हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

हिंदी कविता – पार

कविता शीर्षक – पार जाऊंगा मैं मल्लाह बनकर, सात समुद्रों को पार कर कर। महकते सुबह की झलक बनकर, खड़ जाऊंगा मैं, पैरों पर, छाती तनकर। जाऊंगा मै, उसको मिलने की, आस कर कर, हुआ है मेरा, यारो ‘चाँद’ विदेशी। जाऊंगा मैं मल्लाह बनकर, सात समुद्रों को पार कर कर। रुलती ज़िंदगी के पन्ने

हिंदी कविता – क्या लिखूँ ?

कविता शीर्षक – क्या लिखूँ ? रोज काल का ग्रास बन रही आसिफा, फिर कैसे मैं श्रृंगार लिखूँगा । देश चल रहा नफरत से ही, फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा । वंचित हैं जो अधिकार से अपने, उनका मैं अधिकार लिखूँगा । दुष्टों को मारा जाता है जिससे, अब मैं वही हथियार लिखूँगा ।

हिंदी कविता – ताकत

हिंदी कविता – ताकत समुन्दर का नापना , सच्चे संतों की परीक्षा ।आसमानों को जानना , आग , पानी के भेद का ।रोहानी तकतों के आगे ,खुद को ऊँचा देखना । इस धरती पर , ईश्वर के घरों को उल्लेखना ।फिर भी तूने किसी रूप में , उस ईश्वर को ही माथा टेकना ।बेबसी

हिंदी कविता – हठधर्मिता

हिंदी कविता – हठधर्मिता तुमने अभी हठधर्मिता देखी ही कहाँ है, अंतर्मन को शून्य करने का व्याकरण मुझे भी आता है,अल्पविराम, अर्धविराम, पूर्णविराम की राजनीति मैं भी जानती हूँ । यूँ भावनाशून्य आँकलन के सिक्के अब और नहीं चलेंगे,स्त्रियों का बाजारवाद अब समझदार हो चुका है,खुदरे बाजार से लेकर शेयर मार्किट तक में इनको

हिंदी कविता – पिंजरा

हिंदी कविता – पिंजरा हालत मेरी, ऐसी बन गई,जैसे ग़ुलाम परिंदे को, कोई दे पिंजरे में से छुड़ा,उड़ नहीं होता, अब मेरे से, रब्बा कोई तो रास्ता बना । गुज़रा मेरा बचपन, बहानों में, कैसे किया उन्होंने गुमराह,ऊँचे ख्वाबों के सपने दिखा कर, लूट लिया मेरे घर का आँगन । चढ़ी जवानी आँख लड़

हिंदी कविता – राहत

राहत – कविता हाँ, मैं सारी ज़िंदगी,भटकता रहूँगा,लेकर ज़िंदगी के अरमानों को,लटकता रहूँगा । तुझे पाने की इच्छा नहीं बुझेगी कभी,कमलीए हर समय पर तुम्हारा भ्रम खाता रहूँगा । लोग कहते पड़ गई जुदाई नार की,यही दिया ताना, भोगना पड़ता है प्यार का । कोई कहता यह तो छल्ला हो गया,सच्च है ‘सन्दीप’ अभी

ग़ज़ल – कुछ देर में ये नज़ारा भी बदल जाएगा

हिंदी ग़ज़ल – “कुछ देर में ये नज़ारा भी बदल जाएगा” कुछ देर में ये नज़ारा भी बदल जाएगा ये आसमाँ ये सितारा भी बदल जाएगा कितना मोड़ पाओगे दरिया का रास्ता किसी दिन किनारा भी बदल जाएगा दूसरों के भरोसे ही ज़िंदगी गुज़ार दी वक़्त बदलते सहारा भी बदल जाएगा झूठ की उम्र

हिंदी कविता – नीयत

नीयत – कविता तू देखे मैं देखूं ,प्रत्येक को एकसा देखूं ,तू सोचें मैं सोचूँ ।सबके साथ प्यार चाहूँ । सोच करूँ, विचार करूँ ,क्या लेना मैंनें किसी की ज़िंदगी से ,अगर तू बताना चहता है ,अपनी ज़िंदगी के बारे में ,फिर मैं ज़रूर तुम्हारे मसले का ,सलाहकार बनूँ । हर घर की कहानी

हिंदी कविता – अतीत

हिंदी कविता शीर्षक – ‘अतीत‘ छोड़ गई ‘मुझे’ अभी मरा न था,वेताब थी ‘शायद’ किसी और के इंतजार में,शिकवा उस पर नही, शिकवा खुद पर नही,ऐसा ही बनाया, शायद परवर्दिगार ने उसे । ख्याल उठते है, बादलों की तरह,साथ देता है दोस्त, सहारे की तरह,उस का आना, बहारों की तरह,कोई है, शिखर ले जाता

ग़ज़ल – अच्छा था मेरे दर से मुकर जाना तेरा

अच्छा था मेरे दर से मुकर जाना तेराआसमाँ की गोद से उतर जाना तेरा तू लायक ही नहीं था मेरी जिस्मों-जाँ केवाजिब ही हुआ यूँ बिखर जाना तेरा मेरी हँसी की कीमत तुमने कम लगाईयूँ ही नहीं भा गया रोकर जाना तेरा तुझे हासिल थी बेवजह दौलतें सारी अब काम आया सब खोकर जाना