आजादी की सांस – हिंदी कविता, 15 अगस्त विशेष

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कितने शहीदों ने जब काल मुख में कदम रखा
तब जाकर आजादी का स्वर्णिम फल हमने चका

15-August-Azadi-Ki-Sans-Hindi-Kavita-Bharat-Ki-Azaadi
पंद्रह अगस्त, भारत की आज़ादी

लक्ष्मीबाई ने किया आह्वान
जागो जागो हिंदुस्तान
मंगल पांडे ने बिगुल बजाया
हिंदू मुस्लिम तब होश में आया
भगत राजगुरु और सुखदेव ने
हंसते-हंसते दे दी जान

आजाद ने बंदूक की आखिरी गोली
अपने ही जिस्म में दे दी उतार
बेकार नहीं गई उनकी कुर्बानी
जन-जन के लहू में आई उबाल

अत्याचारी अंग्रेजों ने जब
लालाजी पर किया लाठीचार्ज
चुप न बैठ सके गांधी, नेहरू
और किया तब सोच विचार

शुरू हुआ आंदोलन का दौर
हिंदुस्तान में मच गया शोर
अंग्रेजों की फीकी पड़ गई चाल
गल न पाई कोई दाल

एक हो गया सारा राज्य
थरथर काँपा अंग्रेजी साम्राज्य
देखकर हमारी एकता की ढाल
भाग गए वो उलटे पाँव

15 अगस्त 1947 का दिन
स्वर्णिम अक्षर में लिखा गया
भारत मां की टूटी बेडियाँ
खुली हवा में हमने साँस लिया

रीना कुमारी
तुपुदाना रांची झारखंड


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