हिंदी कविता – न जाने किनका ख्याल आ गया

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हिंदी ग़ज़ल

हिंदी ग़ज़ल - न जाने किनका ख्याल आ गया

न जाने किनका ख्याल आ गया
रूखे-रौशन पे जमाल* आ गया

जो झटक दिया इन जुल्फों को
ज़माने भर का सवाल आ गया

मैं मदहोश न हो जाती क्यों-कर
खुशबू बिखेरता रूमाल आ गया

मैं मिट जाऊँगी अपने दिलबर पे
बदन तोड़ता जालिम साल आ गया

मेरे हर अंग पे है नाम उसकी का
यूँ ही नहीं हुश्न में कमाल आ गया

*जमाल -सुंदरता

लेखक:
सलिल सरोज


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