व्यथा- एक हिंदी कविता

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यह कविता महज एक कविता नहीं बल्कि एक ऐसी महिला का दर्द है जो अभी भी मेरे आस पास के इलाके में रह रही है। कविताएं व कहानियां हमारे समाज का ही हिस्सा होती हैं जहाँ दर्द है, ख़ुशी है, ईर्ष्या है, नफरत है तो प्रेम भी है…! मेरी कविता का शीर्षक है – “व्यथा” जो एक स्त्री के मनोभावों को प्रकट करती है।



Vyatha-Ek-Hindi-Kavita हिंदी कविता व्यथा स्त्री की

“व्यथा”
दुःखी मन के चलते
रहना चाहती हूँ मैं मौन
है इसका जिम्मेदार कौन ?

देख पंछी आसमां के, मैं उड़ जाऊँ
इस संसार से कहीं दूर जाऊँ
संसार देख होती विरक्त
पुनः देख होती असक्त
दुःखी होती क्यों हर वक्त
बहे क्यों मेरे मर्म का रक्त

मौन थी, न मौन हूँ , मौन चाहती हूँ मैं
क्यूं खींच दे कोई लकीर
मैं नहीं किसी की जागीर

आँखें हैं पर अश्रुबिन
हो आसमां जैसै तारे बिन
राहें भी हैं पथहिन
रहती हूँ दुःखो में लीन

है आस यही
काश….कोई
एक ऐसा भँवर आए
जिन्दगी सँवर जाए !!




लेखिका:
अंकिता राजपुरोहित


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