हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

इस दिल में आते जाते रहिए

ग़ज़ल – इस दिल में आते जाते रहिए इश्क़ का भ्रम यूँ बनाते रहिएइस दिल में आते जाते रहिए आप ही मेरी नज़्मों की ‘जां’ थीये चर्चा भी सरे आम सुनते रहिए सिलिये ज़ुबान तकल्लुफ सेलेकिन निगाहें मिलाते रहिए आप मेरी हैं भी और नहीं भीये जादूगरी खूब दिखाते रहिए आप बुझ जाइए शाम

अगली पीढ़ी का बोझ कौन उठाएगा

कविता शीर्षक: अगली पीढ़ी का बोझ कौन उठाएगा आग लगाने वाले आग लगा चुकेपर इल्ज़ाम हवाओं पे ही आएगा रोशनी भी अब मकाँ देखे आती हैये शगूफा सूरज को कौन बताएगा बाज़ाए में कई”कॉस्मेटिक”चाँद घूम रहेअब आसमाँ के चाँद को आईना कौन दिखाएगा नदी,नाले,पोखर,झरने सभी खुद ही प्यासेतड़पती मछलियों की प्यास भला कौन बुझाएगा

‘हर राष्ट्र का नमन’ – हिंदी कविता

कविता शीर्षक – “हर राष्ट्र का नमन” हम युद्ध नहीं अमन चाहेंहरे राष्ट्र का नमन चाहेंचाहे रहें यहाँ चाहे रहें वहाँचाहे विश्वशांति नहीं जंग चाहें अमन के दुश्मन हो जाओ तैयारआके गले मिलो फेंको हथियारबहे प्रेम रूपी सुधा की धारखुशियों की हो सदा बौछार क्या रखा है खून खराबे मेंना आओ किसी के बहकावे

उलझा उलझा रहता है मन, जाने क्यूं !

उलझा उलझा रहता है मन, जाने क्यूं हरदम कुछ कहता है मन, जाने क्यूं ज़िन्दगी की कैद में अरमानों का पंछी है उम्मीदों के पंख लिए जिसकी हसरतें मचलती हैं उड़ जाने का करता है मन, जाने क्यूं ये कैसा मायाजाल है जिसने हमको घेरा है हर तरफ बस ख्वाहिशों का पहरा है जीवन

हो तेरा सम्मान – हिंदी कविता

हिंदी कविता – “हो तेरा सम्मान” जीने को जब चाहिए रोटी , कपड़ा और मकान फिर लोभ , मोह के चक्कर में क्यों फंस गया इंसान अपने प्रतिबिंब के रूप में ईश्वर ने रचा इंसान और उसके कुकृत्य को देख दंग हो रहा भगवान डोल रही है धरती झुक रहा आसमान अपने सत्कर्मो से

बेरोजगारी का सफर – हिंदी कविता

बेरोजगारी ने इतना समय लिया लंबा अब तो डिग्री लगे बस कागज का पन्ना कितने दिए इंटरव्यू कितने एग्जाम मिला ना अब तक कोई अच्छा काम अब तो प्राइवेट नौकरी भी मांगे एक्सपीरियंस देगा भला कौन पहला एक्सपीरियंस घिस गया चप्पल टूट गया जूता मिला नहीं फिर भी कोई काम ढंग का समझ नहीं

करुण कविता – नेक मुर्गा

करुण कविता – ‘नेक मुर्गा’ अपने मालिक की भूख से बेहाली देख मुर्गे की आंखों में आया पानी सोचा इसी घर में खाया चुग-चुग कर दाना आज मालिक के काम है आना भूख से दिन बीते हैं चार मालिक मेरा हुआ बीमार मालिक को मुझे बचाना है नमक का कर्ज चुकाना है सोच गया

उम्मीद की किरण – हिंदी कविता

हिंदी कविता शीर्षक – “उम्मीद की किरण” निराशा के घोर अंधेरे के बीच उम्मीद की एक किरण झिलमिलाती है वहीं किरण लौ फिर मसाल बन जीवन को जगमगाती है हे मानव हिम्मत ना हार समस्या करे प्रहार पर प्रहार खुशियां कदम चूमेगी तेरी लक्ष्य पर नजर तू डाल हर समस्या का समाधान उसके आसपास

हे भारत मातृभूमि हमारी

हे भारत मातृभूमि हमारी हे भारत मातृभूमि हमारी जन्म दिया तुमने यहां पर तुमने ही चलना सिखलाया गोद में तेरी खेले हैं हम कभी न तुमने हमें रुलाया हमें है तू प्राणों से प्यारी हे भारत मातृभूमि हमारी ! तू उपवन हम फूल हैं तेरे तुमने ही हमको सींचा है नस नस बहती रक्त

कविता शीर्षक – “माता पिता की खुशी”

कविता शीर्षक – “माता पिता की खुशी” बड़े नाजों नखरे उठा माता पिता अपने बच्चों को पढ़ाते हैं वही बच्चे बड़े होकर के ऊंचे-ऊंचे ओहदे पाते हैं शादी विवाह के बाद वो अपने परिवार में खो जाते हैं ढूंढती होगी माता-पिता की नजर यह भी भूल जाते हैं जिन बच्चों की खुशियों के खातिर