हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

ग़ज़ल – अच्छा था मेरे दर से मुकर जाना तेरा

अच्छा था मेरे दर से मुकर जाना तेराआसमाँ की गोद से उतर जाना तेरा तू लायक ही नहीं था मेरी जिस्मों-जाँ केवाजिब ही हुआ यूँ बिखर जाना तेरा मेरी हँसी की कीमत तुमने कम लगाईयूँ ही नहीं भा गया रोकर जाना तेरा तुझे हासिल थी बेवजह दौलतें सारी अब काम आया सब खोकर जाना

हिंदी कविता – जिंदगी एक किताब

जिंदगी में चलते-चलते जब भी हम कहीं ठहरते हैं तब जिंदगी के किताब के पिछले पन्नों को जरूर पलटते हैं। जरूरी भी है, तभी हम स्वयं को समझ पाते हैं आगे हमे क्या लिखना है अर्थात किस दिशा में जीवन जीना है, यह जान पाते हैं। जिंदगी ‘एक किताब’ जिंदगी की किताब में पन्ने

ग़ज़ल – दो कदम साथ चलिए मेरे

दो कदम साथ चलिए मेरेफिर हालात बदलिए मेरे तन ही सारा छिल जाएगा जो ज़ख्मों से गुजरिए मेरे जान जाते दर्द की गहराई साथ ही डूबिए, उभरिए मेरे ज़िन्दगी कोई हादसा लगेगी बिखरे ख़्वाबों में चलिए मेरे लेखक: सलिल सरोजमुख़र्जी नगर, नई दिल्ली

हिंदी कविता – निवेदन

कविता शीर्षक – निवेदन सहसा ही जीवन में मेरे , एक क्षण ऐसा आयेगा यह सोच आज मैं विचलित था , क्या मन मेरा मुस्कायेगा उठ रही आज अविरल तरंग थी , सोच ये क्षण भी आयेगा यह सोच आज मैं विचलित था , क्या मन मेरा मुस्कायेगा मेरे मन की गति को देखो

आजादी की सांस – हिंदी कविता, 15 अगस्त विशेष

कितने शहीदों ने जब काल मुख में कदम रखातब जाकर आजादी का स्वर्णिम फल हमने चका लक्ष्मीबाई ने किया आह्वानजागो जागो हिंदुस्तानमंगल पांडे ने बिगुल बजायाहिंदू मुस्लिम तब होश में आयाभगत राजगुरु और सुखदेव नेहंसते-हंसते दे दी जान आजाद ने बंदूक की आखिरी गोलीअपने ही जिस्म में दे दी उतारबेकार नहीं गई उनकी कुर्बानीजन-जन

हिंदी कविता – उम्मीद

ये नकली दुनिया के, फसादों – विवादों को,छोड़, नदियाँ से पार, अंबरों के साथ,मैं खुशी-खुशी सी हँसता हँसता,चला जाऊँगा,आऐगा मेरा वक्त,एक दिन ! जब हड्डियाँ मेरे में से, सतलुज, जेहलम, रावी, ब्यास, जा गंगा के पानियों में से, गुज़र कर शिव की, पहाड़ियों में से, सावन के शराट्यों में से, कुदरत के अपनों में

हिंदी कविता – समझ

कविता शीर्षक – ‘समझ’ छोड़ यार मुझे समझाता, ख़ुद सोचो में डूब जाऐगा।तू सारा कुछ छोड़ कर, मेरी दुनिया में चला जाऐगा। मैं हूँ एक पहेली सी,तू मुझे सुलझता आप उलझ जाऐगा।दुशमनी करके क्या फ़ायदा मेरे साथ, तू,हमारा दोस्त सदा के लिए बन जाऐगा। देखता देखते इस जग को, हमेशा के लिए हमारे राह

तड़फ – हिंदी कविता

ऐसी जन्नत की भरी, उसनेउड़ान वह , आस-पास सुन्न-मुसाना डाल गई,विचारी वह, सहक गई वक्त की,मारी वह। डाल गई माथे पर तिऊड़ी,कुँआरी वह, गुलाब की कली की अपेक्षा से अधिक,थी जो प्यारी वह।‘याद’ रंग रूप जैसे सुंदर, सुनाअरीं वह, लाजवंती के साथ तुलना करूँ, मैं उसकी,दिखाती थी ऐसी, उसकी समझदारी वह,साथ छोड़ गई मेरा,

नन्हीं बच्ची – हिंदी कविता

भारत जैसे देश में जहाँ नारी को पवित्र स्थान प्राप्त है वहां नन्हीं सुकुमारियों के प्रति बढ़ते जघन्य अपराध न सिर्फ देश की संस्कृति को धूमिल कर रहे हैं बल्कि यह भी दर्शा रहे हैं कि आज का आधुनिक मानव वैचारिक रूप से कितना घृणित हो चुका है। न्यायालयों में बैठे, काले कोट धारण

हिंदी काव्य – आज फिर एक बुद्धा की तलाश है

आज फिर एक बुद्धा की तलाश है !! ये नए युग का परावर्तन तो नहीं ,कि झूठ भी यथार्थ बन जाता है ,नालंदा के ज्ञानद प्रांगण में ,आज अज्ञानी भी ज्ञानी का पद पा जाता है । सच को सच कहने के लिए ,आज फिर एक बुद्धा की तलाश है । ये महाबोधि की