हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

हिंदी कविता – मेरी पहचान

हिंदी कविता – मेरी पहचान मेरी पहचानमेरे पिता मेरी पहचान हैं,मेरे सपनों की उड़ान हैं।मेरे नन्हें कदमों की आहट पर,मचलते उनके अरमान हैं।। मुझको उन्होंने खूब पढ़ाया,कुछ बनने के काबिल बनाया।सच की राह पर मुझे बढ़ाकर,चुनौतियों से जूझना मुझे सिखाया।। मुझको बढ़ते देखकर उनके,चेहरे पर आई मुस्कान है।आने वाले कल में मुझको,बनना उनकी पहचान

हिंदी कविता – डाका

हिंदी कविता – डाका तेरे शहर में रब्बा विरान सा पड़ जाता,आता कोई डाकू लूट कर ले जाता। भीतर प्रवेश करते लोग डर कर, हमें कोई कहीं, मार न जाता,सदर से बस्ते शाहर में, बुरी नजरों से कोई देख जाता।नंगे पैर, भूख से बीते दुपहिरियाँ, यहाँ हाल न पूछता, कोई गरीब का,भाषण देता, खड़कर

हर स्त्री एक माँ है – मातृ दिवस हिंदी कविता

मातृ दिवस हिंदी कविता हर स्त्री एक माँ है हर एक स्त्री माँ है, माँ जिसका व्याख्यान शब्दों में किया नहीं जा सकता, माँ जो अपने एक रूप में अनेक भावों को समेटे हुए परिपूर्ण है। हर स्त्रीं एक ‘माँ’ हैफिर चाहे वह किसी भी रूप में होहर स्त्री इक जननी हैचाहे उसने अपनी

मदर्स डे हिंदी कविता – ममता की मूरत माँ

मदर्स डे हिंदी कविता – ‘ममता की मूरत माँ’ ममता की मूरत है मां,और प्रेम का है सागर।चोट लगे जो बच्चों को तो,छलके उसके नैन का गागर।। अपने बच्चों की थामकर उंगली,चलना उसने सिखलाया।देख मुख मंडल हर्षित हो,कई सपना मन में सजाया।। अपने बच्चों का भरती पेट,भले स्वयं भूखे ही रह जाती।यही माता अंबा

निर्भया तुम जिंदा हो – हिंदी कविता

निर्भया के दोषियों को हुई फांसी…। यह खबर सुनते ही एक संवेदनशील पीड़ा, खुशी व सुकून की भावना एक साथ मन में उमड़ पड़ी, देर से ही सही किन्तु न्याय हुआ। जब-जब दोषियों की दया याचिका कोर्ट के समक्ष पेश की जाती और उनके वकील सारे कानूनी दांव पेंच लगाकर उन्हें बचाने में लग

कोरोना का रोना मत रोना – हिंदी कविता

हिंदी कविता – “कोरोना का रोना मत रोना” कोरोना का रोना मत रोना,मिलकर करो इस पर प्रहार।सावधानी बरतो सुरक्षित रहो, और करो इसका संहार। प्रिवेंशन इज बेटर देन क्योर,सावधानी रखो और हो जाओ श्योर।इस वायरस का होगा अंत,ढलेगी निशा और होगी भोर। मास्क का इस्तेमाल करो और,सैनिटाइजर का करो प्रयोग।सफाई का रखो ध्यान,कोरोना का

हिंदी कविता – बेटी की दुनियां

“बेटी की दुनियां” बेटी की नजर से मम्मी की गोदी, चाँद का हिंडोलापापा के कंधे, मेरा आकाश वाला झूला। वो बचपन की दुनियां, हाँथी एक गुड़ियाबहुत सारे ही थे मेरे खेल और खिलौनेएक था बन्दर जो डफली बजाता थावो प्लास्टिक का था, पर मुझे खूब भाता था। था मेले में पापा ने गुब्बारा दिलायाजो

हिंदी कविता – उदास आँखें

जीवन के सभी रंगों को समेटे हमेशा ही कुछ आंखे उदास सी रह जाती हैं। चेहरे पर हर भाव होता है उनके, पर जीवनधारा में बहते हुए, कभी कुछ ना कहते हुए एक ही प्रकार की उदास आंखों को आपने भी तो देखा होगा। अपने सपनों को सजाते हुए, आंखों से नहीं सिर्फ होंटो

हिंदी कविता – ख़्वाहिश

कविता शीर्षक – ख़्वाहिश मित्र है तू भी मेरा, तुझे मिलने आऊँगा,वादा सा कर बैठा, क्या वह होगा, उस तरह का,जो ख्याबों में तराशा है, या फिर इस के उल्ट। क्या वह मुझे पहचान लेगा, या फिर मैं उसको, भोलपन, बेख़बर, कही सहपाठियों की बातें।उसको मेरी बचपन की, मिलने की बेताबी,क्या उसे पता होगा,

हिंदी कविता – पार

कविता शीर्षक – पार जाऊंगा मैं मल्लाह बनकर, सात समुद्रों को पार कर कर। महकते सुबह की झलक बनकर, खड़ जाऊंगा मैं, पैरों पर, छाती तनकर। जाऊंगा मै, उसको मिलने की, आस कर कर, हुआ है मेरा, यारो ‘चाँद’ विदेशी। जाऊंगा मैं मल्लाह बनकर, सात समुद्रों को पार कर कर। रुलती ज़िंदगी के पन्ने