हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

इतना हाहाकार क्यों है जनाब ?

सोशल मीडिया के दौर में लोग कितनी जल्दबाज़ी में हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप , ट्वीटर और यूट्यूब इत्यादि पर हर क्षण कुछ न कुछ अपडेट होते रहते हैं। पल पल अपडेट होनें वाली चीज़ों में वीडियो , फोटो और लेख प्रमुख रूप से आते हैं जो पूर्णतः स्वजनित होते हैं उसी व्यक्ति द्वारा जिसका वह

हिंदी दिवस पर एक कविता

आज कल कविताओं के नाम पर चुटकुले सुनाये जाए रहे हैं और कहा जा रहा है कि ये जरुरत है जनता भी अब इसी में खुश है लेकिन ये शुरुआत किसी नें तो की होगी। आज हिंदी दिवस पर उसी पर एक कविता मेरी तरफ से। सोचता हूँ कवि मै बन जाऊ क्यों बैठा

हूँ इस शहर में अजनबी की तरह

भारत के एक छोटे से गांव या शहरों से आने वाले बच्चे जो अपने मन में बड़ी उम्मीदें और सपनें संजोए आते हैं, अमूमन तौर पे उन्हें उन सपनों को साकार करने की जद्दोजहत काफी करनी पड़ती है। तमाम तरह की परेशानियों से होता रोजाना सामना उनकी मनःस्थिति पर बहुत बुरा प्रभवा डालती है।

“बेरोजगार प्रेमी” द्वारा लिखित एक हिंदी कविता

प्रेम होना मुश्किल नहीं है लेकिन प्रेम को निभाना बहुत ही मुश्किल काम है। जब लड़की छोड़ के जाती है तब जुदाई दर्द में लडकों के दिल से शायरी, कविता फूट फूट कर निकलती है। वो दर्द गाता है, लोग कहते हैं क्या बात – क्या बात, तो एक कविता जो एक बेरोजगार प्रेमी

रूठी क्यों हो मान भी जाओ – एक प्रेम गीत

रूठना और मनाना या फिर रूठे हुए को मनाना यह दोनों ही बातें रिश्तों के प्रेम भाव को दर्शाती हैं। रूठने-मनाने का यह खेल तो हमने दोस्तों के साथ, भाई बहन के साथ बहुत खेला है पर यही खेल खुछ अन्य रिश्तों का भी अहम पहलू है, क्योंकि रूठे को तभी मनाया जाता है

तुम आओगे ऐतबार था हमें

इंतज़ार करना कितना असहनशील कार्य है। सामान्य संबंधों में इंतज़ार करना मन में खीज पैदा कर देता है उस व्यक्ति के लिए; परन्तु इंसान विवश है “इंतज़ार” शब्द के आगे, क्योंकि बिना इंतज़ार उसे कुछ नहीं मिल सकता। कहीं जन्म के लिए इंतज़ार, कहीं मृत्यु के लिए इंतज़ार, कहीं इंतज़ार ख्वाबों के पूरा होने

हिंदी कविता – “वक़्त से कदम मिला के बढ़ती हुई ज़िन्दगी”

कहते हैं “ज़िन्दगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाम वो फिर नहीं आते” हाँ यह बात बिलकुल सत्य है बीता वक़्त वापस नहीं आता। उम्र के पड़ावों को हम जैसे जैसे पार करते चलते हैं वैसे वैसे बीते हुए वो सभी पड़ाव हमारा अतीत बन जाते हैं। जीवन की मशगुलियत से जुदा