गलशोथ क्या है ? सोर थ्रोट होने पर क्या करें

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sore-throat-kya-hai-kaise-thik-kare सोर थ्रोट होने पर क्या करें

Sore Throat जिसे हिंदी में गल-शोथ कहते हैं। गल-शोथ का अर्थ है गले में सूजन या फिर जलन का होना जिसकी वजह से निगलने में दर्द अथवा परेशानी होती है। अगर किसी को सोर थ्रोट की समस्या है तो उसे कुछ अन्य लक्षण भी महसूस हो सकते हैं जैसे – बुखार होना, गले में सफ़ेद चकतों का पड़ना, गर्दन की लसिका ग्रंथि में सूजन होना भी शामिल है। गलशोथ के दौरान किसी किसी मरीज को खांसी ज्यादा भी आ सकती है और गले के अंदर उसे हमेशा सूखापन महसूस होगा।

गलशोथ अथवा सोर थ्रोट होने के कारण:

– खाने का संक्रमण
– बाहरी संक्रमण
– एलर्जी का होना
– आद्रता व हुमिडीटी में कमी
– अत्यधिक धूम्रपान करना
– हमेशा चिल्लाना
– वायु प्रदुषण या किसी अन्य प्रकार का रासायनिक धुआं

सोर थ्रोट व गलशोथ होने पर क्या करें:

– सर्वप्रथम अपने नज़दीकी डॉक्टर से परामर्श करें
– चिकित्सक गले की स्थिति देखकर दवा देगा
– पेय पदार्थ का सेवन ज्यादा करें जिससे गले पर दबाव कम पड़े
– गर्म पदार्थ का सेवन अधिक करें जिससे बलगम पतला होकर बाहर निकलता रहे
– प्रतिदिन गरारा करें हलके गर्म पानी में नमक डालकर
– डॉक्टरी सलाह के अनुसार आप बीटाडीन का लिक्विड गार्गल भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो सोर थ्रोट में ज्यादा कारगार है
– ज्यादा खाँसी आने की स्थिति में खासी वाली कैंडी को चूसते रहें
– गलशोथ होने पर धूम्रपान तत्काल बंद कर दें
– किसी भी प्रकार की दवाई अपने मन से ना लें



अधिकांशतः सोर थ्रोट या गलशोथ अपने आप ही ठीक हो जाता है। पर कई बार ऐसा भी होता है की यह समस्या जयादा दिनों तक बनी रहती है जिससे आम दिनचर्या में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर गलशोथ ज्यादा दिनों से है तो आप चिकित्सक से जरूर मिले और उनके कहे के अनुसार ही चलें। डॉक्टरी परामर्श लेने पर यह ठीक से ज्ञात हो पायेगा की यह सामान्य है या जीवाणु संक्रमण है। जीवाणु संक्रमण को Strep Throat कहते हैं जिसके उपचार हेतु डॉक्टर आपको कुछ दवाईयों के साथ एंटीबायोटिक खाने को भी दे सकता है। पूरी तरह आराम होने तक दवा का सेवन और डॉक्टर से मिलते रहें।




कब जायें चिकित्सक के पास:

– सोर थ्रोट की समस्या ज्यादा दिनों से हो
– साँस लेने में कठिनाई महसूस करना
– निगलने में गंभीर समस्या का होना
– फीवर 100 डिग्री फारेनहाइट से अधिक का होना
– चकते निकलना
– गर्दन में तेज़ दर्द व सूजन का रहना

लेखिका:
अंकिता त्रिपाठी


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