बेरोजगारी का सफर – हिंदी कविता

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बेरोजगारी ने इतना समय लिया लंबा
अब तो डिग्री लगे बस कागज का पन्ना
कितने दिए इंटरव्यू कितने एग्जाम
मिला ना अब तक कोई अच्छा काम

अब तो प्राइवेट नौकरी भी मांगे एक्सपीरियंस
देगा भला कौन पहला एक्सपीरियंस



घिस गया चप्पल टूट गया जूता
मिला नहीं फिर भी कोई काम ढंग का
समझ नहीं आता किसे हाल-ए-दिल सुनाएं
खाना और पीना ना जरा भी सुहाए

लेडीस फर्स्ट के चक्कर में यारो
पीछे रह गया प्यारा मुन्ना
बेरोजगारी ने इतना समय लिया लंबा
अब तो डिग्री लगे बस कागज का पन्ना

रीना कुमारी
तुपुदाना रांची झारखंड


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