कविता शीर्षक – “माता पिता की खुशी”

कविता शीर्षक – “माता पिता की खुशी”




Mata-Pita-Ki-Khushi-Poem-in-Hindi

बड़े नाजों नखरे उठा माता पिता
अपने बच्चों को पढ़ाते हैं
वही बच्चे बड़े होकर के
ऊंचे-ऊंचे ओहदे पाते हैं

शादी विवाह के बाद वो
अपने परिवार में खो जाते हैं
ढूंढती होगी माता-पिता की नजर
यह भी भूल जाते हैं

जिन बच्चों की खुशियों के खातिर
माता-पिता उठाते हैं हजार गम
कुछ बच्चे सब कुछ भुला कर
करते हैं उनकी आंखें नम

लौटकर नहीं आते इस जहां में
जाने वाले एक भी बार
माता पिता जीवन में मिलते हैं एक बार
खुश कैसे रखोगे इनको कर लो थोड़ा विचार

रीना कुमारी
तुपुदाना रांची झारखंड