हिंदी कविता – निवेदन

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कविता शीर्षक – निवेदन

Nivedan-Hindi-Kavita-Poem

सहसा ही जीवन में मेरे , एक क्षण ऐसा आयेगा
यह सोच आज मैं विचलित था , क्या मन मेरा मुस्कायेगा
उठ रही आज अविरल तरंग थी , सोच ये क्षण भी आयेगा
यह सोच आज मैं विचलित था , क्या मन मेरा मुस्कायेगा

मेरे मन की गति को देखो , भ्रमण कर रहा किधर-किधर
मानवता की एक जंग थी , घूम रहा था जिधर-जिधर
कुछ हिन्दू थे कुछ मुस्लिम थे , जो बिखर रहे थे इधर-उधर
कुछ बात नहीं थी , धर्म युद्ध ही उनके अलग किनारे थे
जो नहीं मिल सके आज तलक , वो और नहीं बंजारे थे

मैं सोच रहा था धर्म ग्रंथों की मूल धारणा एक है
सबका मालिक एक है , सबका मालिक एक है

पर कौन बताये इन लोगों को , कुछ पहले भी बतलाये थे
सब भूल गये गांधी कबीर को , यह सोच आज मैं विचलित था
सहसा ही जीवन में मेरे , एक क्षण ऐसा आयेगा
यह सोच आज मैं विचलित था , क्या मन मेरा मुस्कायेगा

है आज निवेदन युवा बंधु से , तुम तो सोचो कुछ ऐसा
ख़त्म हो सके धर्म युद्ध , कुछ दृश्य दिखे क्षितिज जैसा
सहसा ही जीवन में मेरे , एक क्षण ऐसा आयेगा
यह सोच आज मैं विचलित था , क्या मन मेरा मुस्कायेगा

उठ रही आज अविरल तरंग थी , सोच ये क्षण कब आयेगा
यह सोच आज मैं विचलित था , कब मन मेरा मुस्कायेगा

लेखक:
मनोज मिश्र
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश


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