ग़ज़ल – कुछ देर में ये नज़ारा भी बदल जाएगा

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हिंदी ग़ज़ल – “कुछ देर में ये नज़ारा भी बदल जाएगा”

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कुछ देर में ये नज़ारा भी बदल जाएगा
ये आसमाँ ये सितारा भी बदल जाएगा

कितना मोड़ पाओगे दरिया का रास्ता
किसी दिन किनारा भी बदल जाएगा

दूसरों के भरोसे ही ज़िंदगी गुज़ार दी
वक़्त बदलते सहारा भी बदल जाएगा

झूठ की उम्र लम्बी नहीं हुआ करती
ये ढोल ये नगाड़ा भी बदल जाएगा

गिनतियों की उलटफेर में मत पड़ो
रात ढलते पहाड़ा भी बदल जाएगा

सलिल सरोज
मुखर्जी नगर
नई दिल्ली


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