हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

आँसू – हिंदी कविता

कविता शीर्षक – “आँसू” आँसू के कई हैं रूप जैसे छाँव और है धूप कुछ खुशी के, कुछ गम के आंँसू होते हैं कुछ छलकते हैं, कुछ आँखों को नम करते हैं अत्यधिक खुशी पाकर भी आँखों से आँसू ढलक जाते हैं दर्द का फफोला फूट कर आँसू बनकर बह जाते हैं कुछ आँसू

पंछी की चाह – हिंदी कविता

भला कैद रहकर जीना कौन चाहता है , फिर वो चाहे इंसान हो या एक परिंदा। पिंजरे में कैद एक पंछी आखिर क्या सोचता होगा ? कुदरत ने उसे अनंत आकाश में उड़ने का वरदान दिया मगर इंसानी ताकतों नें उसे कैद कर अपना ग़ुलाम बना लिया। एक कैद पंछी की चाहत को बयां

माँ पर एक हिंदी कविता

माँ का होना हर बच्चे के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि बच्चे सबसे ज्यादा अपनी माँ के ही करीब होते हैं। नीचे लिखित पंक्तियाँ माँ की मत्ता और उसका अपने बच्चे के प्रति प्रेम व स्नेह को दर्शातीं हैं। प्रस्तुत है हिंदी कविता “माँ” जिसकी लेखिका हैं रीना कुमारी। हम बेटियाँ ओ मेरी माँ

हाय ये महंगाई – हिंदी कविता

जहां एक ओर इंसान शारीरिक रूप से कमजोर होता जा रहा है तो उसके उलट महंगाई और अधिक मजबूत होती जा रही है। इंसान की उम्र भले लंबी हो न होने परंतु महंगाई विगत कई वर्षों से लंबी होती जा रही है। पखेरू पर आज की कविता का शीर्षक “हाय ये महंगाई” इसी दशा

प्रदुषण – हिंदी कविता

मैं धर्मानुयायी, मेरा धर्म और मैं ही मेरे धर्म का रखवाला यहाँ पर हज और वहाँपर कुंभ…का मेला, मज्जिद, मंदिर और गिरीजाघरों…में अल्हाह, भगवान और ईसा-मसिह…का लाला ।। हिंदु, मुस्लिम, शिख, और ईसाई.. इन मस्त-मौलाओं की अपनी ही ईद-दिवाली ।। गणपती-अंबे के नाम टेपरेकार्डर ईद-मोहरम-क्रिसमस पर लाऊड़स्पिकर और शिवाजी-बाबा साहब के लिए बासरी वादन

कॉरपोरेट – हिंदी कविता

बड़ा हो या खुर्दा व्यापारी खटमल जैसा है। आदमी का खून चूँसना दोनो का समान धर्म है ।। कुच लोग ज्यादा वेतन लेकर कम लोग अधिक काम करकर गधे जैसा आदमी आखाड़े का पहलवान है ।। और सोने के भाव मिट्टी-बेचकर टैक्स चोरी के बाईपास बनाकर मल्या-मोदी जैसे पाकिटमारों की परदेस में, हाथ-सफाई की

तुम महफ़िल में कुछ कहते नहीं – हिंदी कविता

तुम महफ़िल में कुछ कहते नहीं और सुनते भी नहीं पर ऐसा नहीं है कि हमारे इशारों को समझते भी नहीं ये काले-काले मटमैले बादल उमड़ते हैं, बरसते नहीं जरा इनकी बेशर्मी तो देखो, अब तो ये गरजते भी नहीं बच्चों के हाथों में आ गईं जब से बाप की आस्तीन ये बच्चे इज़्ज़त

अनाम भीड़ के खतरे – हिंदी कविता

ये भीड़ कहाँ से आती है ये भीड़ कहाँ को जाती है जिसका कोई नाम नहीं है जिसकी कोई शक्ल नहीं है जिसको छूट मिली हुई है समाज, कानून के नियमों से जिसकी शिराओं में खून की जगह द्वेष की अग्नि बहती है। जिसके मस्तिष्क में भवानों के बजाय क्रोध भड़कती रहती है जिनकी

व्यथा- एक हिंदी कविता

यह कविता महज एक कविता नहीं बल्कि एक ऐसी महिला का दर्द है जो अभी भी मेरे आस पास के इलाके में रह रही है। कविताएं व कहानियां हमारे समाज का ही हिस्सा होती हैं जहाँ दर्द है, ख़ुशी है, ईर्ष्या है, नफरत है तो प्रेम भी है…! मेरी कविता का शीर्षक है –

उमड़ घुमड़ कर आते बादल, छम-छम कर बरसते बादल – हिंदी कविता

मानव जीवन पर प्रकृति का बहुत गहरा प्रभाव रहा है। अलग अलग ऋतुएं हमें आनंदित करने के साथ साथ हमारे जीवन पर अपना सकारात्मक प्रभाव भी छोड़तीं हैं। धरा पर बदलती ऋतुओं की व्याख्या कवियों नें कविताओं के माध्यम की है जो यह दर्शाती है की प्रकृति सच में हमारे जीवन के लिए बहुमूल्य