हिंदी कविताएँ Hindi Kavita Archive

हम वो भवँरे नहीं – हिंदी कविता

हम वो भवँरे नहीं, जो हर फूल पर बैठते हैं।। हम वो आदमी नहीं, जो हर बात बदलते हैं ।। हम वो हमराज नहीं, जो हर राज खोलते है।। हम वो आम नहीं, जो हर बात पर बोलते हैं ।। हम वो दीप नहीं, जो हर राह पर जलते हैं ।। हम वो दीवाने

एक मुलाकात की तो बात है – ग़ज़ल

“वक्त आएगा ऐसा, आमना सामना होगा तेरा-मेरा, तू उत्तर देगा, मैं सवाल करूँगा, मैं उत्तर दूंगा, तू सवाल करेंगा, क्या खबर इस जंग में, शायद दोनों जीत जाएँ “ एक मुलाकात की तो बात है, चाँद चढ़कर भी दिखाई न देगा !! बिखरे हूए सितारों का हार बन जाऊँगा, खामोश ये विया-बान किसी के

हिंदी कविता – ‘दास्तान’

  मेरे दिल से मेरा हाथ मत उठाना नीचे जख्म है, मेरे दिल की दास्तान न सुनना मेरे दिल में दर्द है !! हंसती हैं दुनिया मुझे चिड़चिड़ने के लिए, पास बुलाते हैं मुझे उसे भूलने के लिए, बिठाते है मुझे उसे भूल जाने के लिए, समझाते है मुझे मेरा दिल लगाने के लिए,

एहसास – हिंदी कविता

तेरी खूबसूरत आँखें मेरी और हो गई, देखता था कहीं और, निगाहें तेरी और हो गई, चाहता था आत्मा से शायद, जन्मों से चली प्यास धिमी हो गई, होना चाहिए था पहले जो, उसके मुस्कुराने से मेरी तड़प तेज हो गई। मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना; हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा

जहाँ सबकुछ पैसा ही है – हिंदी कविता

जहाँ सबकुछ पैसा ही है। कितनी सच्ची लगती है ये बात; मौजूदा दौर पैसों का है तभी तो कहा जाता है – न बाप बड़ा न भईया सबसे बड़ा रुपईया। निचे लिखी कविता समाज के असल चेहरे को चरित्रार्थ करती है। पैसे का बढ़ता बोलबाला व्यक्तिगत संबंधों में दरार पैदा करता जा रहा।  

मुद्दतों बाद तुम फिर याद आयी – हिंदी गीत

क्या पहला प्यार भुलाया जा सकता है ? शायद नहीं। इश्क़ एक ऐसा मर्ज़ है जिसमें जिया भी नहीं जा सकता और मरा भी नहीं जा सकता। सच तो यह भी है कि कामयाब मोहब्बत की कोई कहानी नहीं बनती; कहानी तो बनती है नाकामयाब मोहब्बत की। इतिहास में दर्ज़ ऐसी तमाम इश्क़े दास्ताँ

बूढ़ा बचपन – हिंदी कविता

देश में बढ़ता पूंजीवाद आज हमें इसकदर मजबूर कर चुका है कि हम घर, गाँव अथवा अपने समाज से लगातार दूऱ होते जा रहे हैं। पैसा जीवन का अभिन्न अंग बन गया है जिसको पाने की होड़ सबमें है। माता-पिता की बढ़ती व्यस्थता और बड़े बुजुर्गों से दूर होते बच्चे एक तरह के मानसिक

किसान एक हिंदी कविता

सरकारें बदलतीं हैं पर किसान की स्थिति नहीं बदलती। आज़ादी से लेकर आज तक किसानों को क्या मिला सिर्फ वादे, आश्वासन, भरोसा, दिलासा और कभी न पूरी होने वाली योजनाएं। देश कितना तरक्की कर गया, एक शराबी बिज़नेस मैन बन गया। अजी चिप्स बेचकर लोगों नें फैक्टरियां खड़ी कर ली, पर अनाज उगाने वाला

21वीं सदी है सबकुछ बदल रहा है

21वीं सदी है सबकुछ बदल रहा है। सच बात है, सबकुछ कितना आधुनिक होता जा रहा है। तकनीकि से भरी इस दुनियां नें सभी को कितना दूर कर दिया है , मोबाइल फ़ोन , ईमेल , फेसबुक एवं व्हाट्सएप्प इत्यादि कहने को तो सोशल नेटवर्क हैं पर इनमें वो बात कहाँ जो इंसान के

उनसे आखरी मुलाक़ात याद है मुझे

कुछ पल ज़िन्दगी के ऐसे होते हैं जो हमें हमेशा याद आते हैं; उन्हीं पलों में से एक है मोहब्बत । यह जीवन का वह पड़ाव है जहाँ से हर एक जवां दिल को गुजरना पड़ता है अमूमन तौर पर सभी का प्यार मुकम्मल नहीं होता । बेशक यह मुकम्मल न सही पर फिर