मैं खुशनसीब – हिंदी कविता

कोई मुझे यहाँ आने को कहता है ,
वो मुझे वहाँ ले जाने को कहता है ,
अगर कोई उनके पास ले जाएँ तो ,
मैं खुशनसीब ।।

कभी मुझे से ये बात करना चाहता है ,
कभी मुझे से वो बात करना चाहता है ,
अगर मेरी उनसे बात हो जाएँ तो ,
मैं खुशनसीब ।।

कभी मुझे ये बुलाता है ,
कभी मुझे वो बुलाता है ,
अगर वो मुझे पास बिठाए तो ,
मैं खुशनसीब ।।

कभी मुझे ये तंग करता है ,
कभी मुझे वो तंग करता है ,
अगर वो मुझे गले लगाएँ तो ,
मैं खुशनसीब ।।

कभी मुझे ये सिखाता है ,
कभी मुझे वो समझता है ,
अगर उनसे डाँट पड़े तो ,
मैं खुशनसीब ।।

कोई मुझे लिखकर समझता है ,
कोई मुझे पढ़कर समझता है ,
अगर वो मुझे कोई रास्ता दिखाएँ तो ,
मैं खुशनसीब ।।

 

लेखक:
संदीप कुमार नर