हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

निर्भया तुम जिंदा हो – हिंदी कविता

निर्भया के दोषियों को हुई फांसी…। यह खबर सुनते ही एक संवेदनशील पीड़ा, खुशी व सुकून की भावना एक साथ मन में उमड़ पड़ी, देर से ही सही किन्तु न्याय हुआ। जब-जब दोषियों की दया याचिका कोर्ट के समक्ष पेश की जाती और उनके वकील सारे कानूनी दांव पेंच लगाकर उन्हें बचाने में लग

कोरोना का रोना मत रोना – हिंदी कविता

हिंदी कविता – “कोरोना का रोना मत रोना” कोरोना का रोना मत रोना,मिलकर करो इस पर प्रहार।सावधानी बरतो सुरक्षित रहो, और करो इसका संहार। प्रिवेंशन इज बेटर देन क्योर,सावधानी रखो और हो जाओ श्योर।इस वायरस का होगा अंत,ढलेगी निशा और होगी भोर। मास्क का इस्तेमाल करो और,सैनिटाइजर का करो प्रयोग।सफाई का रखो ध्यान,कोरोना का

हिंदी कविता – बेटी की दुनियां

“बेटी की दुनियां” बेटी की नजर से मम्मी की गोदी, चाँद का हिंडोलापापा के कंधे, मेरा आकाश वाला झूला। वो बचपन की दुनियां, हाँथी एक गुड़ियाबहुत सारे ही थे मेरे खेल और खिलौनेएक था बन्दर जो डफली बजाता थावो प्लास्टिक का था, पर मुझे खूब भाता था। था मेले में पापा ने गुब्बारा दिलायाजो

हिंदी कविता – उदास आँखें

जीवन के सभी रंगों को समेटे हमेशा ही कुछ आंखे उदास सी रह जाती हैं। चेहरे पर हर भाव होता है उनके, पर जीवनधारा में बहते हुए, कभी कुछ ना कहते हुए एक ही प्रकार की उदास आंखों को आपने भी तो देखा होगा। अपने सपनों को सजाते हुए, आंखों से नहीं सिर्फ होंटो

हिंदी कविता – ख़्वाहिश

कविता शीर्षक – ख़्वाहिश मित्र है तू भी मेरा, तुझे मिलने आऊँगा,वादा सा कर बैठा, क्या वह होगा, उस तरह का,जो ख्याबों में तराशा है, या फिर इस के उल्ट। क्या वह मुझे पहचान लेगा, या फिर मैं उसको, भोलपन, बेख़बर, कही सहपाठियों की बातें।उसको मेरी बचपन की, मिलने की बेताबी,क्या उसे पता होगा,

हिंदी कविता – पार

कविता शीर्षक – पार जाऊंगा मैं मल्लाह बनकर, सात समुद्रों को पार कर कर। महकते सुबह की झलक बनकर, खड़ जाऊंगा मैं, पैरों पर, छाती तनकर। जाऊंगा मै, उसको मिलने की, आस कर कर, हुआ है मेरा, यारो ‘चाँद’ विदेशी। जाऊंगा मैं मल्लाह बनकर, सात समुद्रों को पार कर कर। रुलती ज़िंदगी के पन्ने

हिंदी कविता – क्या लिखूँ ?

कविता शीर्षक – क्या लिखूँ ? रोज काल का ग्रास बन रही आसिफा, फिर कैसे मैं श्रृंगार लिखूँगा । देश चल रहा नफरत से ही, फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा । वंचित हैं जो अधिकार से अपने, उनका मैं अधिकार लिखूँगा । दुष्टों को मारा जाता है जिससे, अब मैं वही हथियार लिखूँगा ।

हिंदी कविता – ताकत

हिंदी कविता – ताकत समुन्दर का नापना , सच्चे संतों की परीक्षा ।आसमानों को जानना , आग , पानी के भेद का ।रोहानी तकतों के आगे ,खुद को ऊँचा देखना । इस धरती पर , ईश्वर के घरों को उल्लेखना ।फिर भी तूने किसी रूप में , उस ईश्वर को ही माथा टेकना ।बेबसी

हिंदी कविता – हठधर्मिता

हिंदी कविता – हठधर्मिता तुमने अभी हठधर्मिता देखी ही कहाँ है, अंतर्मन को शून्य करने का व्याकरण मुझे भी आता है,अल्पविराम, अर्धविराम, पूर्णविराम की राजनीति मैं भी जानती हूँ । यूँ भावनाशून्य आँकलन के सिक्के अब और नहीं चलेंगे,स्त्रियों का बाजारवाद अब समझदार हो चुका है,खुदरे बाजार से लेकर शेयर मार्किट तक में इनको

हिंदी कविता – पिंजरा

हिंदी कविता – पिंजरा हालत मेरी, ऐसी बन गई,जैसे ग़ुलाम परिंदे को, कोई दे पिंजरे में से छुड़ा,उड़ नहीं होता, अब मेरे से, रब्बा कोई तो रास्ता बना । गुज़रा मेरा बचपन, बहानों में, कैसे किया उन्होंने गुमराह,ऊँचे ख्वाबों के सपने दिखा कर, लूट लिया मेरे घर का आँगन । चढ़ी जवानी आँख लड़