हिंदी कविता – उदास आँखें

जीवन के सभी रंगों को समेटे हमेशा ही कुछ आंखे उदास सी रह जाती हैं। चेहरे पर हर भाव होता है उनके, पर जीवनधारा में बहते हुए, कभी कुछ ना कहते हुए एक ही प्रकार की उदास आंखों को आपने भी तो देखा होगा। अपने सपनों को सजाते हुए, आंखों से नहीं सिर्फ होंटो से मुस्कुराते हुए देखा ही होगा…आइये इन आंखों को भी पढ़ते हैं।

हिंदी कविता – उदास आँखें

Udas-Ankhein-Hindi-Kavita

ढूंढ़ती रहती टकटकी लगाए कुछ तो जहानों में
देखी है मैंने ऐसी कुछ उदास आँखें
घरों में और बाहर भी,
राह चलते और बाज़ार में,
चौक और चौराहों पर,
खोयी और चुपचाप सी,
भीड़ में कुछ तन्हा सी,
मन के सागर में गोते लगाती
डूबती उबरती ऐसी कुछ उदास आँखें ।

होती हैं अलग अलग चेहरे लिए
भिन्न भिन्न भावों के साथ
पर दिखती हैं हमेशा एक सी,
कुछ नीली,भूरी और काली भी
पर दिखती हैं हमेशा बेरंग सी
कुछ वक़्त लगा ही होगा सब रंगो को मिटाने में
तब जाकर बन पायीं हैं ऐसी कुछ उदास आँखें ।

कभी दफ्तर जाते काँधे पर सामान लिए
कभी घरों में चूड़ियों वाले हाथ लिए,
खेतो में गर्मी में तन को जलाते हुए,
कभी सिर पर ईटों का पहाड़ उठाते हुए,
थकती, उंघती मगर बर्बस ही ताकती रहती
हरदम ही पाषाण बनी सी कुछ उदास आँखें ।

आँखों के नीचे तनाव का काला सा घेरा लिए
इन चेहरों पर मुस्कुराहटें भी सजती हैं
सपनों का इनके ठिकाना नहीं,
पर अपनों संग ठहाके भी लगते हैं
समेट लेना चाहती हैं सभी जीवन के रंगो को
सब कुछ ही तो छुपा लेना चाहती हैं इनमें
ये आँखे खुद को भी हँसाना चाहती हैं
पर ना जाने क्यों कभी बदल नहीं पाती हैं ।

और रह जाती हैं बिल्कुल वैसी सी, एक रात सी
चुपचाप और वीरान सी ऐसी कुछ उदास आँखें ।

लेखिका:
रचना शर्मा

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