हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

हिंदी गीत – सितारों अब तो सो जाओ, रात ढलने वाली है

इंसान जब बंद आँखों से सोता है तब वह सपने देखता है, पर जब खुली आँखों से सोता है तब वह सपनों को जीता है। कितना सुखदाई होता है टिम-टिमाते सितारों, उनकी चमक और काले अंधेरों से भरे आस्मां को अकेले देखना। ऐसे में किसी की याद ना आए ये मुनासिब कहाँ, नीचे लिखी

हिंदी प्रेम गीत – हम तुम जैसे पतंग और डोर

हम तुम जैसे पतंग और डोर संग संग साथ उड़ेंगे नील गगन में सबसे ऊपर दिल से दिल की बात करेंगे ।। कुछ तुम कहना, कुछ मैं कहूँगी तेरी बाँहों में लिपटी रहूंगी कोई न होगा पास हमारे दिल के सब जज़्बात कहेंगे ।। कभी न टूटे, ये प्रीत को डोर तू आकाश मैं तेरा

हिंदी कविता – दुनियां

कभी कभी लेखक अपने मन की बात भी कविता के माध्यम से बयां करते हैं। इसी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए पखेरू के लेखक संदीप कुमार नर नें अपने मन व विचारों में आने वाली बातों को एक छोटी से कविता में पिरोया है “वह गाता और लिखता है” पढ़िए पखेरू पर। वह गाता

एंजल की तमन्ना है की, पतंग मेरी उड़ जाए – हिंदी कविता

दोस्तों इस कविता का सृजन मैंने अपनी बेटी के साथ पतंगबाजी का लुफ्त लेते समय किया है। मैं और मेरी 5 वर्ष 8 माह की बेटी “एंजल” जो इस समय KG कक्षा की छात्रा है, आज सर्दियों की छुट्टी का आनंद उठा रहे थे। एंजल की तमन्ना है की, पतंग मेरी उड़जाए, बादलों के

देखो नव संवत्सर है आया – हिन्दी कविता

देखो नव संवत्सर है आया, देखो नव संवत्सर है आया। अपने संग ये कई फुहारें कुहरे की है लाया।। बच्चे खुश हैं, देख धुंध कुहरे की ये कैसी ? पत्नी बोली ये धुंध नही, ये है सुगंध कुहरे की। आपस में यूँ बाते करते जब आवाज़ है आई मैंने भी बिस्तर पर नीचे से

नव वर्ष हिंदी कविता – न हम बदले न जग बदला

नव वर्ष के आगमन को लेकर हम सभी कितने उत्साहित रहते हैं। हमारे मन में अनेक प्रकार के ख़याल आते हैं, अनेक प्रकार की योजनाओं का सृजन भी हम अपने मन में करते हैं परन्तु हर बार की तरह हमारी योजनाएं अधूरी ही रह जातीं हैं और फिर अगला वर्ष दस्तक दे बैठता है।

मैं खुशनसीब – हिंदी कविता

कोई मुझे यहाँ आने को कहता है , वो मुझे वहाँ ले जाने को कहता है , अगर कोई उनके पास ले जाएँ तो , मैं खुशनसीब ।। कभी मुझे से ये बात करना चाहता है , कभी मुझे से वो बात करना चाहता है , अगर मेरी उनसे बात हो जाएँ तो ,

बीत गया वो वक़्त, गुजरा गया और अब तक नहीं लौटा – हिंदी कविता

कहते हैं की गुजरा वक़्त कभी लौटकर नहीं आता, आज यह बात सच्ची मालूम पड़ती है। मनुष्य आज कितना आज़ाद है संपन्न है फिर भी वो अपने आपको इस आज़ादी में जकड़ा हुआ ही मसहूस करता है। असल में आज़ादी हमारी मानसिकता से जुड़ा हुआ एक विषय है पर हम उसे अपने व्यव्हार में

काश इस जीवन की फिर शुरुआत हो जाए – हिंदी कविता

बचपना कुछ ऐसा होता है कि हम बूढ़े होकर भी उसे भुला नहीं पाते। हम सभी का बचपन तमाम किस्से व् कहानियों से भरा होता है जिसे हम जीवन के हर मोड़ पर याद किया करते हैं। बेशक बढ़ती उम्र हमारे बचपने को ढकती चली जाती है पर फिर भी कहीं न कहीं दिल

कौन हूँ मैं क्या जानूँ , कैसे खुद को पहचानूँ

हमारा जीवन सच में कितना गहरा है , क्या हम खुद को भली भाँति जानते हैं। जीवन में ऐसे कई मोड़ आते हैं जहाँ मनुष्य कुछ पल के लिए स्वयं में ही विलीन हो जाता है। ऐसी अवस्था में जाकर हम स्वयं से ही प्रश्न पूछ बैठते हैं कि आखिर कौन हैं हम। नीचे