टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज बीमारी क्या है

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Types of Diabetes in Hindi हिंदी में जानिए मधुमेह के प्रकारडायबिटीज नामक बीमारी का नाम तो सबने सुना है पर इसके 2 प्रकार और हैं जिसे हम Type 1 Diabetes and Type 2 Diabetes के नाम से जानते हैं। भारत में मधुमेह के रोगियों की संख्या काफी बढ़ती जा रही है, वर्तमान समय में भारत ऐसा देश बन गया है जहाँ डायबिटीज से पीड़ित लोग सबसे ज्यादा हैं। पखेरू पर आज का विषय Diabetes Type 1 और Diabetes Type 2 को लेकर है। दोनों में क्या अंतर है? क्यों होता है? और क्या इसके लक्षण हैं? आज हम ये आपको बतलाने का प्रयास करेंगे।

बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, समयानुसार न खाना, ज्यादा समय तक भूखे रहना, कई घंटे तक एक जगह पर बैठे रहना, खाने पर नियंत्रण न होना, बाहर का खाना ज्यादा खाना, व्ययायाम योगा जिम इत्यादि न करना, शारीरिक परिश्रम में कमी, कम पानी पीना, फल जूस का सेवन न करना आदि जैसी बुरी आदतें ही हमें डायबिटीज जैसी बीमारी के करीब ले जातीं हैं। परन्तु कई मामलों में डायबिटीज खानदानी भी होती है जिसे अनुवांशिक बीमारी भी कहा जाता है।


क्या है टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह (Type 1 Diabetes and Type 2 Diabetes):



Diabetes Type 1 में – Insulin Hormone का बनना कम हो जाता है या फिर इन्सुलिन बनना बंद हो जाता है। परन्तु टाइप 1 डायबिटीज को काफी हद तक नियंत्रण में रख मरीज अपना सामान्य जीवन जी सकता है।

Diabetes Type 2 में – इस प्रकार की डायबिटीज में मरीज की रक्त कोशिकाओं (खून) में Sugar की मात्रा नियतांक से कहीं ज्यादा अधिक हो जाती है जिसे नियंत्रित करना अत्यंत मुश्किल हो जाता है। लगातार बढ़ती शुगर की मात्रा मरीज के जीवन का अंत कर देती है , इसलिए टाइप 2 ज्यादा खतरनाक है।

मधुमेह का पहला प्रकार (Type 1): इसमें पेंक्रियाज की कोशिकाएं पूर्णतः नष्ट हो जातीं हैं जिससे इन्सुलिन का बनना कम या रुक जाता है। अमूमन तौर पर यह स्थिति अनुवांशिक या संक्रमण के कारण उत्पन्न होती है। आपको ये जानकार हैरानी हो सकती है की भारत देश में Type 1 Diabetes Disease से पीड़ित लोग कम हैं। टाइप 1 के होने की कोई विशेष अवस्था नहीं है ये बच्चे से लेकर बड़े बुजुर्ग को भी हो सकती है।

मधुमेह का दूसरा प्रकार (Type 2): इसमें मानव शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ती ही चली जाती है और फिर इस पर पूरी तरह काबू पाना असंभव सा जान पड़ता है। हमारे शरीर में उपस्थित इन्सुलिन मरीज के टाइप 2 होने की वजह से उपयोगी नहीं रह जाता। Insulin का उपयोग न होने की स्थिति में रक्त में शुगर जमा होने लगता है नतीजन इस प्रकार के मरीज को बार बार पेशाब जाने की शिकायत होने लगती है।

Type 1 के शिकार: बीमारियां यूँ तो किसी को भी अपनी चपेट में ले सकतीं हैं पर Diabetes Type 1 Disease के शिकार ज्यादातर बच्चे ही देखने को मिलते हैं। डॉक्टरों की बात सुने तो ऐसे मामले अनुवंशित रूप से भी जन्म लेते हैं और संक्रमण की वजह से भी हो सकते हैं। 18 वर्ष तक के बच्चे इस विशेष प्रकार की डायबिटीज से ग्रसित हैं पर पूरे देश में उनकी संख्या काफी कम है क्योंकि Type 1 मधुमेह बीमारी भारत में कम होती है।

Type 2 के शिकार: अनुवांशिकता को छोड़ दें तो यह विशेष प्रकार, मौजूदा दौर की जीवनशैली की वजह से ही होता है। पहले ये Type 1 Diabetes Disease बच्चों में कम पायी जाती थी परन्तु आज के दौर में बच्चे भी इसके शिकार हैं। बच्चों के अलावा महिलाओं में यह बीमारी मुख्यरूप से सामने आ रही है वहीँ पुरुष वर्ग थोड़ा इससे बचा हुआ है। समय के साथ हमारा जीवन मशीनों पर आधारित हो गया है ऐसे में शारीरिक परिश्रम में लगातार कमी आती जा रही है। बच्चों की अगर हम बात करें तो उनका खेल के मैदानों में खेलना कम हुआ है और वे टीवी और मोबाइल गेम में ही व्यस्त हो गए हैं। बढ़ते वजन और मोटापे की वजह से Type 2 हमारे शरीर को खाता जा रहा है।



जानते हैं टाइप 1 के लक्षणों को:

मरीज का बार बार पेशाब जाना, शरीर से ज्यादा पानी निकल जाने से बार बार प्यास का लगना, हर समय कमजोरी का अनुभव करना, दिल की धड़कनों का बढ़ना Diabetes Type 1 Disease में देखने को मिलता है।

जानते हैं टाइप 2 के लक्षणों को:

इसके कुछ लक्षण तो टाइप 1 जैसे ही होते हैं पर कई अन्य लक्षण भी सामने आने लगते हैं।

शरीर में कहीं चोट लगने पर जल्दी ठीक न होना, घाव का जल्दी न भरना, सिर दर्द का होना, आँखों की रौशनी में कमी आना जैसे लक्षण Diabetes Type 2 Disease में देखने को मिलते हैं।

मधुमेह चाहे टाइप 1 हो या टाइप 2 दोनों ही प्रकार में यह हमारे मानव जीवन को प्रभावित करता है। अगर यह किसी को अनुवांशिक (खानदानी) बीमारी के रूप में नहीं मिला है तो कृपया इसे बेवजह अपने नजदीक न आने दें। जीवन हमारा है मर्जी हमारी है और अगर हो गयी तो ये ला-ईलाज बीमारी है; अतः मेरा यह आग्रह है की बच्चे, युवा, घरेलु स्त्रियां, बड़े बुजुर्ग 24 घंटे में से कुछ समय अपने लिए भी निकालें, ईश्वर ने हमें जीवन प्रदान किया है जीने के लिए बीमारी का शिकार होने के लिए नहीं। खेलिये कूदिये, हंसिये बोलिये, दौड़िये भागिये, व्ययायाम योगा कीजिये और समय पर संतुलित आहार लीजिये यही एक मात्र पुख्ता इलाज़ है इस बीमारी का और इससे बचाव का।

लेखक:
रवि प्रकाश शर्मा


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