हिंदी कविता – उम्मीद

Ummid-Hindi-Poem-Kavita

ये नकली दुनिया के,
फसादों – विवादों को,
छोड़, नदियाँ से पार,
अंबरों के साथ,
मैं खुशी-खुशी सी हँसता हँसता,
चला जाऊँगा,
आऐगा मेरा वक्त,
एक दिन !

जब हड्डियाँ मेरे में से,
सतलुज, जेहलम, रावी, ब्यास,
जा गंगा के पानियों में से,
गुज़र कर शिव की,
पहाड़ियों में से,
सावन के शराट्यों में से,
कुदरत के अपनों में से,
हाथ पकड़ कर मेरा,
ठंडा ठंडा कर कर देंगे,
आऐगा मेरा वकत
एक दिन !

पहाड़ों को देखता,
ईश्वर के चिह्न को माथा टेकता,
पवन के झरोखों में से,
बदलों के भ्रम में से,
उसे मिलने की इच्छा लेकर,
मैं चला जाऊँगा,
आऐगा मेरा वक्त,
एक दिन !

नीले आकाश में,
हवा की आवाज़ सुनता जाऊँगा,
सतरंगी सुरों के साथ,
गीत गाता जाऊँगा,
खुशी ख़ुशी के साथ खुआबा में,
हरमोनियम बजाऊँगा,
आऐगा मेरा वक्त,
एक दिन !

झूठे कसमों वादों से,
लोगों के नकली दिखावों से,
कुछ झूठे लोग बेईमानें से,
तंग आया हलातें से,
यह नकली जैसे होंसलों से,
किनारा कर जाऊँगा,
आऐगा मेरा वक्त
एक दिन !

उड़ते पक्षियों से ऊँची,
किसी का सहारा न माँगूगा,
मैं बेसहारा बनकर नाचूंगा,
ग़ुलामी की जेलों से
मै आज़ाद होकर,
अपने पर ही हँस लूँगा ,
आऐगा मेरा वक्त,
एक दिन !

ये तूफ़ान भी रुक जाएगा,
यह सैलाब भी रुक जाएगा,
यह वक्त भी कदर करोगा मेरी,
जब मुशकिलें पार कर जाऊँगा,
पूरा नहीं, अधूरें ही सहीं,
कुछ तो बदल जाऊँगा,
आऐगा मेरा वक्त,
एक दिन !

वक्त को लगाम लगाना, सीख जाऊँगा,
रुक जाऊँगा, खतरें देखकर,
आगे जाने से पहले
आऐगा मेरा वक्त,
एक दिन !

ड़ंक चलते, कुछ नाग़ा में रहकर,
ज़हर सह पाऊंगा,
आऐगा मेरा वक्त,
एक दिन !

उनकी झलक तड़पा देता थी मुझे,
कभी तो आग के साथ खेल पाऊंगा,
आकर बैठ जाएगा, कोई भेजा ईश्वर का बंदा,
आहसान उस का मनूं जा ईश्वर का,
आऐगा मेरा वक्त,
एक दिन !

लेखक:
संदीप कुमार नर