एमएलएम मार्केटिंग डायरेक्ट सेलिंग का गोरखधंधा

एमएलएम मार्केटिंग हिंदी में जानिए

एमएलएम मार्केटिंग, डायरेक्ट मार्केटिंग, डायरेक्ट सेलिंग, चैन मार्केटिंग, नेटवर्क मार्केटिंग फ़िलहाल तो मुझे यही 5 नाम याद आ रहे हैं, क्या पता शायद और भी कई नाम हो इस गोरखधंधे का। मैं बात कर रहा हूँ भारत में बड़े पैमाने पर व्याप्त MLMSDirect Selling की, जिसे कई नामों से जाना जाता है।

मुझे सन 1998 में पहली बार ‘Amway‘ के बारे में पता चला था। उस ज़माने में मैं 10वीं कक्षा की पढाई कर रहा था, यूँ ही यार दोस्तों की मंडली से मुझे Amway नामक एक डायरेक्ट सेलिंग कंपनी के बारे में पता चला। तबसे लेकर आज सन 2020 आने तक भारत में न जाने कितनी Direct Selling कंपनियां बन रही हैं और मिट रही हैं।

मेरा यह लेख इस पूरे नेटवर्क मार्केटिंग के जाल के विरोध में है न की किसी कंपनी के।
मैं यह भी जनता हूँ की भारत सरकार ने Network Marketing को पूरी तरह लीगल कर दिया है पर फिर भी इस काम के प्रति लोगों में भय के सिवा कुछ भी नहीं। लगभग 23 साल से भारत में चल रहा डायरेक्ट सेलिंग का व्यापार 2 दशक बीत जाने के बाद भी लोगों का विश्वास हासिल नहीं कर पाया। इन गोरखधंधों के मालिकों से यह सवाल तो पूछा ही जाना चाहिए की दो दशक के बाद भी लोग आपसे दूरी क्यों बना रहे हैं ? क्यों कोई Mlms का नाम सुनते ही उल्टे पांव भागता है ? क्यों कोई गाली देने पर उतारू हो जाता है ? मेरे इस सवाल का जवाब भारत में व्याप्त कोई भी डायरेक्ट सेलिंग कंपनी नहीं दे पायेगी। चलिए आज इस विषय का पूरा पोस्टमॉर्टम करते हैं।

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1 – लालच (Greed):

यह व्यापार लालच से ही शुरू होता है और लालच पर ही जाकर खत्म हो जाता है।
इस व्यापार की आधारशिला केवल लालच पर ही टिकी है अतः इसमें जो भी व्यक्ति आपको मिलेगा वह मात्र पैसे रुपये के अलावा दूसरी कोई बात करता नज़र नहीं आने वाला।

2 – झूठी प्रेरणा (False Motivation):

व्यक्ति की क्षमता को नज़रअंदाज़ कर उससे अपना निजी लाभ साधने के लिए उकसाना।
प्रेरणा के असल मायने को झुठलाकर उसे व्यापार का रूप दे दिया है इन नेटवर्क मार्केटिंग के दलालों ने। इनके अनुसार मोटिवेटेड इंसान वही है जो पैसा कमा रहा है, और जो पैसा नहीं कमा रहा वो मोटिवेटेड है ही नहीं।

3 – आत्मनिर्भरता का जाल (Trap):

व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने का झांसा देकर जल्द से जल्द उसे बिज़नेस में जोड़ लेने की महत्वकांक्षा।
ये दसवीं में पढ़ने वाले लड़के को भी डायरेक्ट मार्केटिंग में जोड़कर आत्मनिर्भर बनने का ज्ञान देने लगते हैं। आप आत्मनिर्भर किस काम को करके बनना चाहते हैं उससे इनको कोई लेना देना नहीं। इनके हिसाब से आप केवल नेटवर्क मार्केटिंग करके ही आत्मनिर्भर बनें तो बेहतर।

4 – अपवाद बातों पर जोर (Exception):

लाखों करोड़ों में से गिनती के एक-दो सफल लोगों के किस्से सुनाकर आपको हक़ीक़त से दूर ले जाना।
मुंगेरी लाल ठेले पर गुड़ बेचता था आज उसका महीना 24 लाख का चेक आता है। कान्ता बाई सोसाइटी में बर्तन मांजती थी आज नेटवर्क मार्केटिंग करके करोड़ों की मालकिन है। अरे जब ये लोग कर सकते हैं तो आप क्यों नहीं कर सकते। जबकि कई हजार, कई लाख लोगों की बर्बादी पर ये अपना मुँह नहीं खोलते।

5 – पैसे व समय की आज़ादी का फ़रेब (Freedom):

ऑफिस जाने वाले व्यक्ति को ये ऑफिस का ग़ुलाम कहने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
आप हमारे साथ जुड़कर आज़ादी से जी सकते हैं, जितना मर्जी उतना कमा सकते हैं इस तरह की बातें ये समझाते हैं। क्या वाकई इतनी आज़ादी है एमएलएम मार्केटिंग में ! सच कहूं तो अपने ऑफिस से भी ज्यादा व्यस्त हो जायेंगे आप और महीने के अंत में आपको क्या मिलेगा उसकी चिंता भी सताने लगेगी।

6 – पैसा जमा करना (Deposit):

15000 अगर आप जमा करेंगे तो हम आपको 15000 का सामान दे देंगे।
क्या ये सच में 15000 देने पर कुल पंद्रह हज़ार की वैल्यू का सामान देते हैं ! क्या सच में उसमें इन्होंने कुछ कमाया ही नहीं, अगर नहीं तो फिर पंद्रह हज़ार लिया ही क्यों ? असल में ये आपसे पैसे लेकर खुद को सिक्योर कर लेते हैं और आपको अन-सिक्योर बना देते हैं। इनका सामान आपके द्वारा दिए गए कुल पैसे की वैल्यू के बराबर भी नहीं होता।

7 – हर आदमी का एक ही काम (Same Work):

माल बेचो, मेंबर बनाओ और कमीशन खाओ शुरू से अंत तक आपका यही एक काम बनकर रह जाता है।
आप एक साल कर लें, दो साल कर लें या दस साल कर लें आपका काम बस यही है दूसरों को माल बेचना मेंबर बनाना और उनसे प्राप्त कमीशन से अपना घर चलाना। अतः आपका जीवन केवल मुर्गा पकड़ने में निकलने लगता है।

8 – दूसरों की सफलता पर टिकी आमदनी (Others’ Success):

एक के नीचे 2, दो के नीचे 4, चार के नीचे 8 बस ऐसे ही आप हो जायेंगे मालामाल।
आपको अगर दो लोग नहीं मिले तो हम आपको लाकर देंगे बस आप मेंबर बन जाइये। एमएलएम मार्केटिंग से जुड़े व्यक्ति को सड़क पर चलने वाला हर आदमी मेंबर बनने के लायक दिखाई देता है। यहाँ पर आपकी सफलता आपके गुण पर नहीं, आपकी योग्यता पर नहीं, आपकी क़ाबलियत के बल पर नहीं अपितु सामने वाले को मेंबर बनाने और माल बेचने पर टिकी होती है। आपकी आय का जरिया है कमीशन, न कि तनख्वा।

9 – प्रतिस्पर्धा और अंत (Competition):

अंततः अपने ही लोगों से प्रतिस्पर्धा लेते-लेते आपका दुःखद अंत हो जाता है।
माल बेचो, मेंबर बनाओ और कमीशन खाओ की पॉलिसी ज्यादा देर टिक नहीं पाती क्योंकि आपको अपने ही कार्यकर्ताओं से प्रतिस्पर्धा मिलने लगती है। एक हफ्ता जोर लगाकर आपने रवि बाबू को प्लान समझाया बाद में उनको जोड़ ले गए मुरारी बाबू। इस काम में बेचो और खाओ के अलावा अन्य कोई वर्क स्कोप है ही नहीं।

ऊपर लिखे आपने कुल 9 पॉइंट पढ़ लिए होंगे, क्या लगता है मैंने कुछ गलत लिखा है उसमें ! शायद मेरी बातें Direct Selling से जुड़े लोगों को हज़म ना हों या फिर उन कंपनियों को हज़म ना हों जो इस गोरखधंधे को बड़ी सफलता पूर्वक चलाकर पैसा बना रही हैं एवं लाखों लोगों को उनके जीवन में असफल बनाती जा रही हैं चंद अपवादों के सिवाय।

मैंने जहाँ तक देखा व समझा है, MLM Marketing में सबसे बड़ा फायदा कंपनी एवं उससे जुड़े टॉप मैनेजमेंट को ही मिल पाता है। कुछ थोड़ा बहुत जीने लायक फायदा बीच के वर्ग को मिलता है और अंत में सबसे नीचे आने वाला मेंबर वर्ग हाथ मलता रह जाता है। गज़ब की बात ये है की मल्टी लेवल मार्केटिंग को बढ़ावा देने वाली कंपनियां मेंबर की असफलता का ठीकरा मेंबर पर ही फोड़कर गायब हो जाती हैं। इस पूरे गोरखधंधे में कहीं कोई लिखित वादा नहीं होता सिर्फ जुबानी खेल से सारा माजरा समझाया जाता है।

मार्केटिंग कंपनी यह अच्छे से जानती है की मेंबर बनने वालों में से करीब 90% लोग सदस्यता लेने के बाद ही भाग जायेंगे। उसका कारण यह होता है की मेंबर कोई अपने मन से बनने नहीं आता बल्कि यारी दोस्ती, चाचा भतीजा, जीजा साला, गुरु शिक्षक, ऑफिस कर्मी एवं कर्मचारी इत्यादि के आपसी रिलेशन को निभाने के लिए लोग मान जाते हैं। आप समझ नहीं सकते कंपनियों को इससे कितना फायदा हो रहा है, जरा सोचिये; आपने पैसा दिया और आप ही गायब हो गए।

मान लीजिये किसी मार्केटिंग कंपनी ने 1 महीने में पूरे देशभर से 1 लाख मेंबर बनाये –
उसमें से सदस्यता लेने के बाद कुल 90% मेंबर हमेशा के लिए गायब हो गए क्योंकि वे अपने किसी करीबी के दबाव में कंपनी से जुड़े थे न की अपनी इच्छा से।

मेंबर बनाने की फीस 15000 है तो ?
= 90,000 गुणे 15,000
= 1,350,000,000
अतः एक अरब पैंतीस करोड़ रुपया उनसे ही आ गया जो सदस्यता लेने के बाद ही चले गए।

कुल 1 लाख लोगों को लेकर देखें तो ?
= 100,000 गुणे 15,000
= 1,500,000,000
एक अरब पचास करोड़ रुपए।

आप सोच रहे होंगे कंपनी ने उनको सामान भी तो दिया। हां दिया पर कितनी वैल्यू का सामान दिया कोई नहीं जानता बस आप उसपर प्रिंटिंग कॉस्ट पढ़कर खुश हो सकते हैं की कंपनी द्वारा दिया गया सामान पूरे 15000 की वैल्यू का है या उससे ज्यादा का है। पर ऐसा सच में होता नहीं है, कंपनी जो भी आपको सामान देती है उसमें भी वो प्रॉफिट कमाती है।

मान लिया कंपनी ने आपसे 15000 रुपये लेकर आपको केवल 12000 रुपये की वैल्यू का सामान दिया।
ऐसे में कंपनी ने प्रति मेंबर कुल 3000 रुपये कमाए।
अतः 1 लाख लोगों से कुल कमाई हो गयी –
= 100,000 गुणे 3000
= 300,000,000
अर्थात, तीस करोड़ रुपये।

Multi Level Marketing में कूदने वाली कंपनियां आपके उज्जवल भविष्य के लिए नहीं आ रही बल्कि अपने उज्जवल भविष्य के लिए आ रही हैं। यहाँ पर पैसा कंपनी को डायरेक्ट कैश के रूप में आ रहा है केवल लोगों को चैनलाइज़ करके।

अब बात करते हैं Product की,

भारत में जितनी भी एमएलएम मार्केटिंग कंपनी हैं उनका कोई न कोई उत्पाद भी है। कोई शिक्षा के उत्पाद से जुड़ा है, कोई कपड़े परिधान से, तो कोई घरेलु सामान से। आजकल ज्यादातर घरेलु सामान – कॉस्मेटिक, हेल्थ सप्लीमेंट, ग्रॉसरी, किचन, बाथरूम आदि से जुड़े उत्पादों को मानक बनाकर कपनियां अपना-अपना प्लान लॉन्च कर रही हैं। देश में जितनी भी Direct Marketing से जुड़ी कंपनियां हैं वो अपने-अपने प्रोडक्ट को सबसे बेहतर बताती हैं। तो फिर प्रोडक्ट ख़राब किसका है ? और सभी अपने प्रोडक्ट को किफायती होने का दवा भी करती हैं।

FMCG से जुड़ी हम जितनी भी कंपनी देखते हैं वे सभी कंपनियां प्रोडक्ट का उत्पादन नहीं कर रही, बल्कि वे बड़े-बड़े मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से केवल अपने नाम की लेबलिंग कराकर माल बाजार में उतार रही हैं। डायरेक्ट सेलिंग से जुड़ा व्यापार करने वाली कंपनी का भी हाल ऐसा ही है, किसी के पास अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं है, वे सिर्फ दूसरे के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से माल उठाकर उनपर अपना लेबल लगा रहीं हैं।

अपनी निर्माण यूनिट ना होने से इन कंपनियों की प्रोडक्ट कॉस्टिंग बहुत बच जाती है। दूसरी ओर कंपनी जब किसी अन्य मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से अपनी शर्तों पर अपना उत्पाद बनवाती है तो उसकी क्वॉलिटी को कुछ हद तक कमजोर रखकर कॉस्टिंग को ज्यादा नीचे करने का प्रयत्न करती है। क्वॉलिटी कमजोर करने का अर्थ ये नहीं होता है की वह उत्पाद कंस्यूमर को नुक्सान पहुंचायेगा। बस कंपनी का लक्ष्य केवल यहाँ पैसा बचाने का ही होता है।

अब बात करते हैं Marketing की,

इस तरह की कंपनियां अपने उत्पाद का प्रचार टीवी, रेडियो, प्रिंट मीडिया, या फिर स्ट्रीट होर्डिंग की मदद से नहीं करती और ना ही किसी बड़ी शख्सियत का सहारा लेती हैं। इनका पूरा फोकस डायरेक्ट कंस्यूमर के बीच जाकर अपना उत्पाद बेचने का होता है। अतः यहाँ भी इनका करोड़ों रुपये का मार्केटिंग खर्च बच जाता है। फिर जो इनकी सदस्यता ग्रहण करता है वो घर-घर जाकर इनके उत्पाद का प्रचार कर ही डालता है।

सीधे तरीके समझें तो ‘कंस्यूमर ही इनका प्रचारक है और प्रचारक ही कंस्यूमर है‘ । इसे ही कहते हैं “हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा“, मैं इसीलिए कह रहा हूँ एमएलएम में सारी मलाई कंपनी चाट डालती है। मेंबर को तो पेंदी में जमी मलाई को खंरोच के खाना पड़ता है।

क्यों सबके लिए नहीं है एमएलएम मार्केटिंग ?

मैंने पहले ही कहा है कि यहाँ केवल एक ही काम है “माल बेचो, मेंबर बनाओ और कमीशन खाओ“; इस प्रकार का कार्य हर कोई नहीं कर सकता क्योंकि यह अप्रत्यक्ष रूप से Field Marketing का कार्य है जिसे हर एक सामान्य आदमी नहीं कर सकता। अमूमन तौर पे इस तरह का कार्य Sales Agent और MBA Executives करते हुए दिखाई देते हैं। उनके लिए यह कार्य सरल हो सकता है क्योंकि वे अपनी इच्छा और शिक्षा के साथ फील्ड मार्केटिंग में उतरते हैं।

जहाँ तक सामान्य जनता की बात है, वो फील्ड मार्केटिंग के इस कार्य को करने में असहजता महसूस करती है। कहने को तो ये ट्रेनिंग मुहैया कराते है किन्तु उस ट्रेनिंग का लाभ उन्हीं को मिल पाता है जो फील्ड मार्केटिंग करने में सजह हैं। डायरेक्ट सेलिंग के इस पूरे खेल की समस्या ही यही है की यहाँ व्यक्ति को उसकी इच्छा व उसके मूल स्वाभाव से अलग होकर कार्य करना पड़ता है।

क्या लाभ मिलता है जोशीले भाषणों का ?

सेमिनार, मीटिंग व ट्रेनिंग यह सब कुछ केवल जोशीले भाषणों पर टिका होता है।
100-200 लोगों के समक्ष 2, 4 सूट बूट धारी, आँखों पर चश्मा लगाये, 35 से 45 वर्ष की आयु वाले, धारा प्रवाह अंग्रेजी हिंदी बोलने वाले लोग मोटीवेट करते हैं की आप भी ये काम बड़ी आसानी से कर सकते हैं।

यदा-कदा किन्हीं मौकों पर कोई चर्चित हस्ती भी इस झूठे मोटिवेशनल सेमिनार का हिस्सा बन जाती है जो संभवतः पैसे देकर ही बुलाई जाती है। जोश, हवाबाज़ी, जूमला, कहावतों, वीर रस की कविताओं, अपवादों एवं गगन भेदी तालियों की गड़गड़ाहट से 1 रुपये के गुब्बारे में ठूंस करके हायड्रोजन गैस भर दी जाती है। इस प्रकार क्षणभर के लिए दिव्यांग व्यक्ति अपने आप को क्रिस्टियानो रोनाल्डो मान बैठता है। दिव्यांग शब्द का उपयोग मैंने केवल कटाक्ष करने के लिए किया है।

हक़ीक़त में यहाँ कोई ट्रेनिंग है ही नहीं, MLM Marketing का पूरा Business Plan आप केवल 20 मिनट में समझ सकते हैं। देश व शहर के अलग अलग कोने में आपको ट्रेनिंग लेने के लिए नहीं बल्कि जोशीले भाषणों पर ताली बजाने के लिए बुलाया जाता है। यह एक प्रकार का Top-up Recharge है जो आपको कुछ दिनों की Validity प्रदान करता है और Feeling Good का एहसास भी दिलाता है।

23 साल बीत जाने के बाद भी Multi Level Marketing के प्रति लोगों का नजरिया:

  • जोड़ने वाला काम
  • सामान बेचने वाला काम
  • लेग चलाने वाला काम
  • मुर्गा पकड़ने वाला काम
  • एक के नीचे एक लगाने वाला काम
  • अबे कुछ नहीं है इसमें चूतिया बनाते हैं सब
  • तुम भी इनके चक्कर में फंस गए क्या
  • बेटा भाग लो यहाँ से लाइफ बर्बाद हो जाएगी
  • सुनील भी यही कर रहा था, पांच साल बेकार हो गया अब बंबई में नौकरी कर रहा है
  • ठीक है तुम्हारा सामान यूज़ करके देख लेंगे पर भईया ये जोड़ने-जाड़ने का काम हमसे नहीं होगा
  • मनोज नेटवर्क मार्केटिंग में फंस गया है

ऊपर 11 बातें जो मैंने लिखी हैं, वो इनके 23 साल की उपलब्धी है।
आप समझ सकते हैं लोगों में इस काम के प्रति खीज व असंतोष कितना है। अगर किसी को commission ही कमाना है तो वो life insurance और health insurance क्यों न सेल करे ! MLM join करके ही कमीशन क्यों कमाए ? इस सवाल का जवाब आपको यूँ मिल सकता है की आप product भी खरीद सकते हैं और जितना आप खरीदेंगे उसपर आपको कुछ परसेंटेज लाभ मिलेगा। यदि कोई गलती से आपके कहने से Member बन गया तब आपको उसका भी commission मिलेगा। कुल मिलाकर आपको चारों से फायदा समझा दिया जाता है, आपको लगने लगता है की आप हर तरफ से पैसा कमा सकते हैं।

सदैव सफल लोगों की चर्चा ही MLM में क्यों होती है ?

इस काम में सफल लोगों की गिनती बेहद कम है किन्तु असफल लोगों की संख्या असीमित है। आखिर ये असफल लोगों पर चर्चा करने से भागते क्यों हैं ? जब भी आप इनसे किसी की असफलता पर प्रश्न करेंगे ये जवाब देने की बजाय उस असफल व्यक्ति को ही दोषी ठहरा देंगे या खुले मंच से आपका उपहास कर देंगे।

आपके इस कठिन प्रश्न से इनको बचना है, इनका मुँह काला पड़ जाता है जब आप एमएलएम से जुड़े लाखों करोड़ों लोगों की असफलता का कारण पूछते हैं। मैं ऐसे ही इसे गोरखधंधा नहीं कहता, इस व्यापार का मॉडल डायरेक्ट लोगों के बीच जाकर उनकी जेब से पैसा निकालना है उसके बाद उन तमाम लोगों से इनका कोई लेना-देना नहीं रह जाता। मैंने देखा है सामान्य लोगों को अपनी सेविंग तोड़कर इसमें पैसा लगाते हुए, नौकरी की चाह में भटकते नौजवान को इसमें फंसते हुए। यह कारनामा इनके सूट बूट और टाई लगाए ट्रैप एजेंट करते हैं। जब आप असफल हो जायेंगे ये आपसे लाइट स्पीड की रफ़्तार से दूर भाग जायेंगे।

किसे मल्टीलेवल मार्केटिंग का हिस्सा नहीं बनना चाहिए:

  • सभी स्टूडेंट, पढ़ने वाले युवा युवती इनसे दूर रहें
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लोग इनसे दूर रहें
  • प्राइवेट नौकरी में कार्यरत लोग जिनके पास समय नहीं है वे दूर रहें
  • सरकारी नौकरी वाला आराम परस्त व्यक्ति भी इनसे दूर रहे
  • घर से बहुत कम निकलने वाली ग्रहणियां इनसे दूर रहें
  • सफल दुकानदारी, सफल व्यापार से जुड़े लोग इनसे दूर रहें
  • बातचीत का हुनर जिनके पास नहीं है वे दूर रहें
  • मार्केटिंग का हुनर जिनके पास नहीं है वे दूर रहे
  • लोगों को समझाने का हुनर जिनके पास नहीं वे भी दूर रहें
  • जिन्हें एकांत जीवन पसंद है वे बिल्कुल भी इनकी बातों में ना आयें
  • झूठ बोलने और ठगने का गुण जिनमें नहीं वह भी दूर हो जाएं
  • नौकरी खोजता युवा इनके जाल में ना फंसे
  • यदि आपके लिए समय और पैसे का महत्त्व है तो इनसे दूर हो जाएं
  • अपने किसी दोस्त रिश्तेदार के कहने पर ना जुड़ें
  • अपने डॉक्टर, वकील, अध्यापक के कहने पर ना जुड़ें
  • ऑफिस में काम करने वाले सहकर्मियों के कहने पर ना जुड़ें

किसे मल्टीलेवल मार्केटिंग को एक बार आजमाना चाहिए:

  • वे सभी जिनके पास आय का बड़ा स्रोत पहले से मौजूद है
  • वे सभी जो किसी सामाजिक प्रोफेशन से जुड़े हुए हैं
  • वे सभी जिनके पास स्थायी व्यापार है और वे सेमिनार मीटिंग अटेंड करने के लिए स्वतंत्र हैं
  • यदि आप धन संपदा से पूर्ण हैं तो इसे भी आजमा लें
  • जिनके पास खोने को कुछ नहीं और पाने को सब कुछ है वो आ जाएं
  • मार्केटिंग जिनका शौक है वो आयें
  • लोगों से मिलने व बातचीत करने में जिसे कोई परहेज नहीं वो आ जाएं
  • बातों की चपलता, झूठ, फरेब, ठगी में आप गोल्ड मेडलिस्ट हैं तो जरूर आयें
  • बड़े बाप की औलाद हैं, समय और पैसे की बर्बादी आपका शौक है तो इसे भी एक बार जरूर करें
  • अगर आप लोगों को मुँगेरी लाल के सपने दिखाने में पारंगत हैं तो यह आपके लिए ही है

बुराईयों से हटकर एक विशेष बात:

एमएलएम मार्केटिंग, डायरेक्ट मार्केटिंग या नेटवर्क मार्केटिंग जो भी आप कहें। यदि आप बहुत कर्मठ व्यक्ति हैं, सेल्फ मोटिवेटेड हैं, कभी हार न मानने वाले व्यक्ति हैं और जीवन में बड़ा धन अर्जित करना चाहते हैं सीमित संसाधनों के साथ; तब आप MLM का हिस्सा बनने से ना चूकें।

  • MLM के खेल में कोई आपका लीडर नहीं होता अतः किसी को अपना लीडर ना बनायें बल्कि स्वयं के लीडर बनें।
  • यहाँ किसी को अपना गुरु ना मानें और ना ही किसी को अपनी प्रेरणा, आपको क्या करना है बस ध्यान यहीं तक केंद्रित रहे।
  • अपनी मेहनत और अपने फैसले केवल अपने लिए ही लें किसी दूसरे के लिए नहीं।
  • समय और लक्ष्य खुद निर्धारित कर उसकी ओर अग्रसर रहें।
  • जो नहीं आता उसे सीख लें, जो आता है उसे बेहतर करें जल्द लक्ष्य प्राप्ति के लिए।
  • किसी को यहाँ सर, बॉस आदि कहना छोड़ दें।
  • अपनी टीम के हेड के लिए नहीं बल्कि अपने लिए काम करें चाहे कोई नाराज़ ही क्यों न हो।
  • यह सदैव ध्यान रखें की कौन आपको इस्तेमाल में ले रहा है और कौन आपका मार्गदर्शन कर रहा है।

एमएलएम में लंपटों की कमी नहीं है, यहाँ लोग काली बिल्ली बनकर अपनों का ही रास्ता काटते नज़र आते हैं। दुनियां की बातें सुनने व उनके बहकावे में आने की बजाय आप खुद अपने अंतर्मन में झाँक लें की क्या आप सच में MLM के लिए बने हैं। यदि आपका मन ‘ना’ बोल दे तो कभी भी आप इसका हिस्सा मत बनिए और यदि मन ‘हाँ’ बोल दे तो आपने अब तक अपने जीवन में ऐसा क्या किया है जो MLM की कार्य पद्धति से मेल खता हो उसके बारे में सोचिये।

आपको अपने अंदर कारण तलाशना पड़ेगा वरना आप भी रिवाइटल वाले जोश के आधार पर ही इनके जाल में फंसेंगे। MLM जब भी आपको ज्वाइन करना हो उसके पहले कारण तलाशिये कि आप क्यों इसका हिस्सा बनना चाहते हैं और क्या उसके लायक हैं भी या नहीं ? मेरी बात मानिये आप कभी भी इनके मीटिंग, सेमिनार, समारोह अथवा ट्रेनिंग में जाने के बाद ज्वाइन करने का फैसला ना लें। सेमिनार समारोह आदि में केवल ट्रैप एजेंट अपने जोशीले भाषणों से आपके अंदर हायड्रोजन गैस भर देते हैं ताकि आप हवा में उड़ने लगें।

एमएलएम मार्केटिंग के तोपबाज:

हिन्दुस्तान में एमएलएम मार्केटिंग को धराशाही करने में इनके तोपबाजों का ही हाथ और पांव है।
यहाँ पर जो एचिवर्स होते हैं, गोल्ड, सिल्वर, डाइमंड मेंबर होते हैं ये बिल्ली की तरह 7 साथ घर खुद घूमते हैं और अपनी टीम में जुड़े साधारण मेंबर को भी घुमा देते हैं। इसीलिए मैंने कहा किसी को भी अपना बॉस या सर बनाने का काम ना करें।

अब ये जितने भी एचिवर्स होते हैं इनका काम है आज A कंपनी की बड़ाई करना, फिर कुछ महीने बाद B कंपनी से जुड़कर उसकी बड़ाई करना, फिर अगले कुछ महीने बाद C कंपनी से जुड़कर उसकी बुराई करना। इन गधों ने पूरे डायरेक्ट सेलिंग मार्केट का सत्यानाश कर दिया है।

इनका मकसद न तो किसी नए मेंबर को लीड करना है, न उसका मार्गदर्शन करना है, ना ही उसकी सहायता कर उसे कामयाब बनाना है।
ये नए मेंबर का सौदा करते हैं, छाती पीटते हुए कहते हैं मेरे पास 50-100 बन्दों की टीम है तू टेंशन मत ले मैं उनसे सेल निकलवा लूंगा। हर चंद महीनों सालों में ये एचिवर्स किसी नए MLM से जुड़ते हैं और पुराने MLM को छोड़ते मिलते हैं। इन्हें केवल अपने Payout की चिंता होती है, न की टीम से जुड़े मेंबर की। माल कहाँ से ज्यादा आएगा, रुपइया कहाँ ज्यादा छपेगा, कितना बड़ा चेक कहाँ से बनेगा बस इसी धुन में ये तोपबाज लगे रहते हैं और इनके पद्चिन्हों पर चलने वाला मेंबर रोज नई-नई एमएलएम कंपनी में हाथ आजमाई करने दिवालिया हो जाता है।

तोपबाजों के ये कारनामें पब्लिक भी देख रही होती है।
अरे, ..शर्मा जी आप तो A1 MLM से जुड़े थे न ?
शर्मा जी कहे – हां गुप्ता जी, पर वो बेकार था। अब जिससे हम जुड़े हैं ना वो बहुत ही बढ़िया है।
कल आएंगे आपको इनका प्लान समझाने, ..अच्छा ओके चलते हैं।

इतना ही, नहीं अब तो डिजिटल जमाना है। आजकल ये सारे MLM तोपबाज अपना-अपना यूट्यूब चैनल बनाकर, एक दूसरे की MLM Company की बुराई करते देखे जा सकते हैं। कहाँ क्या कमी है, कहाँ क्या खामी है ये खुद बता देंगे। आप जिस भी MLMS कंपनी को ज्वाइन करने का मन बना रहे हैं बस उसका नाम लिखकर यूट्यूब में सर्च करें। आपको कुछ अच्छाई और कुछ बुराई बताने वाले तोपबाज मिल जायेंगे।

इतनी जल्दी तो पंछी भी अपना घोसला नहीं बदलता जितनी जल्दी जल्दी ये तोपबाज एमएलएम कंपनी बदलते रहते हैं।
लोगों का डायरेक्ट सेलिंग के प्रति अविश्वास बढ़ाने में इन तोपबाजों ने कोई कसर न छोड़ी है। एक दूसरे की कंपनी की खिल्लियां उड़ाते ये आपको यूट्यूब पर मिलेंगे, कमाल की बात ये है की यदि किसी एमएलएम कंपनी के Ex Member ने उसकी पोल खोली तो उसे काउंटर करने के लिए कुछ Supporting Member आ जाते हैं।

यह सब कुछ एक गिरोह के रूप में चलाया जा रहा है, एक गैंग की तरह। जो कमा गया वो कमा गया और जो हाथ मल रहा है वो कई साल से हाथ ही मल रहा है। जब उसकी हायड्रोजन गैस खतम हो जाती है तो उसे सेमिनार में प्रायोजित तरीके से बुलाकर पुनः गैस डाल दी जाती है ताकि वो फिर अगले कुछ महीने खयालों में Bank Balance, BMW, Mercedes, Bungalow का ख्वाब लिए आसमान में उड़ता रहे।

केवल इनका ही उत्पाद इस्तेमाल करने की विवशता:

मैंने पहले ही बता दिया है, MLM कंपनियां अपने किसी उत्पाद की मैन्युफैक्चरिंग नहीं करती, ये केवल प्रोडक्ट पर लेबल लगाकर सामान बेचती हैं। चूँकि इनके बिज़नेस मॉडल में पैसा कमाने के केवल 2 ही तरीके होते हैं जिसमें से एक है उत्पादों की बिक्री और दूसरा है पैसे लेकर दी जाने वाली मेम्बरशिप।

ऐसे में ये कंपनियां अपने ही उत्पाद को बढ़ाचढ़ा कर, उसकी अच्छाइयां बतलाकर, उसकी गुणवत्ता बतलाकर बेचती हैं। कुछ कंपनी के उत्पाद सस्ते होते हैं मगर सभी के नहीं। यूजर को समस्या केवल एक ही आती है कि उसे केवल इनके द्वारा निर्मित उत्पादों को ही इस्तेमाल करना होता है। इनसे जुड़कर यूजर अपनी पसंद व इच्छा को लेकर आज़ाद नहीं।

तेल साबुन, चीनी नमक, शैम्पू सेविंग क्रीम, कच्छा बनियान, सूरमा लिपस्टिक, आटा चावल, जूता चप्पल, पजामा लँगोट, मंजन ब्रश, इत्यादि जितने भी घरेलु उत्पाद हैं वो इनके ही लेने पड़ते हैं। यह थोड़ा मुझे अजीब लगता है क्योंकि मैं थोड़ा अपनी पसंद के आइटम इस्तेमाल करने का आदि हूँ। थोड़ा अजीब लगता है देखकर की घर में चारों तरफ किसी एमएलएम कंपनी का ही उत्पाद रखा हुआ है।

एक समस्या यह भी आती है की इनके प्रोडक्ट हर समय उपलब्ध नहीं होते। आपको आज मंजन लेना है तो वो हो सकता है ना मिले। मजबूरी में बाजार से दूसरा मंजन लाना होगा; इस प्रकार कुछ फिजूल की खरीदारी भी होने लगती है। प्रोडक्ट खरीद पर कुछ पैसे कमाने के चक्कर में आपको इनका सारा प्रोडक्ट इतेमाल में लेना पड़ जाता है, चाहे वो आपको अच्छा लगे या ना लगे। अपने दिल को समझाकर कहना ही पड़ जाता है, ..हम्म अच्छा है।

एमएलएम मार्केटिंग को क्या करियर के तौर पर लिया जा सकता है ?

मेरा उत्तर है ‘ना
किन्तु यदि आप यह सवाल किसी एमएलएम वाले से करेंगे तो वो कहेगा मैं तो खुद यही काम करता हूँ और अच्छे पैसे कमाता हूँ। दिक्कत क्या है की यहाँ कोई आपको उचित सलाह नहीं देना चाहता क्योंकि आप उसकी आय का जरिया हैं। आपके जुड़ने से और खरीद से उसे पैसा मिलेगा अतः उसका हर संभव प्रयास रहता है आपके हर सवाल का सकारात्मक जवाब देना।

करियर का आशय केवल धन से नहीं होता।
कल्पना करिये, आपने 5 साल एमएलएम मार्केटिंग में कार्य किया किन्तु आप सफल नहीं हो पाए। अंततः आपने छटवें साल में एमएलएम मार्केटिंग का काम छोड़ दिया। अब आप मुझे बताइये आपको अपने जीवन में मिला क्या ? न तो पैसा, ना ज्ञान और ना ही कोई स्किल। ज़िन्दगी के 6 साल बर्बाद करने के बाद आप फिर शून्य पर आ गए; अब आप क्या करेंगे, कहाँ जायेंगे, क्या सीखेंगे, कैसी नौकरी करेंगे !!

यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आपकी कामयाबी दूसरे की कामयाबी पर निर्भर है, केवल आपका काबिल होना काफी नहीं।
अन्य पेशे में आप अपनी क़ाबलियत के आधार पर धन अर्जित करते हैं जबकि मल्टी लेवल मार्केटिंग में आपकी आय आपसे जुड़े नीचे के लोगों द्वारा की गयी मेहनत पर आश्रित है। अगर आपके नीचे लोग फेल हो गए तो आपका फेल होना भी तय है 100%.

इसलिए मैं इसे करियर नहीं मानता। बेहतर होगा पहले आप अपने जीवन में अच्छी नौकरी या रोजगार की प्राप्ति करें फिर उसके उपरांत अतिरिक्त आय की लालसा लिए मल्टी लेवल मार्केटिंग में किस्मत आजमा सकते हैं। सब कुछ दांव पर लगा करके आप कभी भी एमएलएम का हिस्सा ना बनें चाहे सूट-बूट वाले आपके अंदर कितना भी जोश भरने की कोशिश करें।

डायरेक्ट सेलिंग, एमएलएम मार्केटिंग क्या है ? यह आप समझ गए होंगे।
मल्टी लेवल मार्केटिंग की कमियों खामियों पर यह विस्तृत चर्चा आपके काम की है। बेशक यह लीगल काम है, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है मगर इसका इतिहास बहुद अच्छा नहीं है। कई कंपनियां तो भाग गयीं, कई मौजूद हैं और कई अभी आने को बेताब हैं। मगर यह क्षेत्र सबके लिए नहीं है।

इस लेख को पूरी तन्मयता के साथ पढ़कर ही आप मल्टी लेवल मार्केटिंग की दुनियां में आप कदम रखें।

धन्यवाद

लेखक:
रवि प्रकाश शर्मा

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