हिंदी कविता – ताकत

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हिंदी कविता – ताकत

Taqat-Hindi-Kavita

समुन्दर का नापना ,
सच्चे संतों की परीक्षा ।
आसमानों को जानना ,
आग , पानी के भेद का ।
रोहानी तकतों के आगे ,
खुद को ऊँचा देखना ।

इस धरती पर ,
ईश्वर के घरों को उल्लेखना ।
फिर भी तूने किसी रूप में ,
उस ईश्वर को ही माथा टेकना ।
बेबसी से स्वार्थ निकालना ,
भुलेखा है ये तेरा ।

मित्थ नहीं पुगाते वो ,
विद्वान असली वहीं है ।
जो पानी का भी मुख मोड़ दें ,
समुद्रों को भी पूरी तरह निचोड़ दें ।
चक्कर घुमते है युगों के ,
इच्छा उनकी के साथ ।

क्यों दोषी कहूँ तुझे मैं ,
समझ तेरी में ,
यह सब क्यों हारे ।
तू क्यों रोता ए ,
लेकर आपने सफ़र को ।
सदियाँ बीत जाऐं उनकी ,
तपती आग के पास बैठ ,
एक धुने के सहारे ।

ये शब्द भी बेजान हैं ,
क्या – क्या बताँऊ उनके बारे ।
पक्के वचन पुगा जाते है ,
भूत – भविष्य सब कुछ दिखा जाते हैं ।
पता नहीं मेरे पी र, पैगम्बर, कितनों के धरती में ,
यह ईश्वर जैसे , रूप बस्ते हैं ।

सच जानना इनके घर ,
यहाँ स्वर्ग जैसे लगते हैं ।
है बसेरा धरती पर, ईश्वर का ,
यह सब प्रमाण , पक्के बताते हैं ।
भूल न तू अपने ऋषि , वेद पुराणों को ,
इस देश को भारत महान कहते हैं ।

जहाँ बसते हैं ऋषि , सलाम करते कुरानों को ,
सन्दीप तू भी सीख ले गुरू सहबानों के पास से ।
मिल – जुल कर रहना , अपनाना संस्कारों को ,
धर्म करके दो देश मिले हैं , भूल जाओ तकरारों को ।
खुल गया अब करतारपुर रास्ता (कॉरिडोर) ,
प्यार सिखा दो , अब दोनों देशों के राजनीतीकारों को ।

लेखक:
संदीप कुमार नर


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