एंजल की तमन्ना है की, पतंग मेरी उड़ जाए – हिंदी कविता

दोस्तों इस कविता का सृजन मैंने अपनी बेटी के साथ पतंगबाजी का लुफ्त लेते समय किया है। मैं और मेरी 5 वर्ष 8 माह की बेटी “एंजल” जो इस समय KG कक्षा की छात्रा है, आज सर्दियों की छुट्टी का आनंद उठा रहे थे।

तमन्ना है की पतंग मेरी उड़जाए मनोज मिश्र की हिंदी कविता

एंजल की तमन्ना है की, पतंग मेरी उड़जाए,
बादलों के पास जाए, बातें उनसे कर आए।

एंजल की तम्मन्ना है की, पतंग मेरी उड़जाए,
आशमा में दूर जाके,
A, B, C, D पढ़ आये।

मैडम मेरी, दौड़ी आयें, फिर मुझे समझायें,
E, F, G,H छोंड आई,
उसे भी पतंग संग, ले जायें….।

एंजल की तम्मन्ना है की, पतंग मेरी उड़जाए,
आशमा में दूर जाके,
E, F,G, H पढ़ आए।

मम्मी मेरी, दौड़ी आयें, फिर मुझे समझायें,
I, J, K, L भूलआई,
इन्हें भी तो ले जाये।

एंजल की तम्मन्ना है की, पतंग मेरी उड़ जाए,
आशमा में दूर जाके,
I, J, K, L पढ़आये।

पापा, मेरे दौड़े आये, फिर मुझे समझाए,
पतंग तो, पहले ही आशमा के बीच जा चुकी,
किसी की मदभरी बातों में खो चुकी।

बेटा मेरे, भूल आई
M, N, O, P तुम कहाँ,
इन्हें भी, तो लेकर जाओ, आशमा में, तुम वहाँ।

एंजल की तम्मन्ना है की, पतंग मेरी उड़ जाए,
आशमा में दूर जाके,
M, N, O, P पढ़ आये।

नानी मेरी, दौड़ी आयें, फिर मुझे समझायें,
Q, R, S, T भूल आई,
इन्हें भी तो ले जाये।

एंजल की तम्मन्ना है की, पतंग मेरी उड़जाए,
आशमा में दूर जाके,
Q, R, S, T पढ़ आये।

नाना, मेरे दौड़े आये, फिर मुझे समझाए,
पतंग तो, पहले ही बादलों के बीच जा चुकी,
किसी की मदभरी बातों में खो चुकी।

बेटा मेरे, भूल आई
U, V, W, X, Y, Z तुम कहाँ,
इन्हें भी, तो लेकर जाओ, बादलों में, तुम वहाँ।

एंजल की तम्मन्ना है की, पतंग मेरी उड़जाए,
बादलों में दूर जाके,
U, V, W, X, Y, Z पढ़आये।

एंजल की तमन्ना है की, पतंग मेरी उड़ जाए,
बादलों के पास जाए, बातें उनसे कर आये।
एंजल की तमन्ना है की, पतंग मेरी उड़ जाए,
बादलों के पास जाए, बातें उनसे कर आये।

लेखक:
मनोज मिश्र