3 महीने की गर्भावस्था

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3 महीने की गर्भावस्था 3 Month Pregnancy को हिंदी में जानिये।

गर्भावस्था को कुल 3 तिमाही में बांटा गया है –

क)- पहले महीने से तीसरे महीने तक के चक्र को – प्रथम तिमाही कहते हैं जिसमें कुल 12 हफ्ते होते हैं।
ख)- चौथे महीने से छठे महीने तक के चक्र को – द्वितीय तिमाही कहते हैं जिसमें कुल 24 हफ्ते होते हैं।
ग)- सातवें महीने से नवें महीने तक के चक्र को – तृतीय तिमाही कहते हैं जिसमें कुल 36 हफ्ते होते हैं।

तृतीय तिमाही को गर्भावस्था कि अंतिम तिमाही भी कहा जाता है। अंतिम तिमाही का अर्थ ये कि अब प्रेगनेंसी के कुल 36 महीनों का चक्र पूरा हो चला और शिशु का आगमन अब कभी भी हो सकता है। 36 से 40 हफ़्तों के बीच जन्में शिशु को full term baby का जाता है ऐसे जन्में बच्चे शारीरिक रूप से बेहद स्वस्थ होते हैं।

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इस लेख में हम शिशु के तीसरे महीने की स्थिति और माँ की स्थिति को जानेंगे। 12 हफ़्तों (3 महीने) की गर्भावस्था पूर्ण होते ही शिशु के शारीरिक विकास में कई परिवर्तन आ जाते हैं, इसके साथ ही माँ को भी अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की हलचल का पता लगना शुरू हो जाता है।

3 महीने की गर्भावस्था में शिशु का विकास और परिवर्तन:

  • शिशु अपने सिर से दुम तक लगभग 6.7 सेंटीमीटर लंबा हो चुका होता है।
  • शिशु का वजन 23 ग्राम तक का हो जाता है।
  • शिशु निगलने और लात मारने की क्रिया आरंभ कर देता है, संभव है कि माँ इसे अभी अनुभव न कर पाये।
  • शिशु के सभी अंग बन जाते हैं और वे सुचारु रूप से अपनी क्रिया आरंभ कर देते हैं।
  • शिशु की हथेली और उंगलियों पर प्रिंट (finger print) उभर आते हैं।
  • शिशु के चेहरे की मांसपेशियां उसकी अभिव्यक्ति को बयां करने लगती हैं।
  • शिशु हिचकी लेने और साँस लेने की क्रिया करने लगता है।
  • शिशु के जननांग विकसित होने लगने हैं किन्तु अभी उसे अल्ट्रासाउंड से देखा नहीं जा सकता।
  • शिशु के मष्तिष्क की कोशिकायें (brain cells) बनने लगतीं हैं।

पहले और दूसरे महीने में बच्चा भ्रूण की अवस्था में रहता है। तीसरे महीने में उसका आकार बढ़ जाता है। 3 महीने अर्थात 12 हफ़्तों के गुजर जाने पर शिशु का विकास जोर पकड़ने लगता है।

3 महीने की गर्भवती महिला (pregnant lady) की स्थिति –

1)- शरीर में किसी भी प्रकार कि अस्वस्थता होने पर या कमजोरी होने पर अपने मन से कोई दवा न ग्रहण करें।
2)- किसी भी अनजाने व्यक्ति की सलाह मानकर कोई खाद्य पदार्थ न खायें या विशेष प्रकार का व्यायाम न करें।
3)- वजन का घटना बढ़ना हो सकता है अतः इससे अधिक चिंतित न हों।
4)- सदैव स्फूर्तिवान रहें, ज्यादा नाजुक न बनें।
5)- अगर आपको तीसरे महीने में ज्यादा थकान व भूख का अनुभव हो रहा है तो यह सामान्य अवस्था है।
6)- भूख लगने पर कुछ जरूर खायें और थकान रहने पर आराम जरूर करें।
7)- तीसरे महीने में आकर महिला का जी-मचलाना और उलटी आना काफी कम हो जाता है।
8)- अगर जी अभी भी मचलाता है तो बीच बीच में मुँह का स्वाद बदलें किन्तु मसाला, मिर्च, अचार न लें तो बेहतर।
9)- स्वच्छ पानी ग्रहण करें और नारियल पानी उपलब्ध हो तो उसे जरूर लें।

ऐसा कई महिलायें कहतीं हैं कि उन्होंने गर्भावस्था की कोई जाँच करायी ही नहीं और इसकी जरूरत भी क्या है ? पर जांच प्रक्रिया को पूरा करना बेहद आवश्यकत होता है। Pregnancy Checkup से माँ का शरीर, भ्रूण का स्वास्थ और गर्भाशय के विकास सही पता चलता है। समय पर जाँच भविष्य में होने वाली किसी असामान्य स्थिति से निपटने में करती है।

बेहतर तो यही होता है कि गर्भधारण के उपरांत ही पहली जांच ली जाय। अगर ऐसा नहीं किया तो कम से कम तीसरे महीने में तो जाँच आवश्यक हो जाती है क्योंकि तीसरे महीने का शिशु भ्रूण की अवस्था को पार कर अब अपने शरीर को ग्रहण करने लगता है ऐसे में उसके सिर, हाथ, पैर और दिल की धड़कन को जानना बेहद अनिवार्य हो जाता है। जिस प्रकार प्रेगनेंसी का पूरा चक्र होता है उसी प्रकार जाँच प्रक्रिया का भी पूरा चक्र होता है अतः माता पिता इसे नज़रअंदाज़ न करें।

तीसरे महीने की गर्भवस्था तक निम्न जांच हो जानी चाहिए-

  • ब्लड ग्रुप, हीमोग्लोबिन (हीमोग्राम) और सम्पूर्ण रक्त गड़ना
  • ब्लड शुगर (खली पेट और भोजन के बाद)
  • HIV सहित – वी.डी.आर.एल , एच.बी.एस.ए.जी , एच.सी.वी
  • पूर्ण थाइरॉइड प्रोफाइल
  • मूत्र जांच

अगर आप तीन महीने की गर्भवती हैं तो आपकी ऊपर लिखी सारी जाँच जरूर हो चुकी होंगी।
हां मगर अल्ट्रासोनोग्राफी को पूरी गर्भावस्था के दौरान 3 से 4 बार किया जाता है। Pregnancy में Ultrasonography काफी सुविधपूर्ण होती है जिसके माध्यम से गर्भाशय की निगरानी की जाती है। इसके माध्यम से शिशु कि उम्र, उसका विकास क्रम और उसके स्वास्थ को जांचा परखा जाता है। गर्भाशय में हो रहे रक्त स्राव का पता भी ultrasonography से ही चलता है। इसी जाँच के क्रम में एक जाँच योनि मार्ग से भी होती है जिसमें ट्रान्स्डूसर (छड़ी के आकार का) को योनि में प्रवेश करा कर अंदर की छवि को देखा जाता है।

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तीसरा महीना शिशु के विकास का महीना होता है। 3 महीने की गर्भावस्था से शिशु तेज़ी से बढ़ता है अतः माता अपने शिशु को बढ़ने में सहायता प्रदान करे। माँ स्वच्छ पानी के सेवन के साथ, फल, जूस, ताज़ी सब्जी, फाइबर प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट मिनरल युक्त भोजन नियमित रूप से ग्रहण कर बच्चे के विकास में सहायता करे।

ट्रिपल मार्क जाँच, क़्वाडुपल मार्क जाँच, एनोमली स्कैन जैसी जाँच 13 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद से आरंभ हो जाते हैं।

महिला की शारीरिक अवस्था:

गर्भ में पल रहा बच्चा अब विकसित होगा, माँ के पेट की त्वचा में खिंचाव होना शुरू हो जायेगा। पेट के ठीक बीच में बनी रेखा जो नाभि से निकल कर नीचे की ओर जाती है जिसे ‘लीनिया निग्रा’ कहते हैं यह गहरी होती हो जाती है। इस रेखा का गहरा कालापन मिलानोसाइट उत्तेजित करने वाले हार्मोन के द्वारा होता है। 3 महीने की गर्भावस्था के समय महिला के स्तन में भी परिवर्तन आता है जिसमें दुग्ध ग्रंथि बड़ी हो जाती है। स्तन का आकार सामान्य से थोड़ा बढ़ जाता है और निप्पल भी कुछ लंबे प्रतीत होते हैं , उनके आस-पास बने काले घेरे भी बढ़ जाते हैं। त्वचा सम्बंधित ये बदलाव और देखने को मिलते हैं जब महिला की प्रेगनेंसी का समय आगे बढ़ता है।

3 Month Pregnancy 3 महीने की गर्भावस्था के दौरान यात्रा:

क्या आप कार चलाना चाहती हैं –

बिल्कुल आप कार चला सकती हैं, बस ध्यान रहे की आप ड्राइविंग के दौरान अपने पेट में पल रहे बच्चे का भी ख़याल रखें । स्पीड ब्रेकर पर गाड़ी को ज्यादा उछलने ना दें , सीट बेल्ट को जरूर लगायें और स्पीड में अचानक कार ना रोकें। ज्यादा झटके से बचते हुए कार चलाइये और लंबी कार यात्रा के दौरान आप कुछ पल के लिए बाहर निकलकर टहलें ताकि बच्चे को भी आराम मिले।

क्या आप हवाई यात्रा करना चाहती हैं –

यह भी आपके लिए ठीक है, आप गर्भावस्था में कहीं भी हवाई यात्रा करने के लायक हैं। हवाई यात्रा के दौरान आप अपनी सारी दवाइयां साथ रखें और आप यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपके डॉक्टर ने कहीं जहाज में यात्रा करने को मना तो नहीं किया है। कुछ गर्भावस्था जोख़िमभरी भी होती है अतः संभव है कि उस स्थिति में डॉक्टर आपको उड़ान भरने से रोके। फ्लाइंग के दौरान स्वच्छ पानी का सेवन करती रहें ज्यादा उल्टा-फुल्टा कुछ ग्रहण न करें। यह भी जरूरी है कि एयरलाइन कंपनी आपकी गर्भावस्था की स्थिति से अवगत हो अतः आप अपने स्वास्थ संबंधी प्रमाण पत्र उनको जरूर दिखायें।

क्या आप रेल यात्रा करना चाहती हैं –

बेशक आप रेल यात्रा भी कर सकतीं हैं, बस आप उसमें टॉयलेट की साफ सफाई का ध्यान रखें। ट्रेनों में बिकने वाले खुले खाद्य पदार्थों का सेवन ना करें अपने साथ घर का खाना लेकर चलें। यह भी जरूरी है कि आप बीच-बीच में खड़े होकर कुछ देर टहलें ताकि ज्यादा देर बैठने से पेट में पल रहे बच्चे को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

क्या आप ऑफिस जॉब पर जाना चाहतीं हैं –

बिल्कुल बेहिचक आप ऑफिस जाना जारी रखें। ज्यादा देर तक कुर्सी पर न बैठे करीब हर 40 मिनट के बाद कुर्सी से खड़े होकर टहलती रहें। पानी का सेवन होते रहना चाहिए और खाना घर का होना चाहिये। बेहतर होगा कि आप स्वयं के धूम्रपान या फिर ऑफिस में साथी कर्मचारियों के धूम्रपान से दूर रहें।

महत्वपूर्ण बात:

तीन महीने की गर्भावस्था अगर स्वस्थ है तो आप अपने पति से शारीरिक संबंध बना सकती हैं। पर यह क्रिया आप अपने मन से ना करें, इस विषय में आप अपने डॉक्टर की सलाह लें। संभोग के कई आसान होते हैं अतः कौन सा आसन उचित रहेगा जिसमें बच्चा भी सुरक्षित हो और आप समय पूर्व प्रसव जैसी स्थिति से भी बच जायें; यह सारी बातें डॉक्टर ही आपको बतायेंगे। हां अगर डॉक्टर द्वारा संभोग करने को मना किया गया है तो आप न करें।

कुछ महिलाओं को योनि स्राव जैसी स्थिति का भी सामना करना पड़ता है। योनि से निकलने वाला तरल पदार्थ कभी-कभी निकल जाता है, अगर उसमें न ही कोई रंग है और न ही कोई गंध है तो यह सामान्य है। किन्तु योनि का स्राव ज्यादा मात्रा में है या फिर उसमें गंध है या हरे-भूरे रंग जैसा प्रतीत होता है तो आप इसे डॉक्टर से जरूर बतायें।

अंत में,

मेरे द्वारा दी गयी सभी जानकारियां मेरे अपने अनुभव से संबंधित हैं। एक माँ होने के नाते मैं भी इस स्थितियों से गुजरी हूँ और लगातार अपनी महिला डॉक्टर के संपर्क में रहकर मैंने ये सब जाना है। हर स्त्री का शरीर गर्भावस्था के दौरान अलग बर्ताव कर सकता है इसलिए आप हमेशा शुरू से ही डॉक्टर के संपर्क में रहें ,सभी प्रकार की जाँच करायें , डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें , स्वच्छ पियें और साफ़ भोजन करें। मैं रचना शर्मा आपके स्वस्थ शिशु की कामना करती हूँ।

लेखिका:
रचना शर्मा


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