हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

चिता – एक हिंदी कविता

कविता शीर्षक – चिता क्यों अपने तड़फ़ते हैं , बातें दिल पर मेरे लगाते हैं। वक्त क्यों, मेरा जटिल बनाते हैं , घूम कर देखी न अभी दुनिया मैंनें , घर में ही मेरी कब्र सजाते हैं। रिश्तेदार पूछते हैं जब मुझे, तू काम क्या करेगा , तो मैं कह देता ‘मेरी उदासी में

हिंदी कविता – फनी तूफान

फनी तूफान फनी के फन को कुचलना हैना देख इसे दहलना हैभले जोर-जोर से करे फूफ़कारकरे शोर भले यह बार-बारहम सब भी खड़े हैं तैयार करेंगे इसकी चुनौती को सहर्ष स्वीकारअपनी हिम्मत है फौलादना तोड़ पाएगा कोई तूफानयह डाल-डाल तो हम पात-पातकरेंगे मुकाबला हम साथ-साथ अपनी एकता को देख करहर संकट जाएगा दूर हटहम

हिंदी कविता – मैं अपने कामों में ईमान रखता हूँ

हिंदी कविता मैं अपने कामों में ईमान रखता हूँ सो सबसे अलग पहचान रखता हूँ सब इंसान लगते हैं मुझे एक जैसे तासीर में हमेशा भगवान् रखता हूँ है महफूज़ जहाँ मुझ जैसे बन्दों से सच से लैश अपनी जुबां रखता हूँ बना रहे हिन्दोस्तान मेरा शहंशाह अपने तिरंगे में ही प्राण रखता हूँ

हिंदी ग़ज़ल – दर्द ज्यादा हो तो बताया कर

ग़ज़ल दर्द ज्यादा हो तो बताया कर ऐसे तो दिल में न दबाया कर रोग अगर बढ़ने लगे बेहिसाब एक मुस्कराहट से घटाया कर तबियत खूब बहल जाया करेगी खुद को धूप में ले के जाया कर तरावट जरूरी है साँसों को भी अंदर तक बारिश में भिंगोया कर तकलीफें सब यूँ निकल जाएँगी

हिंदी कविता – न जाने किनका ख्याल आ गया

हिंदी ग़ज़ल न जाने किनका ख्याल आ गयारूखे-रौशन पे जमाल* आ गया जो झटक दिया इन जुल्फों को ज़माने भर का सवाल आ गया मैं मदहोश न हो जाती क्यों-कर खुशबू बिखेरता रूमाल आ गया मैं मिट जाऊँगी अपने दिलबर पेबदन तोड़ता जालिम साल आ गया मेरे हर अंग पे है नाम उसकी कायूँ

कभी खुद का भी दौरा किया कीजिए

“हिंदी कविता” कभी खुद का भी दौरा किया कीजिएजो जहर है निगाहों में पिया कीजिए झूठी सूरत, झूठी सीरत और झूठा संसारसच के खिलने का आश्वासन भी दिया कीजिए हँसी मतलबी, आँसू नकली, बेमानी सब बातेंज़ुबाँ ही नहीं, तासीर को भी सिया कीजिए हवा में सारे वायदे, बेशक़्ल सारी तस्वीरेंहिसाब को कभी तो कुछ

शायरी- तुम्हारी महफ़िल में और भी इंतज़ाम है

शायरी: तुम्हारी महफ़िल में और भी इंतज़ाम है तुम्हारी महफ़िल में और भी इंतज़ाम हैया फिर वही शाकी, वही मैकदा, वही जाम है शायर बिकने लगे हैं अपने ही नज़्मों की तरफपुराने शेरों को जामा पहना कर कहते नया कलाम हैं आप शरीफ न बन के रहें इन महफिलों मेंवरना शराफत बेचने का धंधा

जिसे जन्नत कहते हैं, वो हिन्दुस्तान हर घड़ी दिखाएँगे

कविता शीर्षक : जिसे जन्नत कहते हैं, वो हिन्दुस्तान हर घड़ी दिखाएँगे कुछ इस तरह अपने कलम की जादूगरी दिखाएँगेकिसी की ज़ुल्फ़ों में लहलहाते खेत हरी-भरी दिखाएँगे छोड़ो उस आसमाँ के चाँद को, मगरूर बहुत हैरातों को अपनी गली में हम चाँद बड़ी-बड़ी दिखाएँगे किस्सों में जो अब तक तुम सुनते आए सदियों सेमेरा

इस दिल में आते जाते रहिए

ग़ज़ल – इस दिल में आते जाते रहिए इश्क़ का भ्रम यूँ बनाते रहिएइस दिल में आते जाते रहिए आप ही मेरी नज़्मों की ‘जां’ थीये चर्चा भी सरे आम सुनते रहिए सिलिये ज़ुबान तकल्लुफ सेलेकिन निगाहें मिलाते रहिए आप मेरी हैं भी और नहीं भीये जादूगरी खूब दिखाते रहिए आप बुझ जाइए शाम

अगली पीढ़ी का बोझ कौन उठाएगा

कविता शीर्षक: अगली पीढ़ी का बोझ कौन उठाएगा आग लगाने वाले आग लगा चुकेपर इल्ज़ाम हवाओं पे ही आएगा रोशनी भी अब मकाँ देखे आती हैये शगूफा सूरज को कौन बताएगा बाज़ाए में कई”कॉस्मेटिक”चाँद घूम रहेअब आसमाँ के चाँद को आईना कौन दिखाएगा नदी,नाले,पोखर,झरने सभी खुद ही प्यासेतड़पती मछलियों की प्यास भला कौन बुझाएगा