हिंदी ग़ज़ल – दर्द ज्यादा हो तो बताया कर

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ग़ज़ल

Hindi-Ghazal-Dard-Jyada-Ho-To-Bataya-Kar

दर्द ज्यादा हो तो बताया कर
ऐसे तो दिल में न दबाया कर

रोग अगर बढ़ने लगे बेहिसाब
एक मुस्कराहट से घटाया कर

तबियत खूब बहल जाया करेगी
खुद को धूप में ले के जाया कर

तरावट जरूरी है साँसों को भी
अंदर तक बारिश में भिंगोया कर

तकलीफें सब यूँ निकल जाएँगी
बदन को हवा में उड़ाया कर

लेखक:
सलिल सरोज


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