान करता है। कोई भी जन्मा बच्चा पूर्णतः अबोध नहीं होता। भगवान और विज्ञानं के बीच बस यही अंतर है, ईश्वर जीवात्मा की उत्पत्ति करता है जिसके अंदर एक करता सदैव विद्मान रहता है।

नवजात शिशु में होने वाली यह क्रियाएं अथवा लक्षण पहली बार माता पिता बने दंपति के लिए जानने योग्य हैं।

लेखिका:
रचना शर्मा


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