जल संरक्षण निबंध लेख

जल संरक्षण क्या होता है ?
Water Conservation in Hindi

जल संरक्षण का मुख्य अर्थ होता है जल के इस्तेमाल को कम करना तथा सफाई, कृषि व निर्माण आदि के लिए अवशिष्ट जल का पुनः चक्रण करना।
इसके अलावा जल संरक्षण का अर्थ पानी की बर्बादी और प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने से है। जल संरक्षण एक बहुत ही अनिवार्य आवश्यकता है क्योंकि वर्षा का पानी हर समय उपलब्ध नहीं होता। अतः जल की कमी को पूरा करने के लिये पानी का संरक्षण ही एक बेहतर विकल्प है।

जल संरक्षण का महत्व
Jal Sanrakshan in Hindi

आज हम सभी को जल के महत्त्व तथा भविष्य में जल की कमी से संबंधित समस्याओं को समझने की जरूरत है। पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जल संरक्षण और जल बचाव बहुत ही आवश्यक होता है। क्योंकि सभी जानते हैं कि जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है, जहां पर पानी व जीवन आज की तारीख तक मौजूद है।

हमारी धरती पर पानी की आवश्यकता जीव-जंतु, कीड़े-मकौड़े, इंसान व अन्य सजीव प्राणियों अथवा पेड़-पौधों को है। बिना पानी के कोई भी जीवित नहीं रह सकता है। पानी की जरूरत हमें पीने के लिए, खाना पकाने के लिए, नहाने के लिए, कपड़े धोने के लिए, कृषि आदि जैसी हर गतिविधियों में पड़ती है। इसीलिए पानी को बचाने के लिए सिर्फ हम इंसान ही जिम्मेदार हैं। अगर हम सही कोशिश करेंगे तभी हम पानी को जरूर बचा सकते हैं।

जल संरक्षण पर निबंध
Jal Sanrakshan Nibandh

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ‘जल ही जीवनहै‘। जल के बिना जीवन का अस्तित्व हो ही नहीं सकता, कम से कम हमारी पृथ्वी पर तो बिल्कुल भी नहीं। विज्ञान भी यही कहता है कि जल के बिना जीवन का होना कल्पना के परे है। जल एक ऐसा महत्वपूर्ण तत्व है, जिसपर धरती के सभी प्राणी पूरी तरह निर्भर हैं जिनमें हम मानव भी शामिल हैं। भविष्य में धरती पर जल की कमी न हो इसके लिये जल को संरक्षित करके जल को बचाना ही जल संरक्षण कहलाता है।

हमारे भारत और दुनियां के दूसरे देशों में जल की भारी कमी देखने को मिलती है।
कई जगहों पर जल की कमी के कारण आम लोगों को पानी पीने, खाना बनाने तथा रोजमर्रा के कार्यों को पूरा करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। यही नहीं कई स्थानों पर हालात इस कदर बुरे हैं की पानी के लिए लोगों को काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में अधिक जल पाया जाता है वहां पर लोग जल को बचाने की बजाए उसको बर्बाद करते दिखाई देते हैं। सामान्यतः यह देखा जाता है कि जिन स्थानों पर जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है वहां के लोग अपने दैनिक जीवन में जल को आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल करते हैं। उन्हें जल की महत्ता समझ में ही नहीं आती; किन्तु हमें जल की महत्ता एवं उसके मोल को जल्द से जल्द समझ लेना बेहद आवश्यक है नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। क्योंकि हमारे द्वारा पानी की बर्बादी कल उन्हें जल के आभाव में जीने को विवश कर देगी।

पृथ्वी पर जल कुल की उपलब्धता के आँकड़े एवं शुद्ध पानी का प्रतिशत:

यह हम जानते हैं की पृथ्वी का करीब 70% हिस्सा जल में डूबा हुआ है। नदी, सागर और महासागरों में यूँ तो जल का असीमित भंडार है लेकिन उसके बावजूद भी पीने योग्य जल की उपलब्धता बेहद कम है।

अगर हम आंकड़ों की बात करें तो पृथ्वी के कुल 70% जल के हिस्से में से केवल 2.5% पानी ही शुद्ध रूप में मौजूद है बाकि 67.5% हिस्से का पानी खारा एवं सागर आधारित है।

आपको जानकार हैरानी होगी की 2.5% शुद्ध जल की उपलब्धता में से मात्र 1% पानी ही आसानी से हासिल किया जा सकता है, बाकि 1.5% पानी का हिस्सा ग्लेशियरों और बर्फ के मैदानों में जमा हुआ है।

संक्षेप में कहूं तो, पृथ्वी ग्रह के पानी का केवल 0.007 प्रतिशत ईंधन और 6.8 बिलियन लोगों को खिलाने के लिए ही उपलब्ध है। बाकि पानी का यह विशाल भंडार जो हमें दिखाई दे रहा है वो हमारे किसी काम का नहीं। सच में ये आँकड़े आँखें खोल देने वाले हैं मगर फिर भी हम मनुष्य जल संरक्षण के प्रति लापरवाह दिखाई देते हैं।

जल की भारी कमी को देखते हुए हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम जल को बचाएं एवं इसको संरक्षित करने के लिए अपने परिवार व आस-पास के लोगों को को भी जागरूक करें। यदि हमने ऐसा नहीं किया तो भविष्य में हमें खुद ही जल की कमी की समस्या से जूझना पड़ेगा।

निबंधप्रस्तावना
Essay Introduction

ईश्वर ने धरती पर हमें तीन महत्वपूर्ण तत्व दिए हैं, जो कि जल, वायु तथा भोजन हैं।
यदि इन तीनों में से कोई एक भी तत्व न हो तो धरती पर जीवन असंभव बन जायेगा। हर एक तत्व का अपना एक अलग और खास महत्व है। वहीं जल का एक बहुत ही अनमोल महत्व है। जल को प्रकृति की एक खास और अनमोल धरोहर माना जाता है। जैसा कि आप सभी ने वो कथन सुना होगा – “जल ही जीवन है”। इस कथन से आप समझ सकते हैं कि जल के बिना कोई व्यक्ति जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता। पृथ्वी पर पाने जाने वाले वन्य प्राणी एवं पक्षी जल के महत्त्व को हम मानवों से कहीं ज्यादा अच्छी तरह समझते हैं तभी तो वे जल का उतना ही इस्तेमाल करते हैं जितना उनके जीवन के लिए आवश्यक है। मगर हम मानव एक विकसित सभ्यता होने के बावजूद जल संरक्षण के महत्त्व को झुठला रहे हैं। अतः वो दिन दूर नहीं जब हमें पानी के लिए सोने और चाँदी जैसी कीमत चुकानी पड़ेगी।

जल संरक्षण करने के उपाय
How to Conserve Water in Hindi

हम अपने रोजमर्रा के जीवन में जल को कैसे बचा सकते हैं, इसके लिये कई तरीके हैं। जिसे उपयोग में लाकर जल संरक्षण आसानी से किया जा सकता है –

  • जल संरक्षण करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है और हर व्यक्ति में इसके प्रति जागरूकता पैदा करना हमारा कर्तव्य है।
  • जब आवश्यकता हो तभी हमें अपने बागान या उद्यान में पानी देना चाहिए। वहीं पाइप से पानी देने के बजाय फुहारे से पानी देना ज़्यादा बेहतर होता है।इससे कई गैलन पानी बचाया जा सकता है।
  • गंदे, अशुद्ध पानी का सिंचाई में इस्तेमाल करके भी जल संरक्षण किया जा सकते है। इससे शुद्ध पेय जल की कमी नहीं होगी और खेती भी हो जायेगी।
  • पानी की बचत करने के लिये सूखा अवरोधी पौधा लगाना भी एक बहुत ही अच्छा तरीका है।
  • पानी का रिसाव न हो इसके लिये पाइपलाइन व नलों के जोड़ ठीक से लगे होने चाहिये। इससे प्रतिदिन आपके लगभग 20 गैलन पानी की बचत होगी।
  • यदि आप कार को धोने के लिये पाइप की बजाय बाल्टी तथा मग का प्रयोग करें तो आप 150 गैलन तक पानी की बचत कर सकते हैं।
  • शेविंग या ब्रश करते समय नल को हमेशा बंद रखें।
  • ज़्यादा से ज़्यादा पानी की बचत करने के लिये हर दिन शौच के समय कम से कम पानी का प्रयोग करें।
  • फलों व सब्जियों को खुले नल की जगह भरे हुए पानी के बर्तन में धोएं।
  • वर्षा का पानी छत पर संरक्षित करके, उसका इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए छत पर पानी की टंकी बनानी आवश्यक है।
  • अक्सर देखा जाता है कि सार्वजनिक स्थल के नल की टोटी खराब होती है। जिस कारण ज़रूरत से अधिक पानी बह जाता है ऐसे नलों की मरम्मत करके तथा लोगों में जागरूकता बढ़ाकर हजारों लीटर पानी को बचाया जा सकता है।
  • नदियों के जल में कभी भी कूड़ा-कचरा या गंदा पानी नहीं डालना चाहिए। जिससे कि आवश्यकता पड़ने पर उस पानी का प्रयोग पीने व अन्य उपयोगों के लिए किया जा सके।
  • जल संरक्षण के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार को कानून बनाना चाहिए।
  • जल संरक्षण हेतु विद्यालय और महाविद्यालयों में निरंतर प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। जिससे कि आज की युवा पीढ़ी समय रहते ही इसकी गंभीरता को अच्छी प्रकार से समझ सके।
  • फ्लश टैंक में व्यर्थ पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं बर्फ के टुकड़े को किसी पौधे या फिर लाॅन में डाल देना चाहिए। ऐसा करने से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
  • इसके अलावा यदि आप मटके का पानी उपयोग करते हैं तो आप कम रिसाव वाले मटकों का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से भी पानी की बचत होती है।

निबंध उपसंहार
Essay Conclusion

पृथ्वी पर हमारे जीवन का सबसे जरूरी स्रोत जल ही है। क्योंकि हमें अपने जीवन के सभी कार्यों को निष्पादित करने के लिये पानी की आवश्यकता होती है। जैसे पीने, खाना पकाने, स्नान करने, कपड़ा धोने, कृषि आदि के लिये। हमें पानी को बिना प्रदूषित करे भविष्य की पीढ़ी के लिये इसे बचाने की आवश्यकता है। यदि हमने ऐसा नहीं किया तो हमारी आने वाली पीढ़ी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और इसका अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं कि आज धरती पर केवल 1% प्रतिशत पानी ही आसानी से उपलब्ध है। इसलिए हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम पानी की बर्बादी को रोकें। पानी का इस्तेमाल सही प्रकार से करें और जल की गुणवत्ता को भी बनाए रखें।

जल संरक्षण पर आधारित यह विस्तृत निबंद सिर्फ एक लेख मात्र नहीं अपितु इसका असल अर्थ वर्तमान में जल के आभाव को दर्शाना है। वर्तमान समय में पृथ्वी पर मनुष्य की बाबादी बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है अतः जल संरक्षण के लिए मानव आबादी पर अंकुश लगाना भी अति आवश्यक है क्योंकि पूरी दुनियां की वर्तमान कुल आबादी करीब 7 बिलियन है अतः यदि समय रहते मानवों ने अपनी बढ़ती आबादी पर लगाम नहीं लगाई तो जल संरक्षण के सभी प्रयास विफल होकर रह जायेंगे।

लेखिका:
ज़रनैन निसार