इस दिल में आते जाते रहिए

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ग़ज़ल – इस दिल में आते जाते रहिए

इस दिल में आते जाते रहिए
इस दिल में आते जाते रहिए

इश्क़ का भ्रम यूँ बनाते रहिए
इस दिल में आते जाते रहिए

आप ही मेरी नज़्मों की ‘जां’ थी
ये चर्चा भी सरे आम सुनते रहिए

सिलिये ज़ुबान तकल्लुफ से
लेकिन निगाहें मिलाते रहिए

आप मेरी हैं भी और नहीं भी
ये जादूगरी खूब दिखाते रहिए

आप बुझ जाइए शाम की तरह
मुझे दिन की मानिंद जलाते रहिए

है कोई बीमार आपका, फिक्र नहीं
आप बेरुखी से खिखिलाते रहिए

लेखक:
सलिल सरोज


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Comments
  1. Sonal