हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

प्रेरणादायी हिंदी कविता – एक नया आकाश बनाओ

यूँ तो ‘प्रेरणा’ केवल एक शब्द मात्र है, परन्तु जब इसे किस्से कहानियों व कविताओं में पिरोया जाता है तो वह हमारे जीवन ऊर्जान्वित कर देता है अर्थात वह एक प्रेरणादायी प्रसंग बन जाता है। मनुष्य जीवन एक युद्ध और संग्राम की भांति है जहाँ हम किसी भी कीमत पर पराजित होना नहीं चाहते

हिंदी कविता – “आँखें”

हिंदी कविता “आँखें” सिर से पाँव तक की गहराई, जान लेती उनकी आँखें दुनिया में बेमिसाल सी हैं, उनकी आँखें ! क्यों मिलापाता नहीं, ‘मैं’ उनसे अपनी आँखें खूबसूरती को भी और खूबसूरत बना देती हैं, उनकी आँखें कैसे मेरे हर विचार को भांप लेती हैं, उनकी आँखें शायद रातों को जागकर,बनाई होगी, उन्होनें

हिंदी कविता – “नशीली आँखें”

हिंदी कविता – नशीली आँखें दिल रूक जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही जमीन पाँव से निकल जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही ! मेरे होश उड़ जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही निगाहें घूम जाए, उनकी नशीली आँखें देखते ही ! आगे दिखाई कुछ न दे, उनकी नशीली आँखें देखते ही क्यों शरमा

हिंदी कविता “सफर” – जिन्दगी की कश्ती में सफर करता मैं न थका

हिंदी कविता “सफर” जिन्दगी की कश्ती में सफर करता मैं न थका मगरमच्छ ने नोचना तो चहा, मैं न रूका !! समुद्र की गहराई नाप ली दूर से खड़कर, किनारा मैं ना पा सका, भंवर आते जाते गए, मैं न फंसा ! जाल हमने भी डाला मछलीयों को, एक न एक दिन फंस जाएंगी,

पता – हिंदी कविता

बस थोड़ा ‘स, मोड़ आगे, उसकी गली, मेरी जिन्दगी में अहम, क्यों उसकी गली। मेरी सोच का हिस्सा बड़ा, उसकी गली, जुड़ी जिन्दगी की कहानी, उसकी गली। मेरे दुःखों में सकूँन लाए, उसकी गली, क्यों मन चाहे, रोज जाऊ, उसकी गली। बस थोड़ा ‘स, मोड़ आगे, उसकी गली, मेरी जिन्दगी में अहम, क्यों उसकी

चले जाएंगे – हिंदी कविता

अखिर वादे करके चले जाएंगे अब नहीं लौट के आएँगे। चले जाएंगे… छोटी सी तकरार कर चले जाएंगे मेरे ऊपर ‘बईमान’ का दाग लगा। चले जाएंगे… सांस के साथ सांस लेने वाले चले जाएंगे ‘संदीप’ रोग हिज्र का लगा। चले जाएंगे… छोड़ सात समुद्र से पार चले जाएंगे मेरे ‘पर’ काट, जख्मी कर। चले

तुम कम से कम उसे देख तो पाते हो ना?

तुम कम से कम उसे देख तो पाते हो ना उसे देख कर जी तो पाते हो ना तुम कम से कम उसे देखकर, महसूस कर तो पाते हो ना तुम कम से कम उसकी आंखों को पढ़ तो पाते हो ना तुम कम से कम उन आंखों को पढ़कर, दिल को संभाल तो

छत पर लेटे सुनाते सब अपनी कहानी – एक हिंदी कविता

ज़िंदगी की बढ़ती आपा-धापी, पारिवारिक विखंडन, अपनों से लगातार बढ़ती दूरी और पैसा कमाने की लालसा आज हमें अकेलेपन के दल दल में धकेल चुकी है। परिवार का हर सदस्य एकांत में जी रहा है, अगर खुशियां हैं भी तो केवल कृतिम रूप में हैं जो ज्यादा वक़्त तक हमारा साथ नहीं दे पातीं।

ग़ज़ल – क्यों गुज़र जाता है हर ख़ुशनुमां लम्हां

हम आधुनिकता के दौर में कितने भी आगे क्यों न चले जाएं अतीत हमेशा ही हमें अपनी ओर खींचने का प्रयास करता है। असल में अतीत वह अंकुर होता है जहाँ हम पनपते हैं और एक वृक्ष के समान बड़े हो जाते हैं, अतीत का वह अंकुर हमारी जड़ें हैं जो अगर ना होती

हिंदी गीत – मैं शराबी नहीं

मैं शराबी नहीं , मैं शराबी नहीं मगर थोड़ी पी लेने में , खराबी नहीं मैं शराबी नहीं । कैसे भूलूँगा मैं उनकी प्यारी बातें वो होंटों के सुर्ख , वो नशीली आँखें हाल-ए दिल क्या है , उनको पता भी नहीं मैं शराबी नहीं ।। सितमगर नें मुझको , सताया है इतना हंसा