हिंदी कहानी धारना

अक्सर कला क्षेत्र से जुड़े एक नायक को उसकी जिन्दगी की रचना से जोड़कर देखा जाता है लेकिन वह उसका एक ख्याब ही होता है जो एक बिन्दु से जोड़कर अल्ग-अल्ग विषयों पर अपनी धारना को व्यकत करता है। यह एक मात्र काल्पनिक घटनाओं का स्रोत होता है, आज की कहानी भी हमारी कुछ ऐसी ही है। आईए देखते हैं कहानी…ओह आईए पढ़ें कहानी..।

धारना:

चिड़ीया चह-चला रही थी, खुला आसमान, बिन्दू गहरे तलाब में नहा रहा था। अचानक गोली चलने की आवाज आई, पंछी ईधर-उधर उड़ने लगे। बिन्दू कपड़े पहनकर उस ओर चल दिया, देखा हरीमपुर वाला मामा राईफल लेकर आया, जानवरों के निशानें लगा रहा था।

मामा मुझे भी ‘राईफल, चलाना सिखाओ,
जा पहले कपड़े बदल कर आ, फिर सीख लेना।

बिन्दू –

मेरा इंतजार करना, मैं अभी गया और अभी आया।
माँ… माँ…

बड़बड़ाता हुआ…

माँ घर पर नहीं है न ही छोटी बहन, टीवी चल रहा है।
नमस्कार दोस्तों, अभी की ब्रेकिंग न्यूज़.. लड़के की हुई आपके शहर से किडनैपिंग !
कुछ अपहरणकर्ताओं ने उठाया बच्चे को…

गौर से देखिए इन शैतानों के चहरे…
पहले मिठास भरी बातें करते हैं फिर नशीला पदार्थ घोलते हैं और चलाकी से चाय पिलाते हैं।

बिन्दू ने कपड़े बदले, टीवी बंद किया और चल दिया –

मामा जी कहाँ हो तुम, मामा जी कहा हो तुम,
जोर से अव़ाज लगाने लगा…

अचानक एक बुढ़ा व्यक्ति सड़क के एक कोने से निकलकर आता है
बिन्दू कहता है – तुम कौन हो…!

मैं भी चोकीदार! ह..हा..ह..हा हंसते हुए –
हाथ में, इंची टेप, पकड़ते हुए..

मैं इस सुनसान रास्ते पर, टेलर की दुकान करता हूँ..मुझे, नाप लेना है…तुमने कहा था, मेरा इंतजार करना, मैं अभी आता हूँ।
अरे जहाँ सुन… तो नाप देने नहीं आए हो.. मैं तेरा मामा।

बचाओ..! बचाओ.. !
बिन्दू भगता है, दो लोग और आगे से आते हैं, उसे जबरन मुँह से पकड़ कर, कार में खींच लेते हैं।

इतने में बिन्दू की नींद खुली, माँ बिन्दू के पास बैठी थी।
क्या हुआ…क्या हुआ…

किसने, पकड़ लिया! उठ जाओ।
माँ. एक सपना आया।

जिसमें मर चुके, वर्षों पहले, ‘वो हिटलर, जैसे दिखने वाले शिकारी मामा वापिस आए।
अरे.. बिन्दु बेटा, मरे हुए भी कभी वापस आते हैं क्या. !

लेखक:
संदीप कुमार नर (बलाचौर)